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लिवर से करें लव, बदलें आदत, पाएं सेहत

by ब्लिट्ज़ इंडिया
May 7, 2026
in the blitz
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डा. सीमा द्विवेदी

यह लिवर ही है जो शरीर में होने वाली 700 से ज्यादा एक्टिविटीज में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर शामिल रहता है। खून बनाने से लेकर, खून की सफाई तक में लिवर का अहम किरदार होता है। चाहे विटामिंस को एक्टिव करना हो या फिर मिनरल्स को जज्ब करना, मजबूत लिवर ही इन सभी के पीछे हैं। जब किसी का लिवर कमजोर होता है तो उसकी इम्यूनिटी सबसे पहले कमजोर होती है। इसलिए अगर हमें बचपन से जवानी और जवानी से बुढ़ापे तक सेहतमंद रहना है तो अपने लिवर का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। इसके लिए किसी खास एक्टिविटी या महंगी डाइट की जरूरत नहीं होती। सामान्य काम करना है लेकिन सही तरीके से।

दिल अगर शरीर में जीवन होने की निशानी है तो सेहतमंद लिवर उस जीवन को खुशहाल बनाने की पहचान है। इसलिए हमारी आदतें ऐसी हों कि जिगर वाह-वाह करे। कैसे हम लिवर को सेहतमंद बनाए रखें? दमदार जिगर के लिए हमारी आदतें कैसी होनी चाहिए, एक्सपर्ट्स से बातकर हम दे रहे हैं जानकारी।

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जिगर क्यों है शरीर का जिगरी यार?

लिवर शरीर का इकलौता ऐसा हिस्सा है जो सैकड़ों काम करता है। जब कोई अंग इतना ज्यादा उपयोगी होगा तो वह स्वाभाविक तौर पर शरीर का जिगरी यार हो ही जाएगा। बड़ी बात यह कि ऐसे सभी काम लिवर दिन में एक बार नहीं कई-कई बार करता है। इसके कामों में खून बनाना, इम्यूनिटी मजबूत करना और पाचन आदि है।

अब यह हम पर है कि हम ताजे फल और सब्जियां खाकर उसके काम में मदद करते हैं या फिर शराब, पैक्ट फूड आदि शरीर में पहुंचाकर रुकावट पैदा करते हैं। यह शरीर के उत्सर्जन अंगों (हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने वाला) के रूप में भी काम करता है। लिवर शरीर से हानिकारक और जहरीले पदार्थों को पित्त के रूप में छानकर शरीर से अलग करता है। स्टूल का भूरा रंग भी पित्त की वजह से होता है।

किडनी या फेफड़ों से अलग लिवर खुद को छोटे-से बड़ा बना सकता है। इसे रोजेनरेशन पावर भी कहते हैं। इसे मूल स्वरूप में लौटने के लिए अमूमन 2 से 3 हफ्तों की ही जरूरत होती है।

यह शरीर में ग्लुकोज को नियंत्रित करने में भी अहम भूमिका निभाता है। अगर किसी का फैटी लिवर है तो वह अमूमन टाइप-2 डायबीटीज का मरीज भी हो सकता है। जब हम कुछ खाते हैं तो यह लाइकोजन को ग्लूकोज में बदल देता है। जब लिवर में ग्लूकोस ज्यादा मात्रा में जमा होने लगता है तो यह फैट में बदल जाता है। इसके बाद ही फैटी लिवर का मामला बनता है। फैटी लिवर की स्थिति से बनने के लिए जरूरी है कि हम तेल, फैट आदि कम खाएं और हर दिन एकसारसाइज करें।

प्रोटीन हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी है। प्रोटीन हमारे शरीर का बिल्डिंग ब्लॉक्स (जिससे शरीर मूल रूप से बना है) कहलाता है। कई बार हमारा शरीर इतना प्रोटीन पैदा नहीं कर पाता कि उसकी जरूरत पूरी हो। ऐसे में लिवर ही वह प्रोटीन बनाता है। लिवर विटामिनों का भंडारण भी करता है।

