नई दिल्ली, 10 अक्टूबर। रात के तीन बजे भी 14416 पर कोई जवाब देता है। यह नंबर 10 अक्टूबर 2022 को खुला था। तब से इस पर 47.76 लाख कॉल आ चुकी हैं। यह आंकड़ा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस से पहले 9 अक्टूबर की विज्ञप्ति में दिया। ब्लिट्ज के हिसाब से यह रोज करीब 3,270 कॉल बैठती हैं। टेली-मानस के 53 सेल हैं और सभी 36 राज्य-केंद्रशासित प्रदेश इससे जुड़े हैं।
कौन फोन कर रहा है
मंत्रालय ने 13.35 लाख कॉल करने वालों का ब्योरा जांचा है। यह कुल कॉल का 28 फीसदी है। इनमें 5.85 लाख महिलाएं थीं, यानी 43.78 फीसदी। पुरुष 7.23 लाख थे, यानी 54.18 फीसदी। फोन करने वालों में 73.2 फीसदी की उम्र 18 से 45 साल के बीच है। यानी ज्यादातर वे लोग हैं जिनके कमाने के साल चल रहे हैं।
जिले में भी इलाज का रास्ता बना है। 1.83 लाख से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में मानसिक स्वास्थ्य सेवा जुड़ चुकी है। जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम 767 जिलों के लिए मंजूर है। ब्लिट्ज के हिसाब से हर जिले के हिस्से औसतन 239 केंद्र आते हैं। मंत्रालय अब “मन जागृति” नाम का अभियान स्कूल, कॉलेज, दफ्तर और अस्पतालों में चलाएगा। राज्य अपने-अपने यहां कार्यक्रम करेंगे।
भारत को क्या मिला
एक ऐसा नंबर जो मुफ्त है और हर वक्त उठता है। और चार साल का एक रिकॉर्ड, जो बताता है कि कामकाजी उम्र के लोग चुप रहने की जगह बोलने लगे हैं।
एक नजर में
•टेली-मानस कॉल, 10 अक्टूबर 2022 से : 47,75,644 (अक्टूबर 2026 तक)
सेल : 53 · राज्य-केंद्रशासित प्रदेश : 36 · नंबर : 14416, 24 घंटे
•जांचे गए प्रोफाइल : 13,35,275 — महिलाएं 5,84,587 (43.78%), पुरुष 7,23,427 (54.18%); 18–45 साल : 73.2%
•मानसिक स्वास्थ्य सेवा वाले आयुष्मान आरोग्य मंदिर : 1.83 लाख से ज्यादा · जिला कार्यक्रम : 767 जिले
तुलना
•पुरुष कॉलर : 7,23,427 — बड़ा समूह, 100%
•महिला कॉलर : 5,84,587 — पुरुषों का 80.8%
•पुरुष कॉलर महिलाओं से 23.8% ज्यादा हैं।
हमारा हिसाब
47,75,644 ÷ 1,461 दिन = 3,269 कॉल रोज। 5,84,587 ÷ 13,35,275 = 43.78%। 1,83,000 ÷ 767 = 239 केंद्र प्रति जिला। 13,35,275 ÷ 47,75,644 = 28% कॉल का ब्योरा जांचा गया। हिसाब ब्लिट्ज का; विज्ञप्ति में कुल और हिस्से हैं, रोज की दर नहीं।
भारत को क्या मिला
एक मुफ्त हेल्पलाइन जिसने चार साल रोज 3,269 कॉल सुनीं, और पीछे 1.83 लाख केंद्र।
ब्लिट्ज की सराहना
टेली-मानस के 53 सेलों के काउंसलर, और स्वास्थ्य मंत्रालय — जिसने सिर्फ कॉल की गिनती नहीं, कॉल करने वालों का ब्योरा भी छापा।
आंकड़े स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की 9 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति (पीआईबी रिलीज आईडी 2321522) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
मंत्रालय राज्यवार कॉल के आंकड़े और उन कॉल का हिस्सा छापे जो आगे इलाज तक पहुंचीं। तब जिन राज्यों से प्रति लाख आबादी सबसे कम कॉल आती हैं, वहां पहले मदद पहुंचेगी।
रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़, 62.7% उछाल
