नई दिल्ली, 14 अक्टूबर। हरियाणा के खेतों में इस सीजन में पराली जलाने के मामले पिछले साल से आधे से भी कम रह गए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि 15 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच हरियाणा में ऐसे मामले 53.3 फीसदी घटे। उत्तर प्रदेश में करीब 32 फीसदी की कमी आई। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की 13 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति में है।
पंजाब में भी मामले कुछ घटे हैं पर मध्य प्रदेश और राजस्थान में बढ़े हैं। इन दोनों राज्यों से कहा गया है कि वे प्रभावित जिले और गांव पहचानें और तुरंत खास योजना लागू करें।
मशीनें बंद न पड़ें
पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ हुई इस बैठक में बताया गया कि केंद्र अब तक राज्यों को 3.54 लाख से ज्यादा फसल अवशेष मशीनें दे चुका है। इस साल 2026-27 में 26,109 नई मशीनें और दी गई हैं।
चौहान ने साफ कहा कि पुरानी खराब मशीनों की मरम्मत तुरंत हो। कस्टम हायरिंग सेंटर चालू रहें, ताकि छोटे किसान को मशीन सस्ते किराये पर मिले।
पैसा कितना, किसे
फसल अवशेष प्रबंधन योजना में 2018-19 से 2025-26 तक केंद्र ने राज्यों को 4,266.47 करोड़ रुपये दिए। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा पंजाब का है, 2,056.50 करोड़ रुपये, यानी करीब 48 फीसदी। हरियाणा को 1,171.71 करोड़ और उत्तर प्रदेश को 868.67 करोड़ रुपये मिले।
इस साल के लिए 592.57 करोड़ रुपये तय हैं। इनमें से 430.87 करोड़ रुपये जारी हो चुके हैं, यानी करीब 73 फीसदी। पंजाब से कहा गया है कि वह पिछली रकम का उपयोगिता प्रमाणपत्र जल्दी भेजे, ताकि अगली किस्त रुके नहीं।
पराली से कमाई
बैठक में तय हुआ कि किसानों को सीधे बिजलीघरों, बायो-सीएनजी प्लांटों और 2जी इथेनॉल प्लांटों से जोड़ा जाए। सूखे वाले इलाकों में पराली चारे के तौर पर मवेशियों तक पहुंचे। पूसा-44 जैसी लंबी किस्म की जगह पूसा 2090 और पीआर126 जैसी कम समय वाली किस्में बढ़ाई जाएं, ताकि कटाई के बाद खेत खाली करने का वक्त मिले।
भारत को क्या मिला
उत्तर भारत में सर्दियों की साफ हवा, और किसान के लिए उस चीज से आमदनी जिसे वह अब तक जला देता था।
एक नजर में
•पराली जलाने में कमी (15 सितंबर–12 अक्टूबर) : हरियाणा 53.3%, उत्तर प्रदेश करीब 32%
•मशीनें : 3.54 लाख से ज्यादा, और 2026-27 में 26,109 नई
2018-19 से 2025-26 तक जारी •रकम : 4,266.47 करोड़ रुपये
2026-27 : 592.57 करोड़ में से 430.87 करोड़ रुपये जारी।
तुलना
•पंजाब : 2,056.50 करोड़ रुपये — सबसे बड़ा हिस्सा, 100%
•हरियाणा : 1,171.71 करोड़ रुपये — पंजाब का 57%
•उत्तर प्रदेश : 868.67 करोड़ रुपये — पंजाब का 42%
•कुल जारी रकम का करीब 48% पंजाब को मिला।
हमारा हिसाब
2,056.50 ÷ 4,266.47 = करीब 48%। 430.87 ÷ 592.57 = इस साल की रकम का करीब 73% जारी।
भारत को क्या मिला
साफ हवा और धान किसान के लिए कमाई का नया रास्ता।
ब्लिट्ज की सराहना
हरियाणा और उत्तर प्रदेश के वे किसान, जिन्होंने माचिस की जगह मशीन चुनी।
आंकड़े कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की 13 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति (पीआईबी रिलीज आईडी 2322934) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की सलाह
