ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। अगर आप 2027 में ऑस्ट्रेलिया में पढ़ने की योजना बना रहे हैं, तो फिर आपको ये मालूम होना चाहिए कि यहां पर एक निश्चित संख्या में ही स्टूडेंट्स को एंट्री दी जाएगी। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने 2027 के लिए विदेशी छात्रों के एडमिशन के कोटे का एलान कर दिया है। सरकार का कहना है कि वह 2027 में सिर्फ 2.95 लाख विदेशी छात्रों को ही यहां की यूनिवर्सिटीज में एडमिशन लेने का मौका देगी।
सरकार ने विदेशी छात्रों को लेकर अपनी राष्ट्रीय योजना का एलान करते हुए इस संख्या की जानकारी दी। इसके साथ-साथ स्टूडेंट और टेंपरेरी ग्रेजुएट वीजा की फीस में 25% की बढ़ोतरी भी कर दी। सरकार ने कहा कि कैप (सीमा) को 2026 के स्तर पर ही बनाए रखने से इंटरनेशनल एजुकेशन सेक्टर में स्थिरता आएगी। प्लानिंग का स्तर कोविड के बाद की सबसे ज्यादा संख्या से 8% नीचे बना हुआ है और मौजूदा ट्रेंड्स बताते हैं कि 2027 में भी कम छात्र यहां पढ़ने आएंगे।
भारतीयों पर क्या असर होगा
ऑस्ट्रेलिया भारतीय छात्रों के बीच हायर एजुकेशन के लिए एक पॉपुलर डेस्टिनेशन है, जहां पर बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स डिग्री ले रहे हैं। इसी तरह से अगले साल भी हजारों भारतीय छात्र यहां पढ़ाई के लिए जाने की योजना बना रहे थे। अब विदेशी छात्रों की संख्या पर लिमिट लगने से उन पर निम्नलिखित प्रभाव होंगे:
सीमिट सीटें: 2027 में 2.95 लाख स्टूडेंट्स को एडमिशन मिलने का मतलब है कि दाखिले के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ जाएगा। इससे एडमिशन मिलने की संभावना भी घटेगी।
क्षेत्रीय यूनिवर्सिटीज को प्राथमिकता: जो छात्र सिडनी या मेलबर्न जैसे बड़े शहरों के बजाय रीजनल (क्षेत्रीय) यूनिवर्सिटी को चुनेंगे, उन्हें एडमिशन मिलने की संभावना अधिक होगी।
योजना बनाना जरूरी: एडमिशन के लिए सीटें सीमित हैं, इसलिए भारतीय छात्रों को अपना आवेदन बहुत पहले और पूरी तैयारी के साथ जमा करना होगा ताकि अंतिम समय की अनिश्चितता से बचा जा सके।
क्वालिटी पर जोर: सरकार का ‘सस्टेनेबिलिटी’ पर ध्यान यह दर्शाता है कि भविष्य में केवल उन छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जो वास्तव में पढ़ाई के लिए गंभीर हैं, न कि केवल काम करने के लिए।
अच्छे नंबर होने जरूरी: सीटों की सीमित संख्या की वजह से ऑस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटीज उन्हीं छात्रों को एडमिशन देने में प्राथमिकता देंगी, जिनके नंबर अच्छे होंगे।
वीजा फीस भी बढ़ाई गई
ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने विदेशी छात्रों की सीमित संख्या करने के साथ-साथ वीजा फीस भी बढ़ा दी है। स्टूडेंट वीजा और पढ़ाई खत्म कर जॉब के बाद मिलने वाले टेंपरेरी ग्रेजुएट वीजा के लिए फीस में 25% की बढ़ोतरी की गई है। अब स्टूडेंट वीजा (सबक्लास 500) की एप्लिकेशन फीस 2,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 1.32 लाख रुपये) से बढ़कर 2,500 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 1.65 लाख रुपये) हो गई है।
इसी तरह से टेम्परेरी ग्रेजुएट वीजा (सबक्लास 485), जो पढ़ाई के बाद यहां काम करने के लिए मिलता है, की फीस 4,600 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 3 लाख रुपये) से बढ़कर अब 5,750 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 3.79 लाख रुपये) हो गई है। बढ़ी हुई फीस का बोझ भी भारतीयों के कंधे पर ही आएगा। कुल मिलाकर अब ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करना मुश्किल होने वाला है।














