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50 दिन का तेल भंडार

by ब्लिट्ज़ इंडिया
March 10, 2026
in the blitz
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ब्लिट्ज ब्यूरो

ईरान संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में भारत सरकार के शीर्ष सूत्र यह आश्वस्त कर रहे हैं कि देश के पास पेट्रोल, डीजल और अन्य ईंन्धनों की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए छह से आठ सप्ताह का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ाने का कोई विचार नहीं है। मंत्रालय ने निगरानी के लिए 24×7 कंट्रोल रूम बनाया है। रूस से पुराने अनुबंधों के तहत प्रतिदिन करीब 10 लाख बैरल तेल की सप्लाई जारी है।

कई जहाज अरब सागर व हिंद महासागर में मौजूद हैं। भारत करीब चालीस देशों से कच्चा तेल और दूसरे पेट्रोलियम पदार्थ खरीदता है। सरकार का कहना है कि भारत का सिर्फ 40 फीसदी कच्चा तेल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है। बाकी साठ प्रतिशत पेट्रोलियम पदार्थ दूसरे रास्तों से आते हैं।

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भारत के कच्चे तेल और एलपीजी आयात का लगभग आधा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही में रुकावट आई है। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकार निरंतर स्थिति की निगरानी कर रही है और इस संकट से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। देश के पास वर्तमान में लगभग 25 दिन की खपत के बराबर कच्चे तेल और इतनी ही अवधि के लिए तैयार ईंधन का भंडार उपलब्ध है। हालांकि, तत्काल कमी की संभावना नहीं है पर कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल और परिवहन लागत में वृद्धि से भारत के आयात बिल और मुद्रास्फीति पर प्रभाव पड़ सकता है। ऊर्जा बाजार विश्लेषण फर्म केप्लर के मुताबिक भारत के पास करीब 10 करोड़ बैरल वाणिज्यिक कच्चे तेल का स्टाक है। मंत्रालय ने एक अलग बयान में कहा कि पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने वर्तमान परिस्थितियों में देश की तैयारियों पर मीडिया को जानकारी दी है। इसमें बताया गया कि देश के पास कच्चे तेल और पेट्रोल, डीजल एवं विमान ईंधन (एटीएफ) जैसे प्रमुख उत्पादों का पर्याप्त भंडार है। मंत्रालय ने देश भर में आपूर्ति की स्थिति पर नजर रखने के लिए चौबीसों घंटे कार्य करने वाला नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया है।

भारत प्रतिदिन औसतन करीब 50 लाख बैरल कच्चा तेल आयात करता है जिसमें से लगभग 25 लाख बैरल तेल प्रतिदिन होर्मुज मार्ग से आता है। विश्लेषकों का कहना है कि भारत पश्चिम अफ्रीका, लातिनी अमेरिका, अमेरिका और रूस से अतिरिक्त आपूर्ति लेकर इस कमी की भरपाई कर सकता है। जरूरत पड़ने पर रूसी से भी तेल ले सकते हैं। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक, चौथा सबसे बड़ा शोधक और पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाकर आपूर्ति सुरक्षित की है। अब भारतीय कंपनियों के पास ऐसे ऊर्जा स्रोतों तक पहुंच है जो होर्मुज जलडमरूमध्य के मार्ग से नहीं आते।

क्या है होर्मुज स्ट्रेट
होर्मुज स्ट्रेट मध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़नेवाला संकरा समुद्री रास्ता है। दुनिया के ऊर्जा व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है, इसलिए यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की धड़कन माना जाता है। इससे वैश्विक तेल और गैस का लगभग 20 प्रतिशत प्रवाह होता है। इसे बंद करने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर होगा, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बाधित होगा व तेल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी।

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