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग हर जिले में पराली जलाने के रोज के मामले पिछले साल से मिलाकर जारी करे, ताकि अच्छा काम करने वाले जिलों से बाकी सीख सकें।
दिसंबर में कनाडा जाएंगे मोदी
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में कनाडा जाएंगे। यह बात कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के दफ्तर ने 13 अक्टूबर 2026 को दोनों नेताओं की फोन पर बातचीत के बाद जारी ब्योरे में कही है।
नई दिल्ली में प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी उसी रात ब्योरा जारी किया। इसके मुताबिक दोनों नेता रिश्तों में आई सकारात्मक रफ्तार को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए। व्यापार, ऊर्जा, तकनीक, सुरक्षा और लोगों के आपसी रिश्तों में ठोस नतीजे लाने की बात हुई।
2030 तक दोगुना व्यापार
कनाडा के ब्योरे में आगे की तारीखें हैं। दोनों नेताओं ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) की बातचीत “जल्द से जल्द” पूरी करने का वादा दोहराया। मकसद है 2030 तक दोनों देशों का आपसी व्यापार दोगुना करना।
किसी भी चीज को चार साल में दोगुना करना हो तो उसे हर साल करीब 19 फीसदी बढ़ना होगा।
ब्लिट्ज का यह हिसाब बताता है कि लक्ष्य कितना बड़ा है।
कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू की अगुवाई में एक व्यापार दल अभी भारत में है। विदेश मंत्री अनीता आनंद भी नई दिल्ली आई हैं। फोन से एक हफ्ता पहले भारत में दोनों देशों के बीच सुरक्षा पर बातचीत हुई थी।
उसी दिन हरियाणा के कुंडली में कनाडा के सस्केचेवान प्रांत के मंत्री और वहां के दाल किसानों के संगठन भारतीय वैज्ञानिकों के साथ दाल से प्रोटीन बनाने पर बैठे।
भारत को क्या मिला
प्रधानमंत्री की यात्रा की पक्की तारीख, व्यापार का तय लक्ष्य, और ऊर्जा व खेती में एक भरोसेमंद साझेदार।
ब्लिट्ज डेटा कार्ड
नई दिल्ली · 14 अक्टूबर।
एक नजर में
•बातचीत : 13 अक्टूबर 2026, प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री कार्नी
•व्यापार लक्ष्य : 2030 तक आपसी व्यापार दोगुना
•सीईपीए : बातचीत “जल्द से जल्द” पूरी करने का वादा
•अगली मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी की कनाडा यात्रा, दिसंबर
तुलना
•नहीं निकाली : किसी सरकार ने अभी के व्यापार का आंकड़ा जारी नहीं किया, इसलिए ईमानदार
तुलना
मुमकिन नहीं।
हमारा हिसाब
चार साल में दोगुना : 2 का चौथा मूल = 1.189, यानी 2026 से 2030 तक हर साल करीब 19% बढ़त।
भारत को क्या मिला
रिश्तों का तारीखवार कैलेंडर, और खेती-ऊर्जा साझा प्राथमिकता।
ब्लिट्ज की सराहना
दोनों तरफ के वे वार्ताकार जो अब तय समय-सीमा पर काम कर रहे हैं।
आंकड़े प्रधानमंत्री कार्यालय की 13 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति (पीआईबी रिलीज आईडी 2323044) और कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के 13 अक्टूबर 2026 के ब्योरे से; pib.gov.in और pm.gc.ca पर जांचे।
ब्लिट्ज की सलाह
वाणिज्य विभाग वह आधार साल और आंकड़ा जारी करे जिससे 2030 का दोगुना लक्ष्य नापा जाएगा, ताकि दोनों तरफ के निर्यातक हर महीने प्रगति देख सकें।
पूर्वोत्तर में 100 रुपये जमा, कर्ज सिर्फ 47