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर। देश के कारखानों में बना रक्षा सामान अब 38,424 करोड़ रुपये का विदेश जा रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 9 अक्टूबर को नई दिल्ली में एसआईडीएम चैंपियन अवॉर्ड 2026 देते हुए यह आंकड़ा बताया। रक्षा मंत्रालय की उसी दिन की विज्ञप्ति के मुताबिक यह रिकॉर्ड है और पिछले साल से 60 फीसदी से ज्यादा है।
विज्ञप्ति में पिछले साल का आंकड़ा नहीं है। मंत्रालय के 3 अप्रैल 2025 के दस्तावेज “मेक इन इंडिया पावर्स डिफेंस ग्रोथ” में है — 2024-25 में 23,622 करोड़ रुपये। यानी एक साल में 14,802 करोड़ रुपये की बढ़त, ब्लिट्ज के हिसाब से 62.7 फीसदी। मंत्री ने 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये का लक्ष्य दोहराया। अब यह लक्ष्य सिर्फ 30.1 फीसदी दूर है।
निजी कंपनियां आगे
अप्रैल 2025 के दस्तावेज में 2024-25 का बंटवारा भी है। 23,622 करोड़ में 15,233 करोड़ रुपये निजी कंपनियों ने बेचे, 8,389 करोड़ रुपये सरकारी रक्षा उपक्रमों ने। निजी हिस्सा 64.5 फीसदी। 2025-26 का बंटवारा विज्ञप्ति में नहीं है। मंत्री ने कहा कि कुल रक्षा उत्पादन में निजी हिस्सा अभी करीब 24 फीसदी है और इसे 50 फीसदी तक ले जाना है। यानी निजी कंपनियां विदेश में जितना बेचती हैं, देश में उतना नहीं बनातीं। यही असली खबर है।
मंत्री ने कहा कि रिसर्च पर खर्च को लागत नहीं, तैयारी में निवेश मानिए। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, महानिदेशक (खरीद) ए. अन्बरासु, एस आईडीएम के संस्थापक अध्यक्ष बाबा कल्याणी और अध्यक्ष अरुण रामचंदानी मौजूद थे। 15 पुरस्कार स्वदेशी तकनीक, नए उत्पाद, डिजाइन, आयात की जगह देसी सामान, बेहतर उत्पादन और निर्यात के लिए दिए गए। विजेताओं के नाम विज्ञप्ति में नहीं हैं।
भारत को क्या मिला
एक साल में 14,802 करोड़ रुपये की ज्यादा विदेशी कमाई और देश में डिजाइन की नौकरियां। और दुनिया के बाजार में खरीदार से बेचने वाले की पहचान।
एक नजर में
•रक्षा निर्यात 2025-26 : 38,424 करोड़ रुपये (रक्षा मंत्रालय, 9 अक्टूबर 2026)
•रक्षा निर्यात 2024-25 : 23,622 करोड़ रुपये — निजी 15,233 करोड़, सरकारी उपक्रम 8,389 करोड़ (रक्षा मंत्रालय, 3 अप्रैल 2025)
•लक्ष्य : 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये
रक्षा उत्पादन में निजी हिस्सा : अभी करीब 24%, लक्ष्य 50%
एसआईडीएम चैंपियन अवॉर्ड 2026 : 15, 9 अक्टूबर को
तुलना
निर्यात 2024-25 : 23,622 करोड़ रुपये — 100%
निर्यात 2025-26 : 38,424 करोड़ रुपये — 2024-25 का 162.7%
लक्ष्य 2029 : 50,000 करोड़ रुपये — 2025-26 का 130.1%
•निर्यात एक साल में 62.7% बढ़ा; 2029 का लक्ष्य आज के स्तर से 30.1% ऊपर है।
हमारा हिसाब
(38,424 − 23,622) ÷ 23,622 = 62.7%। (50,000 − 38,424) ÷ 38,424 = 30.1%। 15,233 ÷ 23,622 = 64.5% निजी हिस्सा। हिसाब ब्लिट्ज का; विज्ञप्ति में “60% से ज्यादा” है, बंटवारा नहीं।
भारत को क्या मिला
एक साल में रक्षा से 14,802 करोड़ रुपये ज्यादा विदेशी कमाई, और एक लक्ष्य जो अब एक साल की बढ़त भर दूर है।
ब्लिट्ज की सराहना
भारतीय रक्षा निर्माता संघ (एसआईडीएम) और वे निजी कंपनियां जिन्होंने 2024-25 के निर्यात का 64.5% बेचा — नीति को माल में बदलने के लिए।
