आज बुधवार, 15 जुलाई से भारत और ब्रिटेन के बीच बड़ा व्यापार समझौता (CETA) लागू हो गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब भारत का करीब 99% सामान ब्रिटेन के बाज़ार में बिना किसी टैक्स यानी ड्यूटी-फ्री पहुंचेगा। पिछले साल जिस समझौते पर मंत्रियों ने दस्तखत किए थे, वह आज तिरुपुर के कपड़ा कारोबारी, आंध्र प्रदेश के झींगा बेचने वाले और पुणे के पुर्ज़े बनाने वाले के हाथ का असली हथियार बन गया है।
बड़ी बात यह है कि यह मौका ऐसे वक्त आया है जब भारत का निर्यात रिकॉर्ड बना रहा है। वाणिज्य मंत्रालय के इसी हफ्ते आए आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून की तिमाही में सामान और सेवाओं को मिलाकर कुल निर्यात 232.73 अरब डॉलर रहा — यानी पिछले साल से 11.37% ज्यादा, और किसी भी साल की पहली तिमाही का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा। अकेले सामान का निर्यात इस तिमाही में 15.92% बढ़ा और जून में 40.41 अरब डॉलर रहा। हैरान करने वाली बात यह रही कि आसियान देशों को निर्यात 66.9% और अफ्रीका को 53.1% तक उछल गया।
समझौता तब तक सिर्फ कागज़ होता है, जब तक वह लागू न हो। आज वही दिन है — और फायदा अब उसी का, जो इसे तेज़ी से इस्तेमाल कर ले।
सरकार ने इस समझौते को पहले ही दिन से काम का बनाने के लिए एक आसानी और कर दी है। अब निर्यातक अपने सामान का सर्टिफिकेट — कि माल कहां का बना है — खुद दे सकेंगे और कागज़ी झंझट में फंसे बिना सस्ते टैक्स का फायदा ले सकेंगे। इसके साथ एक और अहम बात यह है कि ब्रिटेन में कुछ समय के लिए काम करने गए भारतीय पेशेवरों को अब दोनों देशों में सोशल सिक्योरिटी का पैसा नहीं कटवाना पड़ेगा, वह भी पूरे पांच साल तक। सरकार का कहना है कि इससे 75,000 से ज्यादा लोगों को सीधा फायदा होगा।
ब्रिटेन तो बस शुरुआत है। अमेरिका के साथ भी समझौता 24 जुलाई की तारीख से पहले “बहुत करीब” बताया जा रहा है, और यूरोपियन यूनियन के साथ बातचीत भी दस्तखत के करीब पहुंच चुकी है। हां, जून में महंगे कच्चे तेल की वजह से आयात बढ़ा और व्यापार घाटा भी चौड़ा हुआ — यह याद दिलाता है कि सिर्फ बाज़ार मिल जाना काफी नहीं, घर में सामान सस्ता और अच्छा बनाना भी उतना ही ज़रूरी है। अगर यह इंतज़ाम ठीक बैठ गया, तो आज की यह कामयाबी अगले साल की ऑर्डर बुक बन जाएगी।













