ब्लिट्ज ब्यूरो
अमरावती। आंध्र प्रदेश के तिरुमला स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री वेंकटेश्वर (तिरुपति बालाजी) मंदिर में मंगलवार को दान देने वालों की ऐसी भीड़ उमड़ी कि महज 24 घंटे में मंदिर को 96.98 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड दान प्राप्त हुआ। पहली नजर में यह सामान्य धार्मिक आस्था का मामला लग सकता है, लेकिन इसके पीछे की वजह कुछ और ही निकली।
हुआ यूं कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) की नई डोनर पॉलिसी 15 जुलाई की आधी रात से लागू हो गई, जिसके बाद दानदाताओं को मिलने वाली कई आजीवन सुविधाओं में बड़ा बदलाव कर दिया गया है। यही वजह रही कि हजारों श्रद्धालुओं ने नई पॉलिसी लागू होने से पहले दान देकर पुराने नियमों के तहत मिलने वाले आजीवन लाभ सुरक्षित कर लिए।
2,460 दानदाताओं ने दिया दान
रिपोर्ट के अनुसार, मंगलवार को कुल 2,460 दानदाताओं ने मंदिर में योगदान दिया। इनमें 1,212 श्रद्धालुओं ने 1 लाख से 10 लाख रुपये के बीच दान दिया, जबकि 1,246 लोगों ने 10 लाख से 25 लाख रुपये तक का योगदान किया। इसके अलावा दो श्रद्धालुओं ने एक-एक करोड़ रुपये से अधिक का दान दिया। इतनी बड़ी संख्या में दानदाताओं के एक ही दिन में सामने आने से मंदिर प्रशासन को भी रिकॉर्ड आय दर्ज हुई।
साल 2025-26 में 1,738 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि हुई जमा
तिरुपति बालाजी मंदिर दुनिया के सबसे समृद्ध धार्मिक संस्थानों में गिना जाता है। इसकी अनुमानित कुल संपत्ति करीब 3.38 लाख करोड़ रुपये बताई जाती है, जो कई छोटे देशों की जीडीपी से भी अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में मंदिर की हुंडी (दान पात्र) में ही 1,738 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जमा हुई। इसका मतलब है कि मंदिर को औसतन प्रतिदिन लगभग 4.75 करोड़ रुपये का दान मिलता है।
टीटीडी के आंकड़ों के मुताबिक, मंदिर में अब तक 1,97,888 रजिस्टर्ड दानदाता हैं। इनमें करीब 1.5 लाख लोगों ने एक लाख रुपये या उससे अधिक का दान दिया है, जबकि लगभग 22,000 श्रद्धालु ऐसे हैं जिन्होंने 10 लाख रुपये से अधिक का योगदान किया है। पिछले कुछ वर्षों में बड़े दानदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है। यही कारण है कि मंदिर प्रशासन ने दानदाताओं को मिलने वाली सुविधाओं की समीक्षा करने का फैसला किया।
10 लाख रुपये या उससे अधिक दान देने वाले करीब 3000 नए दानदाता जुड़े
टीटीडी बोर्ड के अध्यक्ष बीआर नायडू ने कहा कि पिछले केवल चार महीनों में ही 10 लाख रुपये या उससे अधिक दान देने वाले करीब 3,000 नए दानदाता जुड़े हैं। इतनी तेजी से बढ़ती संख्या को देखते हुए दान व्यवस्था में पारदर्शिता और एकरूपता लाने के लिए नई डोनर पॉलिसी लागू करना आवश्यक हो गया था।
क्या है नई डोनर पॉलिसी में बदलाव?
नई डोनर पॉलिसी के तहत सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब दानदाताओं को मिलने वाली सुविधाएं आजीवन नहीं रहेंगी। पहले जो श्रद्धालु तय राशि का दान देते थे, उन्हें जीवनभर कई विशेष सुविधाएं मिलती थीं। इनमें विशेष प्रवेश दर्शन, सुपथम एंट्री, ब्रेक दर्शन, सुबह होने वाली सुप्रभात सेवा में शामिल होने का अवसर, भगवान वेंकटेश्वर के दैनिक कल्याणोत्सव में भागीदारी, आवास सुविधा और लड्डू, रेशमी वस्त्र, सोने-चांदी के सिक्के जैसे उपहार शामिल थे। अब नई व्यवस्था के अनुसार, व्यक्तिगत दानदाताओं को मिलने वाले विशेषाधिकार केवल 20 वर्षों तक मान्य होंगे, जबकि संस्थाओं और ट्रस्टों के लिए यह अवधि 15 वर्ष तय की गई है। यानी अब कोई भी नया दानदाता जीवनभर इन सुविधाओं का लाभ नहीं उठा सकेगा। टीटीडी ने दान की पुरानी श्रेणी व्यवस्था (रेंज आधारित स्लैब) भी समाप्त कर दी है। अब दानदाताओं को उनके योगदान के आधार पर चार अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। व्यक्तिगत दानदाताओं और संस्थागत दानदाताओं के लिए अलग-अलग प्रावधान बनाए गए हैं।
नई पॉलिसी में बदला बार-बार मिलने वाला लाभ
एक और बड़ा बदलाव यह है कि अब सभी दानदाताओं के दर्शन और सेवाओं का आवंटन पूरी तरह ऑनलाइन डोनर मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए किया जाएगा। इससे पहले कई मामलों में मैन्युअल प्रक्रिया अपनाई जाती थी और विशेष अनुरोधों के आधार पर भी सुविधाएं दी जाती थीं। नई व्यवस्था में पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
सेवाओं के आवंटन में भी बदलाव किया गया है। पहले 50 लाख रुपये या उससे अधिक दान देने वाले श्रद्धालुओं को हर वर्ष एक से तीन बार सुप्रभात सेवा में शामिल होने का अवसर मिलता था। अब यह सुविधा केवल एक बार ही उपलब्ध होगी। यानी बार-बार मिलने वाला वार्षिक लाभ समाप्त कर दिया गया है।
दानदाताओं के स्मृति चिह्नों में भी हुआ बदलाव
दानदाताओं को दिए जाने वाले स्मृति-चिह्न और उपहारों में भी बदलाव हुआ है। पहले एक करोड़ रुपये का दान देने वालों को पांच ग्राम का स्वर्ण सिक्क ा और 50 ग्राम का रजत सिक्क ा दिया जाता था। नई व्यवस्था में 50 लाख से 1.5 करोड़ रुपये तक दान देने वाले नए दानदाताओं को केवल दो ग्राम का स्वर्ण सिक्क ा और 10 ग्राम का रजत सिक्क ा दिया जाएगा। यानी उपहारों का स्वरूप भी पहले की तुलना में काफी सीमित कर दिया गया है।
हालांकि, नई डोनर पॉलिसी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव) से लागू नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि 15 जुलाई की आधी रात से पहले दान देने वाले सभी पुराने दानदाताओं को पहले से मिली आजीवन सुविधाएं पहले की तरह मिलती रहेंगी। यही कारण रहा कि नई व्यवस्था लागू होने से ठीक पहले बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने दान देकर पुराने नियमों के तहत मिलने वाले लाभ सुरक्षित कर लिए। इसी वजह से तिरुपति बालाजी मंदिर ने एक ही दिन में लगभग 97 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड दान प्राप्त कर नया इतिहास बना दिया।