आंकड़े रक्षा मंत्रालय की 9 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति (पीआईबी रिलीज आईडी 2321523) और “मेक इन इंडिया पावर्स डिफेंस ग्रोथ”, रक्षा मंत्रालय, 3 अप्रैल 2025 से; pib.gov.in और static.pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की सलाह
रक्षा मंत्रालय 2025-26 के निर्यात का निजी और सरकारी बंटवारा और पुरस्कार विजेताओं की सूची छापे। तब पता चलेगा कि रिकॉर्ड किसने बनाया।
वर्ल्डस्किल्स में भारत दसवां, छह रजत
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर। वेल्डिंग से लेकर सॉफ्टवेयर तक, 63 हुनरों में 70 भारतीय युवा शंघाई में दुनिया से भिड़े। 48वीं वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता 22 से 27 सितंबर 2026 तक चली। भारत दसवें स्थान पर रहा, छह रजत पदक और 20 उत्कृष्टता पदक के साथ। प्रधानमंत्री कार्यालय के 9 अक्टूबर 2026 के नोट के मुताबिक यह भारत की सबसे बड़ी टीम थी। आकाशवाणी ने 27 सितंबर 2026 को यही नतीजा दिया था, कौशल विकास मंत्री जयंत चौधरी के हवाले से।
ब्लिट्ज के हिसाब से
70 में 26 युवा पदक या उत्कृष्टता पदक लेकर लौटे — टीम का 37.1 फीसदी। प्रधानमंत्री ने टीम से 7, लोक कल्याण मार्ग पर मुलाकात की। युवाओं ने बताया कि प्रतियोगिता में नए औजार, नया सॉफ्टवेयर और नए तरीके फौरन सीखने पड़े। प्रधानमंत्री ने कहा कि हुनर डिग्री जितना ही जरूरी है और कौशल संस्थान आईआईटी-आईआईएम से कम नहीं। उन्होंने युवाओं से प्रशिक्षण सुधारने के सुझाव मांगे और उन्हें हुनर का राजदूत बनने को कहा। मंत्री जयंत चौधरी भी मौजूद थे।

भारत को क्या मिला
दुनिया के हुनर के मुकाबले में दसवां स्थान, जो बताता है कि भारतीय प्रशिक्षण कहां खड़ा है और अभी कितना चलना है। 63 हुनरों में छह रजत — दस में एक।
ब्लिट्ज की सलाह
कौशल विकास मंत्रालय 26 पदक विजेताओं की सूची हुनर और संस्थान के नाम के साथ छापे, ताकि जिन केंद्रों ने उन्हें तैयार किया, वे पहचाने जाएं।
5जी लैब से 634 यूज-केस, 32 पेटेंट
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर। एक प्रयोगशाला पर 97.67 लाख रुपये खर्च हुए और उसमें अब तक छह काम के यूज-केस बने। यह हिसाब उन आंकड़ों का है जो संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस में दिए। संचार मंत्रालय की 9 अक्टूबर की विज्ञप्ति के मुताबिक 100 लैब अक्टूबर 2023 में कॉलेजों को दी गई थीं, कुल 97.67 करोड़ रुपये में। अप्रैल 2025 तक सभी 100 चालू हो गईं।

लैब से क्या निकला
अगस्त 2026 तक 17,400 से ज्यादा छात्र इन लैब में काम कर चुके थे — औसतन 174 प्रति लैब। 97 संस्थान अब 5जी के कोर्स चलाते हैं, जिनमें 21,000 से ज्यादा छात्र हैं। लैब में 634 उत्पाद और यूज-केस बने, 158 पेटेंट आवेदन हुए और 32 पेटेंट मिल गए। ब्लिट्ज के हिसाब से आवेदनों पर मंजूरी की दर 20.3 फीसदी है। हर लैब के हिस्से 6.34 यूज-केस और 1.58 आवेदन आते हैं।
5जी इनोवेशन हैकाथॉन के दूसरे दौर में 1,400 से ज्यादा प्रस्ताव आए। 50 टीमें फाइनल में चुनी गईं और उन्हें शुरुआती पैसा मिला। 35 टीमें अभी कांग्रेस में अपना काम दिखा रही हैं। दूरसंचार सचिव अमित अग्रवाल ने कहा कि काम प्रतियोगिता और प्रोटोटाइप से आगे पेटेंट, कंपनी और बाजार तक जाना चाहिए।