आइजोल, 14 अक्टूबर। पूर्वोत्तर के लोग बैंक में 100 रुपये जमा करते हैं, तो उनमें से सिर्फ 47 रुपये वहीं कर्ज के रूप में लौटते हैं। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मिजोरम यूनिवर्सिटी में नॉर्थ ईस्ट बैंकर्स कॉन्क्लेव 3.0 में यह बात कही। यह उनके मंत्रालय की 13 अक्टूबर की विज्ञप्ति में दर्ज है।
यानी हर 100 रुपये में से 53 रुपये पूर्वोत्तर के बाहर कर्ज बनकर जा रहे हैं।

शाखाएं पहुंचीं
पहले कॉन्क्लेव के बाद 131 नई बैंक शाखाएं खुलीं और 126 एटीएम लगे। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के 47 नए केंद्र बने। आज पूरे इलाके में 6,674 बैंक शाखाएं और 5,823 एटीएम हैं। करीब 99.93 फीसदी गांवों तक बैंकिंग की कोई न कोई सुविधा है।
बैंक शाखा खोलने के लिए गांव की कम से कम आबादी की शर्त 3,000 से घटाकर 2,000 कर दी गई है। बिना शाखा गए होने वाले लेनदेन में 90.2 फीसदी हिस्सा यूपीआई का है।
अब कर्ज की बारी
सिंधिया ने बैंकों से कहा कि हर राज्य के लिए कर्ज-जमा अनुपात का अलग लक्ष्य तय हो। पूर्वोत्तर में ज्यादातर जमीन समुदाय की होती है, इसलिए उसे गिरवी रखना मुश्किल है। उन्होंने इसके लिए गिरवी के नियमों में ढील और इलाके के हिसाब से अलग ढांचे की मांग की।
उन्होंने बताया कि मई 2025 के राइजिंग नॉर्थ ईस्ट निवेशक सम्मेलन के बाद आठ राज्यों में करीब 40,000 करोड़ रुपये का निवेश जमीन पर शुरू हो चुका है।
भारत को क्या मिला
पूर्वोत्तर का पैसा वहीं के कारोबारियों, किसानों और महिलाओं के काम आए, तो इलाके की तरक्की और तेज होगी।
एक नजर में
•कर्ज-जमा अनुपात : हर 100 रुपये जमा पर 47 रुपये कर्ज
•शाखाएं 6,674 · एटीएम 5,823 · करीब 99.93% गांवों में बैंकिंग सुविधा
पहले कॉन्क्लेव के बाद •नई : 131 शाखाएं, 126 एटीएम
•बिना शाखा वाले लेनदेन में यूपीआई : 90.2%
तुलना
•जमा : 100 रुपये — आधार
•इलाके में कर्ज : 47 रुपये — 47%
•इलाके के बाहर : 53 रुपये — 53%
हमारा हिसाब
चुने गए करीब 9,000 गांवों में से 6,905 तक पहुंच = करीब 77%। शाखा की आबादी शर्त 3,000 से 2,000 = एक-तिहाई कम।
भारत को क्या मिला
पूर्वोत्तर की बचत पूर्वोत्तर में काम आए।
ब्लिट्ज की सराहना
वे बैंककर्मी जिन्होंने आठ राज्यों में 131 नई शाखाएं खोलीं।
आंकड़े पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की 13 अक्टूबर की विज्ञप्ति (पीआईबी रिलीज आईडी 2323045) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की सलाह
राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियां हर तिमाही अपने राज्य का कर्ज-जमा लक्ष्य और प्रगति जारी करें, ताकि 47 रुपये का आंकड़ा बदलता दिखे।
त्वचा रोगों के इलाज की आयुष गाइडलाइन जारी
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर। सोरायसिस, सफेद दाग (विटिलिगो), डर्मेटाइटिस, पित्ती (अर्टिकेरिया) और दाद जैसे त्वचा रोगों के इलाज के अब तय नियम हैं। ये आयुर्वेद, सिद्ध, यूनानी और होम्योपैथी, चारों के डॉक्टरों के लिए हैं। आयुष मंत्रालय ने 11वें आयुर्वेद दिवस पर इन रोगों की मानक इलाज गाइडलाइन (एसटीजी) जारी की। यह मंत्रालय की विज्ञप्ति में है।
दिल्ली के अस्पतालों में परखी गई
इन गाइडलाइन की एक खास बात यह है कि इन्हें कागज पर ही नहीं, अस्पताल में परखा गया। दिल्ली सरकार के आयुष निदेशालय के साथ मिलकर प्राथमिक और दूसरे स्तर के अस्पतालों के चिकित्सा अधिकारियों से इन्हें आजमाया गया। उनकी राय अंतिम दस्तावेज में जोड़ी गई।
