ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।मौसम विभाग ने गुजरात में बेहद भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है, और इसी वजह से अहमदाबाद के स्कूल-कॉलेज आज बंद हैं। अनुमान है कि शहर में एक ही दिन में क़रीब आठ इंच पानी गिर सकता है। ज़िला प्रशासन गुरुवार शाम से ही अलग-अलग जगहों के लिए बंदी के आदेश जारी कर रहा है — यानी फ़ैसला राज्य स्तर से नहीं, बल्कि वहीं से लिया जा रहा है जहां बारिश का मीटर लगा है।
सिर्फ़ गुजरात नहीं। मौसम विभाग ने मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, तेलंगाना और विदर्भ में कहीं-कहीं बेहद भारी बारिश की चेतावनी दी है। हिमाचल प्रदेश में 1 अगस्त तक अच्छी बारिश का अनुमान है। पंजाब में गरज-चमक के साथ तेज़ बारिश, और हरियाणा व चंडीगढ़ में लगातार भारी दौर जारी रहने की संभावना है। दिल्ली में हल्की से मध्यम बारिश और गरज-चमक रहेगी, कुछ इलाक़ों में तेज़ बौछारें पड़ सकती हैं।
कम बारिश, पर एक जगह ढेर सारी: पूरे देश में जुलाई सामान्य से कम रहा, और उसी जुलाई में एक शहर पर एक दिन में महीने भर का बड़ा हिस्सा गिर सकता है।
एक महीना बारिश में कम रह सकता है और उसी महीने में एक शहर एक दोपहर में डूब सकता है। असली दिक़्क़त कुल बारिश की नहीं, उसके बंटवारे की है।
एक नज़र में
• रेड अलर्ट: गुजरात में बेहद भारी बारिश; अहमदाबाद में स्कूल-कॉलेज आज बंद
• शहर का अनुमान: एक दिन में क़रीब आठ इंच बारिश
• अन्य चेतावनी: मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, तेलंगाना, विदर्भ
• उत्तर भारत: हिमाचल प्रदेश में 1 अगस्त तक भारी बारिश; पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में लगातार दौर
• दिल्ली: हल्की से मध्यम बारिश, गरज-चमक; कहीं-कहीं तेज़ बौछारें
• जुलाई का अनुमान: देश भर में बारिश दीर्घावधि औसत के 94% से नीचे; सामान्य या उससे ज़्यादा बारिश मुख्यत: उत्तर-पश्चिम, पूर्वोत्तर, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीप के हिस्सों तक सीमित
• बंदी: ज़िला स्तर पर; कोई राष्ट्रव्यापी अवकाश घोषित नहीं
ऊपर से यह उल्टा लगता है — एक तरफ़ रेड अलर्ट, दूसरी तरफ़ पूरे देश का जुलाई औसत से नीचे। पर यही आज के मानसून की पहचान है। बारिश अब कम मौक़ों पर, ज़्यादा मात्रा में और लंबे सूखे अंतराल के बीच आ रही है। शहर के लिए इसका मतलब है कि नालियां और ड्रेनेज सिस्टम अपनी अधिकतम क्षमता की परीक्षा बार-बार देते हैं। किसान के लिए इसका मतलब है कि बुवाई की खिड़की और बारिश की खिड़की का मेल न बैठने का ख़तरा बढ़ जाता है — उस साल में भी जब मौसमी कुल आंकड़ा ठीक-ठाक दिखे।
अच्छी बात यह है कि दोनों तरफ़ के उपाय जाने-पहचाने हैं और भारत उन्हें बना भी रहा है। शहर में रेड अलर्ट की असली क़ीमत उसके बाद के बारह घंटों में तय होती है — जलभराव वाले चिह्नित बिंदुओं पर पहले से पंप तैनात हों, तूफ़ानी पानी की निकासी बारिश के दौरान नहीं बल्कि उससे पहले साफ़ हो, और बंदी का फ़ैसला इतनी जल्दी हो कि परिवार सबसे ख़राब समय में सड़क पर न हों। अहमदाबाद प्रशासन ने यही किया है। गांव की तरफ़ बचाव के औज़ार हैं खेत-तालाब, चेक डैम और जल संचय जन भागीदारी के तहत बने पुनर्भरण ढांचे, जो पंद्रह दिन का फ़ालतू पानी उन पंद्रह दिनों के लिए जमा कर लेते हैं जब पानी नहीं आता। इस मौसम में सबसे उपयोगी क़दम यह होगा कि ज़िला स्तर पर मिट्टी की नमी और बुवाई का डैशबोर्ड सार्वजनिक किया जाए, ताकि कृषि विभाग कम अवधि वाले बीज और सिंचाई की मदद ठीक उन्हीं ब्लॉकों तक पहुंचा सके जो पीछे रह गए हैं — पूरे राज्य को एक जैसा मानकर नहीं। मानसून को स्थिर करना हमारे हाथ में नहीं है। हर ज़िले को उसके उतार-चढ़ाव से कम चोट लगे, यह हमारे हाथ में है।