एशिया का सबसे बड़ा मेला
यह कार्यशाला दसवीं इंडिया मोबाइल कांग्रेस का हिस्सा थी। मंत्री ने उसी दिन मीडिया से कहा कि यह एशिया का नंबर एक डिजिटल और दूरसंचार सम्मेलन बन गया है। मंत्रालय की दूसरी विज्ञप्ति के मुताबिक 60,000 वर्ग मीटर की प्रदर्शनी, 100 से ज्यादा देश, 2,000 से ज्यादा यूज-केस, 400 से ज्यादा स्टार्टअप और 900 से ज्यादा वक्ता। मंत्री ने कहा — पिछला दशक दुनिया को भारत लाने का था, अगला भारत को दुनिया तक ले जाने का है।
भारत को क्या मिला
— एक पाइपलाइन। जिस छात्र ने 2025 में कॉलेज की लैब में नेटवर्क-स्लाइसिंग का प्रोटोटाइप बनाया, वही 2030 में भारतीय 6G उपकरण विदेश बेचेगा। दुनिया की दूरसंचार कंपनियों के आगे 32 पेटेंट छोटा आंकड़ा है। पर तीन साल पहले जिन कॉलेजों में लैब थी ही नहीं, वहां से 32 पेटेंट छोटा नहीं है।
एक नजर में
•5जी यूज-केस लैब : 100, अक्टूबर 2023 में दी गईं, अप्रैल 2025 तक सब चालू; खर्च 97.67 करोड़ रुपये
लैब में काम करने वाले छात्र : 17,400 से ज्यादा (अगस्त 2026 तक)
•5जी कोर्स चलाने वाले संस्थान : 97; छात्र : 21,000 से ज्यादा
उत्पाद और यूज-केस : 634 · पेटेंट आवेदन : 158 · पेटेंट मिले : 32
हैकाथॉन 2026 : •1,400 से ज्यादा प्रस्ताव; 50 फाइनलिस्ट; 35 आईएमसी में
तुलना
•पेटेंट आवेदन : 158 — 100%
•पेटेंट मिले : 32 — आवेदनों का 20.3%
हर पांच आवेदन में एक पेटेंट बन चुका है।
हमारा हिसाब
97.67 ÷ 100 = 97.67 लाख रुपये प्रति लैब। 634 ÷ 100 = 6.34 यूज-केस प्रति लैब। 17,400 ÷ 100 = 174 छात्र प्रति लैब। 32 ÷ 158 = 20.3%। हिसाब ब्लिट्ज का; विज्ञप्ति में सिर्फ कुल आंकड़े हैं।
भारत को क्या मिला
कॉलेज की एक लैब पर 97.67 लाख रुपये के बदले छह चालू 5जी उपयोग और 174 प्रशिक्षित छात्र।
ब्लिट्ज की सराहना
वे 97 संस्थान जिन्होंने लैब को कोर्स में बदला, और दूरसंचार विभाग — जिसने उद्घाटन नहीं, नतीजा गिना।
आंकड़े संचार मंत्रालय की 9 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्तियों (पीआईबी रिलीज आईडी 2321511 और 2321510) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज़ की सलाह
दूरसंचार विभाग 32 पेटेंट की सूची संस्थान के नाम के साथ छापे, ताकि उद्योग को आविष्कार मिलें और कॉलेजों को पहचान।
गांव तक ब्लू डार्ट का पार्सल, डाकिया लाएगा
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर। ऑनलाइन मंगाया सामान अब दूर के गांव में भी दरवाजे पर आएगा और पैसे डाकिया लेगा। डाक विभाग और ब्लू डार्ट एक्सप्रेस लिमिटेड ने 9 अक्टूबर को नई दिल्ली में समझौता किया। संचार मंत्रालय की उसी दिन की विज्ञप्ति के मुताबिक ब्लू डार्ट के पार्सल अब 1.64 लाख से ज्यादा डाकघरों के नेटवर्क से जाएंगे। शहर, कस्बे और गांव तक — उन दूर-दराज इलाकों तक भी जहां और सुविधाएं कम हैं। प्रीपेड और कैश ऑन डिलीवरी, दोनों तरह के पार्सल शामिल हैं। डिलीवरी की पुष्टि ओटीपी से होगी और पार्सल को हर वक्त ट्रैक किया जा सकेगा।