– जिगर की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि हम एक्सरसाइज भी करें, डाइट सही करें और उसे आराम भी दें। चाहे वह सही खानपान से हो या फिर हर रात 7-8 घंटे की नीद से। देर रात मंचिंग करने से और कुछ भी उल्टा-सीधा खाने से लिवर को सीधा नुकसान होता है। सच तो यह है कि फैटी लिवर से ही शुगर के खतरे की नींव भी पड़ जाती है।

विटामिन ए, डी, बी, के फैट में घुलने और पचने वाले विटामिन हैं। लिवर में 5 फीसदी से कम फैट रहना भी जरूरी है ताकि इन विटामिनों को शरीर सही तरीके से एडजस्ट कर सके। इसके लिए जरूरी है कि हम हर दिन एक चम्मच शुद्ध देसी घी का सेवन करें। लिवर आयरन और कीपर को भी स्टोर करता है और इसे जज्ब करने में मदद करता है। एक और खास बात यह कि विटामिन को एक्टिव फॉर्म में लाने के लिए भी जरूरत होती है।

हेल्दी लिवर के लिए 6 रस जरूरी

आयुर्वेद में आहार-विहार को उत्तम स्वास्थ्य का आधार माना गया है। सुबह उठते ही गर्मी में ताजा पानी और सर्दी के मौसम में गुनगुना पानी लें। इससे लिवर के साथ-साथ किडनी के डिटॉक्सिफिकेशन में भी सहायता मिलती है।

आयुर्वेद में 6 रस बताए गए है – मधुर

(मीठा), अम्ल (खट्टा), लवण (नमकीन), कटु (तीखा), तिक्त (कड़वा) और कषाय (कसैला)। आमतौर पर हम भोजन में पहले तीन रसों का ज्यादा प्रयोग करते है जिससे लिवर पर अतिरिक्त भार पड़ता है। इससे लिवर से निकलने वाले एंजाइम्स में गड़बड़ी हो जाती है। इसलिए खाने में नियमित तौर पर बाद के तीन रसों का प्रयोग भी जरूर करने चाहिए ताकि लिवर से निकलने वाले एंजाइम्स आदि में कोई रुकावट न आए। जब हम इन तीनों रसों की पाचन में भूमिका देखते है तो समझ में आता है कि ये सभी अहम हैं।

कटु रस पाचन में मददगार है और भूख बढ़ाने में भी, मसलनः मिर्च, अदरक, लहसुन, प्याज, लौंग, हींग, सरसों के पत्ते व मूली कटु रस वाले होते है। वहीं, तिक्त रस खून और शरीर को शुद्ध करता है। करेला, मेथी, नीम, हल्दी, पत्तेदार सब्जियां तिक्त रस के उदाहरण है। कषाय रस डिटॉक्सिफिकेशन में मददगार है। इसमें मूंग, चना, बींस, मसूर दाल, कच्चा केला, जामुन, पत्ता गोभी, तुलसी, सहजन की फली आदि शामिल है।

नया चावल और गेहूं शरीर में दोषों को बढ़ाते है, जिससे लिवर पर विषाक्त प्रभाव पड़ता है, इसलिए गेहूं, चावल आदि हमेशा पुराना ही प्रयोग करें।
अपने पेट को 4 बराबर भाग मानते हुए 2 भाग ठोस भोजन करें, एक भाग तरल पदार्थ और एक भाग गैसों के संचरण के लिए खाली छोड़ दें, ताकि पाचन आसानी से हो जाए।

हमेशा घर का बना हुआ ताजा व सादा भोजन करें। फास्ट फूड और जंक फूड का प्रयोग बंद कर दें। यदि किसी कारण से इनका प्रयोग करना भी पड़ जाए तो कोल्ड ड्रिंक्स के साथ न लें क्योंकि इनसे फैट के पाचन में दिक्कत आती है और लिवर के रोग पैदा होते हैं। तले हुए और भारी भोजन के बाद भी कोल्ड ड्रिंक न लें।

भोजन के 20 से 30 मिनट के बाद गर्म पानी, गर्म दूध, चाय या कॉफी ले सकते है, जिससे फैट आराम से पच जाए। फलों के जूस लेने के बजाय फल खाएं, डिब्बाबंद जूस तो बिलकुल भी न लें क्योंकि उनमें बहुत ज्यादा शुगर होती है, जिससे लिवर पर बोझ बढ़ जाता है। दही के बजाय छाछ लें, गर्मी में सत्तू और नीबू पानी का प्रयोग करें।
ये बातें बनाएंगी लिवर को दमदार

