ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की ओर बदलाव ने अब तक का सबसे अच्छा महीना दर्ज किया है। जून 2026 में सभी श्रेणियों को मिलाकर ईवी की खुदरा बिक्री रिकॉर्ड करीब 3.06 लाख इकाई रही — पिछले साल के इसी महीने से करीब 63% ज़्यादा — जब दोपहिया, तिपहिया और कारें, सब एक ही दिशा में बढ़ीं। यात्री-कार खंड में इलेक्ट्रिक बिक्री मई के 28,017 से बढ़कर करीब 31,388 इकाई पर पहुंच गई, यानी एक ऐसी मांग जो अब नयापन नहीं, आदत बनती जा रही है।
बाज़ार का ढांचा भी चौड़ा हो रहा है। टाटा मोटर्स 38% से ज़्यादा हिस्सेदारी के साथ साफ़ अग्रणी है, जिसकी ईवी बिक्री सालाना दोगुनी से ज़्यादा होकर करीब 12,023 इकाई हो गई, उसके बाद महिंद्रा एंड महिंद्रा और जेएसडब्ल्यू एमजी मोटर हैं। करीब 25 आम-बाज़ार मॉडल के साथ ख़रीदार के पास अब असली विकल्प है, ऐसे खंड में जो हर महीने करीब 30,000 इलेक्ट्रिक कारें बेच रहा है — और प्रतिस्पर्धा, हमेशा की तरह, बेहतर क़ीमत पर बेहतर कार तक पहुंचने का सबसे तेज़ रास्ता है।
नयापन से आदत तक: जून में ईवी की खुदरा बिक्री रिकॉर्ड ~3.06 लाख इकाई (सालाना ~63% वृद्धि); यात्री ईवी ~31,388 इकाई, और टाटा मोटर्स 38%+ हिस्सेदारी के साथ ~12,023 इकाई पर अव्वल।
ईवी बिक्री का रिकॉर्ड एक ऊर्जा-सुरक्षा का आंकड़ा भी है: हर बिजली से चला किलोमीटर वह है जो दुनिया के तेल-भाव पर नहीं ख़रीदा गया।
एक नज़र में
• जून 2026: सभी श्रेणियों में रिकॉर्ड ~3.06 लाख ईवी, सालाना ~63% वृद्धि
• यात्री ईवी: ~31,388 इकाई, मई के 28,017 से ज़्यादा
• अग्रणी: टाटा मोटर्स 38%+ हिस्सेदारी; ~12,023 इकाई, सालाना दोगुनी से ज़्यादा
• विकल्प: करीब 25 आम-बाज़ार ईवी मॉडल बिक्री पर
इसकी अहमियत शोरूम से आगे तक जाती है। घरेलू बिजली से चला हर किलोमीटर, आयातित ईंधन के बजाय, भारत के तेल-आयात बिल को हल्का करता है — उस हफ़्ते में तो और भी जब बाज़ार की सबसे बड़ी चिंता कच्चा तेल है — और उन शहरों की हवा साफ़ करता है जिन्हें इसकी सबसे ज़्यादा ज़रूरत है। एक रिकॉर्ड महीना पूरी आपूर्ति श्रृंखला के लिए भी संकेत है, बैटरी बनाने वालों से लेकर चार्जिंग नेटवर्क तक, कि जिस मांग की वे तैयारी कर रहे हैं वह समय पर आ रही है।
सकारात्मक रास्ता है यह पक्का करना कि आगे की राह भी इस महीने जितनी ही चिकनी रहे। इसका मतलब है राजमार्गों और घरों में तेज़, भरोसेमंद चार्जिंग बढ़ाना, घरेलू बैटरी और सेल निर्माण को गहरा करना ताकि हर वाहन का ज़्यादा मूल्य भारत में रहे, और प्रोत्साहन इतने स्थिर रखना कि ख़रीदार और निर्माता दोनों योजना बना सकें। मांग तो साफ़ आ चुकी है; अब काम है वह अवसंरचना और उद्योग खड़ा करना जो इसे और रफ़्तार पकड़ने दे।












