• Latest
  • Trending
पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी

पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी — पर असली ख़बर यह है कि रकम नहीं बढ़ी, और इसकी एक ठोस वजह है

August 3, 2026
नारियल उद्योग

नारियल का छिलका, सात लाख लोगों की रोजी

October 14, 2026
कृषि भवन, नई दिल्ली में पराली प्रबंधन की समीक्षा बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव। फोटो : पीआईबी

हरियाणा में पराली की आग 53% घटी

October 14, 2026
प्रधानमंत्री मोदी

भारत की विकास गाथा: स्टार्टअप, व्यापार, डेटा और खादी

October 13, 2026
प्याज

प्याज महंगा, सेना को 27 पदक और नई रक्षा पहल

October 13, 2026
dal

दाल का आयात बिल 14,634 करोड़ रुपये घटा

October 12, 2026
daily-news

सप्ताह की समीक्षा: रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी, GST नियमों में राहत और रिकॉर्ड रक्षा निर्यात

October 11, 2026
daily-news

14416 पर चार साल में 47.75 लाख कॉल

October 10, 2026
medicine

दवा, कोयला, खादी और व्यापार पर सरकार के नए कदम

October 9, 2026
अर्थव्यवस्था

जीएसटी सुधार, नाविकों की संख्या और भारतनेट का विस्तार

October 9, 2026
यशोभूमि, नई दिल्ली में 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 8 अक्टूबर 2026। श्रेय : पीएमओ (pmindia.gov.in)

किसान के फोन पर किस्त, हर जिले में 5जी

October 8, 2026
यूपीआई और डीपीआई ने बदली भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था

कर्ज महंगा, पर अर्थव्यवस्था 7.1% की रफ्तार पर

October 7, 2026
भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

October 6, 2026
Wednesday, October 14, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी — पर असली ख़बर यह है कि रकम नहीं बढ़ी, और इसकी एक ठोस वजह है

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 3, 2026
in the blitz, कृषि
0
पीएम-किसान अब 2031 तक चलेगी

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।सीधी बात यह है कि पीएम-किसान बंद नहीं हो रही। कैबिनेट ने 31 जुलाई को इस योजना को 2026–27 से 2030–31 तक जारी रखने की मंज़ूरी दे दी है, और इसके लिए 3.15 लाख करोड़ रुपये तय किए हैं। देश के 9.49 करोड़ से ज़्यादा किसान परिवारों को साल में 6,000 रुपये, तीन किस्तों में, सीधे बैंक खाते में मिलते रहेंगे।

अब वह हिसाब जो ज़्यादातर जगह नहीं छपा। 3.15 लाख करोड़ रुपये पांच साल के लिए हैं। यानी हर साल करीब 63,000 करोड़ रुपये। यह रकम लगभग उतनी ही है जितनी अभी हर साल खर्च हो रही है। मतलब साफ़ है — सरकार ने योजना को आगे बढ़ाया है, किस्त की रकम नहीं बढ़ाई। 6,000 रुपये सालाना का मतलब महीने के 500 रुपये। किसी भी परिवार का खर्च इससे नहीं चलता, और सरकार ने कभी दावा भी नहीं किया कि इससे खर्च चलेगा।

YOU MAY ALSO LIKE

नारियल का छिलका, सात लाख लोगों की रोजी

हरियाणा में पराली की आग 53% घटी

किस्त का असली फ़ायदा वक़्त में है: बुवाई से पहले खाते में आए 2,000 रुपये का मोल इसलिए है कि उस हफ़्ते किसान के पास और कोई नक़द नहीं होता।

500 रुपये महीना कमाई नहीं है। लेकिन बुवाई वाले हफ़्ते में खाते में आ जाए, तो यह सीज़न के पहले उधार की जगह ले लेता है — और वही सबसे महंगा उधार होता है।

एक नज़र में

• मंज़ूरी: 31 जुलाई 2026, केंद्रीय कैबिनेट
• अवधि: 2026–27 से 2030–31 तक
• कुल रकम: 3.15 लाख करोड़ रुपये — यानी हर साल करीब 63,000 करोड़
• कितने किसान: 9.49 करोड़ से ज़्यादा परिवार
• कितना मिलेगा: साल में 6,000 रुपये, 2,000-2,000 की तीन किस्तों में, सीधे खाते में
• अब तक: 23 किस्तों में 4.47 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा भेजे जा चुके
• महिला किसान: 1.06 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा — हर चार में से करीब एक लाभार्थी महिला

तो फिर इस पैसे का असली काम क्या है? दरअसल यह कमाई बढ़ाने की योजना नहीं, समय की योजना है। खेती की कमाई साल में दो बार आती है — फ़सल कटने पर। लेकिन खर्च उससे पहले होता है, बुवाई के हफ़्तों में, जब बीज, खाद और डीज़ल खरीदना होता है। यही वह गड्ढा है जिसमें छोटा किसान हर साल गिरता है और गांव के साहूकार से ब्याज पर पैसा उठाता है। 2,000 रुपये की किस्त उस पूरे खर्च के सामने छोटी है, पर उस ख़ास गड्ढे के सामने बड़ी है। और चूंकि पैसा सीधे खाते में आता है, किसान उसे जहां ज़रूरत हो वहां लगाता है — किसी को यूरिया चाहिए, किसी को पंप की मरम्मत।

एक बात साफ़ कहनी ज़रूरी है, और यह शिकायत नहीं, आगे का रास्ता है। यह पैसा ज़मीन के काग़ज़ पर मिलता है। इसलिए बटाईदार किसान और खेत में काम करने वाला मज़दूर, जो असल में खेती करता है पर जिसके नाम ज़मीन नहीं है, इस योजना के दायरे से बाहर रह जाता है। कई राज्य अब बटाईदारों का अलग रजिस्टर बनाने लगे हैं — अगले पांच साल इसी काम को पूरा करने का सही मौका हैं। दूसरी बड़ी बात यह है कि पीएम-किसान ने चुपचाप देश का सबसे भरोसेमंद किसान रिकॉर्ड तैयार कर दिया है — आधार से जुड़ा, बैंक खाते से जुड़ा, ज़मीन के रिकॉर्ड से मिलाया हुआ। फ़सल बीमा, मिट्टी की जांच, मौसम की चेतावनी और सस्ते कर्ज़ — ये सब इसी एक सूची पर खड़े किए जा सकते हैं। किस्त छोटी रहेगी। जो सूची इस किस्त ने बनाई है, वह छोटी नहीं है।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation