ब्लिट्ज ब्यूरो
पटना। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के अनुरूप झारखंड के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों में संचालित चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के सेमेस्टर-4 में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) का पाठ्यक्रम शामिल होने जा रहा है। इस संबंध में राज्यपाल सचिवालय ने सभी सरकारी विवि के कुलपतियों को निर्देश जारी कर एनएसएस का पाठ्यक्रम शीघ्र निर्धारित करने और इसके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने को कहा है।
जारी पत्र में कहा गया है कि यह कार्रवाई एनएसएस के क्षेत्रीय निदेशालय, पटना के पत्र के आलोक में की जा रही है। क्षेत्रीय निदेशालय ने एनईपी-2020 के तहत झारखंड के विश्वविद्यालयों में सेमेस्टर-4 के लिए राष्ट्रीय सेवा योजना पाठ्यक्रम तैयार करने और लागू करने के लिए आवश्यक पहल करने का अनुरोध किया था।
राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय सेवा योजना का पाठ्यक्रम निर्धारित कर उसके क्रियान्वयन को सुनिश्चित करें। इसके साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना समन्वयक की इस कार्य के लिए व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी।
युवा नेतृत्व और सामाजिक सरोकार पर रहेगा फोकस, आंतरिक मूल्यांकन होगा
एनएसएस पाठ्यक्रम को एनईपी और यूजीसी दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें दो क्रेडिट का कोर्स प्रस्तावित है, जिसमें ओएसएसएससी अंक एंड सेमेस्टर परीक्षा और 30 अंक सतत आंतरिक मूल्यांकन के लिए निर्धारित हैं। कोर्स में युवा नेतृत्व, डिजिटल साक्षरता, माय भारत पोर्टल, पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक सेवा, फील्ड गतिविधियां व सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे समकालीन विषयों को शामिल किया गया है, ताकि विद्यार्थियों में सेवा भावना, नेतृत्व क्षमता और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का विकास हो सके। इससे विद्यार्थियों को अकादमिक अध्ययन के साथ-साथ सामाजिक सेवा और सामुदायिक सहभागिता का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा।
क्षेत्रीय निदेशक से मिला पत्र
एनएसएस के क्षेत्रीय निदेशक विनय कुमार ने इस संबंध में बीते 3 जुलाई को राज्यपाल सचिवालय को भेजे पत्र में बताया कि एनईपी-2020 के अनुरूप झारखंड के विश्वविद्यालयों में चार वर्षीय सीबीसीएस स्नातक के सेमेस्टर-4 में एनएसएस लागू किया जाना है।
इसके लिए विस्तृत विचार-विमर्श कर पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का अनुरोध किया गया। इससे पहले 30 जून को भेजे गए एक अन्य पत्र में क्षेत्रीय निदेशालय ने बिहार राज्य का उदाहरण देते हुए बताया था कि वहां के विश्वविद्यालयों में राज्यपाल की स्वीकृति से एनएसएस का पाठ्यक्रम पहले ही अधिसूचित किया जा चुका है। निदेशालय ने झारखंड में भी इसी मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया था।













