ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।मीराबाई चानू ने लगातार तीसरा राष्ट्रमंडल खेलों का ख़िताब जीत लिया है, और वह भी उस अंदाज़ में जो किसी भारोत्तोलक के लिए सबसे दमदार होता है — स्नैच, क्लीन एंड जर्क और कुल भार, तीनों में खेलों का रिकॉर्ड तोड़कर। ओलंपिक पदक विजेता चानू ने महिलाओं के 48 किग्रा फ़ाइनल में कुल 190 किग्रा (85 किग्रा स्नैच और 105 किग्रा क्लीन एंड जर्क) उठाया और बाक़ी प्रतिस्पर्धियों से पूरे 22 किग्रा आगे रहीं। यह राष्ट्रमंडल खेलों में उनका चौथा पदक है — 2014 ग्लासगो में रजत के बाद 2018 गोल्ड कोस्ट और 2022 बर्मिंघम में स्वर्ण — और इन खेलों में भारत का पहला स्वर्ण।
मंच पर वे अकेली नहीं थीं। रविवार भारत के लिए इन खेलों का अब तक का सबसे अच्छा दिन रहा, जिसमें भारोत्तोलन की तीनों स्पर्धाओं में पदक आए। ऋषिकांत सिंह चनंबम ने पुरुषों के 60 किग्रा में 264 किग्रा के साथ रजत जीता और रास्ते में 121 किग्रा का स्नैच रिकॉर्ड भी बनाया; राजा मुथुपांडी ने पुरुषों के 65 किग्रा में 286 किग्रा उठाकर एक और रजत जोड़ा, क्लीन एंड जर्क में शानदार वापसी करते हुए। पैरा पावरलिफ़्टर झंडू कुमार के शुरुआती कांस्य के साथ भारत अब चार पदकों — एक स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य — के साथ तालिका में आठवें स्थान पर है।
तीन खेल, तीन ख़िताब: चानू का 190 किग्रा का कुल भार — 85 किग्रा स्नैच और 105 किग्रा क्लीन एंड जर्क — तीनों वर्गों में खेलों का रिकॉर्ड बना, और वे बाक़ी मैदान से 22 किग्रा आगे रहीं।
उनके पहले और इस राष्ट्रमंडल पदक के बीच बारह साल का फ़ासला है। इतनी लंबी पारी सिर्फ़ प्रतिभा से नहीं बनती — यह रोज़ मैदान में उतरने और एक ऐसी व्यवस्था का नतीजा है जिसने आख़िरकार साथ चलना सीखा।
एक नज़र में
• स्वर्ण: मीराबाई चानू, महिला 48 किग्रा — 190 किग्रा (85 स्नैच, 105 क्लीन एंड जर्क)
• रिकॉर्ड: तीनों वर्गों में खेलों का रिकॉर्ड; मैदान से 22 किग्रा आगे
• रजत: ऋषिकांत सिंह (60 किग्रा, 264 किग्रा); राजा मुथुपांडी (65 किग्रा, 286 किग्रा)
• तालिका: चार पदक — 1 स्वर्ण, 2 रजत, 1 कांस्य; भारत आठवें स्थान पर
सोमवार को अभियान और चौड़ा हो रहा है, क्योंकि स्कॉट्सटाउन में एथलेटिक्स की शुरुआत हो रही है। सर्वेश कुशारे, तेजस्विन शंकर और जे आदर्श राम ऊंची कूद के फ़ाइनल में हैं, और तेजस शिर्षे 110 मीटर बाधा दौड़ की हीट में उतरेंगे — क्वालिफ़ाई करने पर फ़ाइनल भी उसी दिन। भारोत्तोलन का मंच भी व्यस्त है, जहां ज्ञानेश्वरी यादव महिलाओं के 53 किग्रा और बिंद्यारानी देवी 58 किग्रा के फ़ाइनल में हैं, जबकि कलात्मक जिम्नास्टिक में प्रतिष्ठा सामंत महिला वॉल्ट फ़ाइनल में चुनौती पेश करेंगी।
सकारात्मक बात पदक तालिका के नीचे छिपी है। चानू का तीसरा ख़िताब और एक ही दिन तीन भारोत्तोलन वर्गों में पदक कोई इत्तेफ़ाक़ नहीं — यह उस दशक का नतीजा है जिसमें कोचिंग, खेल विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय मुक़ाबलों का अनुभव और खिलाड़ियों को मिलने वाली मदद, सब एक साथ बेहतर हुए। आगे का काम इस आधार को और चौड़ा करना है — छोटे शहरों में प्रशिक्षित कोच वाले अखाड़े, खेलों के बीच के उन सूने बरसों में लगातार सहारा, और ऐसे रास्ते जो अगली चानू को चौबीस की उम्र में नहीं, चौदह में पहचान लें। जो देश एक चैंपियन को बारह साल तक टिका सके, उसने कुछ सही किया है। जो एक साथ पांच तैयार कर ले, वह उससे बेहतर करेगा।