विज्ञप्ति में समझौते की रकम, अवधि या पार्सल की संख्या नहीं है। लेन-देन साफ है। ब्लू डार्ट को वे गांव मिलेंगे जहां उसकी गाड़ियां नहीं जातीं। डाक विभाग को चिट्ठियों के लिए बने नेटवर्क पर पार्सल का काम मिलेगा और संगठित लॉजिस्टिक्स में बड़ी जगह। साथ में एक एक्सप्रेस कंपनी के काम करने के तरीके देखने को मिलेंगे। मंत्रालय ने इसे ई-कॉमर्स से जोड़ा है, जहां गांव तक के आखिरी दस किलोमीटर सबसे महंगे पड़ते हैं।
भारत को क्या मिला
गांव का खरीदार जो ऑनलाइन मंगाकर दरवाजे पर डाकिए को पैसे दे सके। और 1.64 लाख काउंटर वाला डाक नेटवर्क, जो चिट्ठियां घटने पर पार्सल से कमाए।
ब्लिट्ज़ की सलाह
डाक विभाग हर तिमाही बताए कि इस समझौते में कितने पार्सल गए, ताकि लोग देख सकें कि नया कारोबार कितनी दूर तक पहुंचा।
पनडुब्बी-रोधी ‘मंगरोल’ 12 अक्टूबर को नौसेना में
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर गुजरात के जूनागढ़ जिले के मछुआरों के बंदरगाह मंगरोल का नाम अब एक युद्धपोत पर है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड का बनाया यह पनडुब्बी-रोधी पोत 12 अक्टूबर 2026 को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में भारतीय नौसेना में शामिल होगा। रक्षा मंत्रालय की 9 अक्टूबर की विज्ञप्ति के मुताबिक पश्चिमी नौसेना कमान के प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्स्यायन समारोह की अध्यक्षता करेंगे। यह कोच्चि के यार्ड से इस श्रेणी का तीसरा पोत है और इसमें 80 फीसदी से ज्यादा सामान देसी है। आकाशवाणी ने 22 अगस्त 2026 को यार्ड से पोत सौंपे जाने की खबर इसी देसी आंकड़े के साथ दी थी।

पोत में तीन डीजल इंजन हैं जो वाटरजेट चलाते हैं। इसमें ‘अभय’ सोनार, हल्के टॉरपीडो, देसी पनडुब्बी-रोधी रॉकेट लॉन्चर और ‘मारीच’ टॉरपीडो डिकॉय लगा है। इसका काम तटीय पानी में पनडुब्बी की निगरानी, छोटे समुद्री अभियान और बारूदी सुरंगों से निपटना है। इसी नाम का पुराना माइनस्वीपर आईएनएस मंगरोल (एम85) 7 अप्रैल 2004 तक सेवा में था। समारोह में हथियार और सेंसर बनाने वाली कंपनियों के लोग, पूर्व सैनिक और मंत्रालय के अधिकारी होंगे।
भारत को क्या मिला
तट के पास पनडुब्बी ढूंढने वाला एक पोत, जिसका सोनार, डिकॉय और लॉन्चर देश में बना। और एक श्रेणी का तीसरा पोत, जो बताता है कि यार्ड की लाइन चल पड़ी है।
ब्लिट्ज की सलाह
मंत्रालय कमीशनिंग की विज्ञप्ति में उन भारतीय कंपनियों के नाम दे जिन्होंने सोनार, डिकॉय और लॉन्चर बनाया, ताकि 80 फीसदी के आंकड़े के चेहरे दिखें।
आंगनवाड़ी गोद लें विश्वविद्यालय : प्रधानमंत्री
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर। गांव की आंगनवाड़ी में अब मेडिकल के छात्र, एनएसएस और एनसीसी के स्वयंसेवक भी दिखेंगे। महिला एवं बाल विकास पर दो दिन के राष्ट्रीय विभागीय सम्मेलन के समापन पर प्रधानमंत्री ने यही कहा। प्रधानमंत्री कार्यालय की 9 अक्टूबर की विज्ञप्ति के मुताबिक उन्होंने विश्वविद्यालयों से पास की आंगनवाड़ी गोद लेने को कहा। उन्होंने जिला और नगर स्तर पर ऐसे ही चिंतन शिविर और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए अलग शिविर का सुझाव दिया। उनके और सुझाव — किशोरियों की सेहत और पोषण पर ज्यादा ध्यान। बच्चों को महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान की पढ़ाई, उम्र के हिसाब से। और महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए एक जिला एक उत्पाद। सुषमा स्वराज भवन में राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