लिवर की फेवरिट चीजें खाएं

हम फाइबरयुक्त चीजें (मौसमी फल, सलाद आदि) कम खाते हैं। जितनी कम खाएंगे, उतना ही फायदा होगा। इनके अलावा हर दिन हेल्दी प्रोटीन का सेवन करें। मसलनः पनीर, स्प्राउट्स आदि। वहीं नॉनवेज में अंडा, मछली या चिकन लिया जा सकता है। सही मात्रा में प्रोटीन लेने से फैटी लिवर का खतरा कम होता है।

डिटॉक्सिफिकेशन को अहमियत

हानिकारक चीजों को बाहर निकालने का बड़ा ही आसान तरीका है डिटॉक्सिफिकेशन। हम इसे भूल जाते हैं। इसके लिए सुबह खाली पेट एक गिलास सामान्य पानी या एक गिलास गुनगुने पानी में भिगो एक नीबू निचोड़कर पी लें। ज्यादा फायदा चाहिए तो रात में किसी साफ शीशे के जार में 2 लीटर पीने वाले पानी में 2 नीबूओं को छिलके समेत काटकर डाल दें। खीरा भी डाल सकते हैं। सुबह छान लें, फिर इसे दिनभर पीते रहें।

न लगाएं गलत चीजों की आदत

लिवर के लिए शराब खतरनाक है। जब हम लगातार शराब का सेवन करते हैं तो इसे भी लिवर को पचाना पड़ता है। अल्कोहल से बनने वाले फैट को भी लिवर स्टोर करता है। यह खराब फैट है या कह सकते हैं कि जहर है। इससे लिवर में सूजन आ जाती है। साथ ही फैटी लिवर की परेशानी भी बहुत बढ़ जाती है। इसके बाद जिस तरह की परेशानी बढ़ती है, वह हेपेटाइटिस से काफी मिलती है, इसलिए इसे अल्कोहलिक हेपेटाइटिस कहते हैं। शराब, पैक्ड फूड, स्टोर करके रखे जाने वाले नॉनवेज आइटम्स आदि से दूरी रखनी चाहिए। इन्हें स्टोर करने के लिए जिन रसायनों (फॉर्मलिनः मरने के बाद इंसानी शरीर को लंबे समय तक सही रखने के लिए इस्तेमाल होता है।) का यूज होता है, ये हानिकारक होते हैं। वैसे तो शुगर की समस्या पैन्क्रीयाज से जुड़ी हुई है, क्योंकि यही इन्सुलिन बनाता है लेकिन शुगर कुछ अंगों को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है, उनमें से लिवर भी एक है। अगर आप किसी को शुगर है तो उसे लिवर का भी जरूर ख्याल रखना चाहिए। हर महीने पर लैंस का टेस्ट जरूर कराना चाहिए, साथ ही किसी डॉक्टर के संपर्क में भी जरूर रहना चाहिए। वहीं बीपी को काबू में रखना भी जरूरी है। बीपी की दवाएं सही वक्त पर लेते रहें। सच तो यह है कि अगर शुगर और बीपी को काबू में न रखा जाए तो फैटी लिवर की परेशानी हो जाती है।

पेनकिलर दवाओं का न करें गैरजरूरी उपयोग

जब दवा ही दर्द देने लगे तो क्या करें? हम कहते है ऐसी दवा से दूरी बना लें या फिर जितनी कम हो उतनी ही लें। पेनकिलर्स ऐसी ही दवाएं हैं जो फौरी तौर पर भले ही हमें दर्द से राहत दें, लेकिन ये हमारे लिवर के लिए बहुत ही खतरनाक है। ये लिवर में बहुत ज्यादा मात्रा में जहरीला पदार्थ पैदा करती है। इससे लिवर को बहुत नुकसान होता है। यह ठीक उसी तरह लिवर के लिए नुकसानदायक हैं जिस तरह कोई लगातार शराब का सेवन करता है। कई बार ये दवाएं शराब से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है।

वजन रखें काबू में

वैसे तो मोटापा कई बीमारियों के लिए बहुत खतरनाक है, लेकिन लिवर के मामले में यह ज्यादा ही खतरा पैदा कर देता है।

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