गाइडलाइन स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के आयुष वर्टिकल ने बनाई है। इसमें आयुष अनुसंधान परिषदों के विशेषज्ञ, योग विशेषज्ञ और आधुनिक चिकित्सा के डॉक्टर भी शामिल रहे। हर पद्धति के लिए बचाव, जांच, इलाज, फॉलो-अप और पुनर्वास के अलग नियम दिए गए हैं।
आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने कहा कि इससे आयुष पद्धतियां देश की स्वास्थ्य व्यवस्था से और गहराई से जुड़ेंगी। चारों गाइडलाइन ayush.gov.in पर मुफ्त पढ़ी जा सकती हैं।
भारत को क्या मिला
आयुष डॉक्टर के पास जाने वाले मरीज को अब देश में कहीं भी एक तय तरीके का इलाज मिल सकेगा।
ब्लिट्ज की सलाह
आयुष मंत्रालय इन गाइडलाइन का आसान हिंदी सार मरीजों के लिए भी जारी करे, ताकि वे जान सकें कि इलाज में क्या उम्मीद रखें।
गतिशक्ति ने पांच साल में 421 परियोजनाएं परखीं
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर। नई सड़क कहां से गुजरेगी, रास्ते में जंगल है या बिजली की लाइन, यह अब एक डिजिटल नक्शे पर पहले ही दिख जाता है। पीएम गतिशक्ति नेशनल मास्टर प्लान के पांच साल पूरे हो गए हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बताया कि नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप इस पर 421 परियोजनाएं परख चुका है। इनकी कुल कीमत करीब 20.23 लाख करोड़ रुपये है।
ब्लिट्ज के हिसाब से एक परियोजना औसतन करीब 4,805 करोड़ रुपये की बैठती है।
एक नक्शा, 58 मंत्रालय
यह प्लेटफॉर्म देश में ही भास्कराचार्य नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस एप्लीकेशंस एंड जियो-इन्फॉर्मेटिक्स (बीसैग-एन) ने बनाया है। इसमें 58 केंद्रीय मंत्रालयों-विभागों और सभी 36 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों की 1,800 से ज्यादा परतों का डेटा है। 2023-24 में यह गिनती 1,463 थी, यानी करीब 23 फीसदी बढ़त।
फरवरी 2026 तक 352 परियोजनाएं परखी गई थीं। अब यह गिनती 421 है, यानी करीब आठ महीने में 69 और। 2024-25 से जिला मास्टर प्लान भी शुरू हुआ, ताकि गांव-कस्बे के स्कूल, अस्पताल और पानी की पाइपलाइन भी इसी नक्शे पर तय हों।
केंद्रीय कैबिनेट ने अब एकीकृत परिवहन और लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण को भी मंजूरी दे दी है। यह परिवहन की योजना, जांच और असर की परख करेगा।
भारत को क्या मिला
परियोजनाएं बीच में अटकें नहीं, और देश में बना ऐसा औजार जिसे हर राज्य इस्तेमाल कर सके।
एक नजर में
•परखी गई परियोजनाएं : 421, करीब 20.23 लाख करोड़ रुपये की
•डेटा परतें : 1,800 से ज्यादा (2023-24 में 1,463)
•दायरा : 58 केंद्रीय मंत्रालय-विभाग, सभी 36 राज्य-केंद्रशासित प्रदेश
तुलना
•अब तक परखी परियोजनाएं : 421 — •आधार
फरवरी 2026 तक : •352 — आज की गिनती का 84%
•फरवरी 2026 के बाद 69 परियोजनाएं और जुड़ीं।
हमारा हिसाब
20,23,000 करोड़ ÷ 421 = करीब 4,805 करोड़ रुपये प्रति परियोजना। (1,800 − 1,463) ÷ 1,463 = करीब 23% ज्यादा डेटा परतें।
भारत को क्या मिला
देश में बना नक्शा, जो पैसा लगने से पहले बड़ी परियोजना परखता है।
ब्लिट्ज की सराहना
बीसैग-एन की वह टीम जिसने यह प्लेटफॉर्म बनाया।
आंकड़े वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की 13 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति (पीआईबी रिलीज आईडी 2322825) से; pib.gov.in पर जांचे।
ब्लिट्ज की सलाह