भारत को क्या मिला
एक योजना जिसमें मेडिकल और विश्वविद्यालय के छात्र उन केंद्रों में पहुंचें जहां सबसे छोटे नागरिकों को खाना मिलता है। और वजन तौला जाता है।
ब्लिट्ज़ की सलाह
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय सम्मेलन के फैसले तारीख के साथ छापे, ताकि राज्यों को पता हो कि क्या और कब बताना है।
डीएसटी की वेबसाइट अब 22 भाषाओं में
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर। मदुरै या इंफाल की छात्रा अब फेलोशिप का विज्ञापन अपनी भाषा में उसी दिन पढ़ सकेगी जिस दिन वह खुलेगी। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की नई वेबसाइट dst.gov.in और most.gov.in को मंत्री जितेंद्र सिंह ने 9 अक्टूबर को लॉन्च किया। विभाग की उसी दिन की विज्ञप्ति के मुताबिक भाषिणी के जरिए सारी सामग्री 22 भाषाओं में है। अनुदान, फेलोशिप, प्रस्ताव मांगने की सूचनाएं और आवेदन फॉर्म एक जगह खोजे जा सकते हैं। साइट सरकार के डिजिटल ब्रांड नियम डीबीआईएम 3.0 और वेब दिशानिर्देश जीआईजीडब्ल्यू 3.0 पर बनी है। स्क्रीन-रीडर, बड़े अक्षर और ज्यादा कॉन्ट्रास्ट की सुविधा है। नतीजों और आखिरी तारीख के दिन भीड़ संभालने के लिए सीडीएन लगा है। डीएसटी सचिव उमेश वी. वाघमारे मौजूद थे।

भारत को क्या मिला
विज्ञान का पैसा और मौका अब उस भाषा में, जिसमें छात्र सोचता है।
ब्लिट्ज की सलाह
डीएसटी हर महीने भाषा के हिसाब से विजिट के आंकड़े छापे, ताकि भाषिणी का असर इस्तेमाल से परखा जा सके।
रिसर्च डेस्क : महंगाई के चार खोए महीने
मुंबई, 10 अक्टूबर। अप्रैल-मई 2020 और अप्रैल-मई 2021 में राज्यों की महंगाई के सरकारी आंकड़े कभी छपे ही नहीं। लॉकडाउन में कीमतें जुटाने का काम रुक गया था। रिजर्व बैंक के वर्किंग पेपर 01/2026 में पूर्णिमा शॉ और आर. के. सिन्हा ने यह खाली जगह भरी है। पेपर 9 अक्टूबर 2026 को जारी हुआ। उन्होंने रिजर्व बैंक के अपने घरेलू सर्वे का इस्तेमाल किया, जो हर दो महीने होता है और महामारी में भी रुका नहीं था। सर्वे से तीन चीजें लीं — शहरों में लोगों को महंगाई कितनी लग रही थी, तीन महीने बाद की उम्मीद, और हर राज्य की पिछली छपी महंगाई। इनसे चार महीनों के राज्यवार अनुमान बने। पेपर कहता है कि इन अनुमानों को जोड़ने पर वे देश की सरकारी महंगाई से करीब-करीब मेल खाते हैं। पेपर अभी शुरुआती है और इसके विचार लेखकों के हैं, रिजर्व बैंक के नहीं।
फोटो नहीं — यह खाना खाली रखें : वर्किंग पेपर में कोई आयोजन नहीं; कार्ड भी नहीं, क्योंकि सार में आंकड़े नहीं हैं।
भारत को क्या मिला
— राज्यों की कीमतों के इतिहास के चार खोए महीने, एक ऐसे सर्वे से वापस, जो कभी रुका नहीं।
ब्लिट्ज़ की सलाह
सांख्यिकी मंत्रालय आगे किसी रुकावट में राज्यों के सूचकांक के लिए अनुमान का तरीका तय रखे, ताकि यह खाली जगह दोबारा न बने।














