ब्लिट्ज ब्यूरो
भारत के खिलाफ पाकिस्तान, चीन और बांग्लादेश की बढ़ती नजदीकियों पर सुरक्षा विशेषज्ञों ने देश को अत्यधिक सतर्क रहने की सलाह दी है। रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दक्षिण एशिया में बदल रहे इस नए समीकरण से भारत के लिए ‘थ्री-फ्रंट’ (तीन मोर्चों) जैसी चुनौती खड़ी हो सकती है। हाल के दिनों में बांग्लादेश में आए राजनीतिक बदलावों के बाद जिस तरह से ढाका का झुकाव इस्लामाबाद और बीजिंग की तरफ तेजी से बढ़ा है, वह नई दिल्ली के लिए एक बड़ा चिंता का विषय है।
बांग्लादेश की जनता तक यह संदेश पहुंचाना होगा कि भारत ही सच्चा दोस्त
इस पूरे मामले पर देश को कितना और क्यों सतर्क रहना चाहिए, ब्लिट्ज इंडिया की नजर में इसकी पूरी रपट इस प्रकार है:
भारत के लिए चिंता के मुख्य कारण
चिकन नेक (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) पर खतरा: भारत का उत्तर-पूर्वी हिस्सा एक पतले रास्ते से पूरे देश से जुड़ता है जिसे ‘चिकन नेक’ कहते हैं। बांग्लादेश और चीन की नजदीकियों से इस संकरे रास्ते की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है।
समुद्री सीमा पर घेराबंदी : चीन पहले से ही श्रीलंका और पाकिस्तान के बंदरगाहों का इस्तेमाल करके भारत को समुद्र में घेरने की कोशिश कर रहा है। अब बांग्लादेश के साथ मिलकर वह बंगाल की खाड़ी में भारत की मुश्किलें बढ़ा सकता है।
इंटेलिजेंस और जासूसी का खतरा: पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (आईएसआई) बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ जासूसी और अशांति फैलाने के लिए कर सकती है जो पहले भी एक बड़ी समस्या रही है।
भारत को क्या कदम उठाने चाहिए?
1. सीमा पर चौकसी बढ़ाना
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को भारत-बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए तकनीक और जवानों की संख्या बढ़ानी होगी।
2. उत्तर-पूर्व राज्यों पर ध्यान
असम, मेघालय और त्रिपुरा जैसे राज्यों में आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत करना होगा ताकि बाहरी ताकतें वहां माहौल न बिगाड़ सकें।
3. सख्त कूटनीति
भारत को अपनी ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (पड़ोसी पहले) नीति को नए सिरे से लागू करना होगा और बांग्लादेश की जनता तक यह संदेश पहुंचाना होगा कि भारत ही उनका सच्चा दोस्त है। यह स्थिति भारत के लिए एक कठिन परीक्षा जैसी है। देश की सुरक्षा एजेंसियों को अब चौबीसों घंटे अलर्ट पर रहना होगा क्योंकि एक भी मोर्चे पर ढिलाई भारी पड़ सकती है।