नेटवर्क प्लानिंग ग्रुप हर परियोजना में अपनी जांच से हुए बदलाव सार्वजनिक करे, ताकि राज्य देख सकें कि नक्शे ने कितना बचाया।
मार्च 2027 तक हर बंदरगाह एक खिड़की पर
मुंबई, 14 अक्टूबर। देश के सभी छोटे-बड़े बंदरगाह मार्च 2027 तक मैरीटाइम सिंगल विंडो ‘सागर सेतु’ से जुड़ जाएंगे। यह फैसला मुंबई में समुद्री राज्य विकास परिषद की 21वीं बैठक में हुआ। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की 13 अक्टूबर 2026 की विज्ञप्ति में इसकी जानकारी है।
उसी तारीख तक सभी बंदरगाहों पर ‘वन नेशन वन पोर्ट प्रोसेस’ लागू होगा, यानी एक जैसे दस्तावेज और एक जैसी प्रक्रिया। बंदरगाह शुल्क अब ऑनलाइन छापना जरूरी होगा।

जहाज बनाने वालों को बीमा
बैठक में जहाज बनाने वाली कंपनियों के लिए दो नई बीमा पॉलिसी शुरू हुईं। ईसीजीसी की पॉलिसी निर्यात के ऑर्डर को कवर करेगी। न्यू इंडिया एश्योरेंस की पॉलिसी देश के भीतर के ऑर्डर को। अगर खरीदार भुगतान रोक दे, तो यह बीमा शिपयार्ड को बचाएगा।
सरकार प्रीमियम पर सब्सिडी देगी। दावा आने पर बीमा कंपनी को सीधी मदद भी देगी। मंत्री सोनोवाल ने कहा कि जहाज बनाना कई साल का काम है, और भुगतान की एक किस्त छूटने से पूरा शिपयार्ड रुक सकता है।
यह परिषद 1997 से है, पर 15 मई 2026 को अधिसूचित भारतीय पत्तन अधिनियम, 2025 के बाद यह इसकी पहली बैठक थी। अब इसे कानूनी दर्जा मिल गया है। राज्यों से तीन महीने में अपने नियम अधिसूचित करने को कहा गया है।
भारत को क्या मिला
निर्यातकों के लिए हर बंदरगाह पर कम और साफ खर्च, और देसी शिपयार्ड के लिए बड़े ऑर्डर लेने का भरोसा।
ब्लिट्ज की सलाह
पत्तन मंत्रालय हर तिमाही बताए कि कौन-कौन से बंदरगाह सागर सेतु से जुड़ चुके हैं, ताकि कारोबारी जान सकें कि एक खिड़की कहां शुरू हो गई।
दाल प्रोटीन पर साझा शोध
कुंडली (हरियाणा), 14 अक्टूबर। दाल में भरपूर प्रोटीन है, पर उसे निकालकर खाने की चीजों में डालना आसान नहीं। इसी काम के लिए कुंडली में अगले साल तक एक साझा उत्कृष्टता केंद्र बनाने की तैयारी है। इसे राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम-के) और कनाडा की सस्केचेवान यूनिवर्सिटी मिलकर बनाएंगे। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की विज्ञप्ति के मुताबिक संस्थान के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने यह लक्ष्य रखा।

सात महीने में क्या हुआ
दोनों संस्थानों के बीच समझौता करीब सात महीने पहले हुआ था। सस्केचेवान यूनिवर्सिटी ने ऐसे पीएचडी छात्र चुन लिए हैं जो अपने शोध का कुछ हिस्सा कुंडली में करेंगे। दोनों ने कनाडा सरकार के पास कुपोषण खत्म करने के लिए दालों में पोषक तत्व बढ़ाने की साझा परियोजना भी भेजी है। उसे पैसा मिला या नहीं, यह विज्ञप्ति में नहीं है।
बैठक में दिक्कतें भी साफ गिनाई गईं
कच्चे माल में एकरूपता, प्रोसेसिंग में लगने वाली ऊर्जा, और प्रोटीन के गुण बचाए रखना। कानपुर का भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, इक्रीसैट और आईआईटी दिल्ली भी चर्चा में शामिल रहे।
भारत को क्या मिला
दाल उगाने वाले किसान और प्रोसेसिंग कंपनियों के लिए सिर्फ दाल नहीं, प्रोटीन बेचने का रास्ता।
ब्लिट्ज की सलाह
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय दो साल की शोध योजना तय होते ही उसे सार्वजनिक करे, ताकि देसी कंपनियां शुरू से जुड़ सकें।













