ब्लिट्ज ब्यूरो
भारतीय विदेश मंत्रालय इस पूरे मामले पर बेहद सतर्क है और उसने साफ किया है कि भारत अपने पड़ोस में होने वाली हर हलचल पर पैनी नजर रख रहा है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में मीडिया ब्रीफिंग में कहा है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए समय आने पर हर जरूरी और उचित कदम उठाएगा।
विदेश मंत्रालय ने इस संवेदनशील मुद्दे पर कूटनीतिक और सधे हुए अंदाज में अपना रुख साफ किया है जिसके मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
विदेश मंत्रालय के रुख के 4 बड़े बिंदु
करीबी निगरानी: भारत ने साफ कर दिया है कि बांग्लादेश और चीन के बीच बढ़ती रणनीतिक बातचीत, जैसे कि चीनी फाइटर जेट्स (जे-10सीई) खरीदने की चर्चा और नए आर्थिक कॉरिडोर की योजनाओं पर भारत की पूरी नजर है।
तीस्ता नदी परियोजना पर कड़ा रुख: बांग्लादेश द्वारा तीस्ता नदी प्रबंधन परियोजना में चीन को शामिल करने की कोशिशों पर भारत ने अपनी आपत्ति और रुख पहले ही औपचारिक रूप से ढाका को सौंप दिया है। भारत का कहना है कि बांग्लादेश के साथ उसका विकास सहयोग एक तय रोडमैप के तहत चलता है और वह भविष्य के फैसलों में इन नए घटनाक्रमों को ध्यान में रखेगा।
चीन-पाकिस्तान गठजोड़ का विरोध: भारत ने वैश्विक मंचों पर चीन द्वारा पाकिस्तान को मिलने वाली सैन्य और तकनीकी मदद का हमेशा खुलकर विरोध किया है। विदेश मंत्रालय का मानना है कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों का साथ देना किसी भी जिम्मेदार देश की छवि के लिए ठीक नहीं है।
रचनात्मक जुड़ाव (कांस्ट्रक्टिव एंगेजमेंट): इन चुनौतियों के बावजूद, भारत ने बांग्लादेश की नई सरकार (प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली) के साथ बातचीत के रास्ते बंद नहीं किए हैं। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में बांग्लादेशी समकक्षों के साथ मुलाकात कर स्पष्ट किया था कि भारत अपने पड़ोसी के साथ सकारात्मक और मजबूत रिश्ते बनाए रखने का इच्छुक है, बशर्ते भारत की सुरक्षा चिंताओं का सम्मान किया जाए।
क्या कहता है भारत का कूटनीतिक संदेश?
भारत की नीति स्पष्ट है—वह पड़ोसियों के साथ व्यापार और विकास के रिश्तों को बढ़ावा देना चाहता है, लेकिन अगर चीन और पाकिस्तान जैसी ताकतें बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल भारत के खिलाफ ‘थ्री-फ्रंट’ चुनौती खड़ी करने के लिए करती हैं तो भारत मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगा। भारत अपनी सीमाओं और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
बातचीत के लिए तैयार: भारत ने पहले भी बांग्लादेश में अपनी एक टेक्निकल टीम भेजने और तीस्ता प्रोजेक्ट के समाधान के लिए ढाका से सीधी बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है, ताकि चीन को इस संवेदनशील क्षेत्र से दूर रखा जा सके।
तीस्ता नदी का पानी बांग्लादेश की खेती और अर्थव्यवस्था की जान है, लेकिन इसका भूगोल भारत की सुरक्षा की रीढ़ (सिलीगुड़ी कॉरिडोर) से जुड़ा है। इसलिए भारत के लिए यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि पानी के इस मामले का फायदा उठाकर चीन या पाकिस्तान भारत की पूर्वी सीमा पर सुरक्षा में सेंध न लगा पाएं।











