• Latest
  • Trending

कला और संस्कृति की शिल्पकार कृतिका शाह

February 7, 2026
हरित भारत मिशन CAG रिपोर्ट 2026

हरित भारत मिशन का दस साल का हिसाब

August 31, 2026
पराली से बायो-बाइंडर तकनीक

पराली जो अब सड़क बनेगी

August 31, 2026
भारत-उज़्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

भारत-उज़्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

August 31, 2026
daily-news

भारत-उज़्बेकिस्तान सहयोग: शिक्षा, दवा, कृषि, योग और खेल में नई साझेदारी

August 31, 2026
प्रोजेक्ट इम्पोर्ट्स योजना CAG ऑडिट 2026

जिस फ़ाइल की कोई आख़िरी तारीख़ नहीं

August 31, 2026
भारत सरकारी योजनाएं और प्रमुख घटनाक्रम अगस्त 2026

भारत का अपना पॉपकॉर्न बीज

August 31, 2026
daily-news

भारत सरकारी योजनाएं और प्रमुख घटनाक्रम अगस्त 2026

August 31, 2026
भारतीय मानक समय नियम 2026

अब पूरे देश की घड़ी एक होगी

August 31, 2026
भारत-जापान स्टार्टअप और डीप टेक 2026

अब भारत सस्ता नहीं, हुनर बेच रहा है

August 30, 2026
भारत की आर्थिक और कारोबारी गतिविधियाँ अगस्त 2026

सप्ताह की समीक्षा

August 30, 2026
ई-श्रम पोर्टल के 5 साल: 31.89 करोड़ पंजीकरण, 54.28% महिलाएँ

हर दिन पौने दो लाख नाम

August 30, 2026
CAG Railway Audit Report 2026: ₹1,130.92 Crore की 26 टिप्पणियाँ

छब्बीस टिप्पणियाँ, ग्यारह सौ करोड़

August 30, 2026
Tuesday, September 1, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

कला और संस्कृति की शिल्पकार कृतिका शाह

लोक संस्कृति को बनाया सामाजिक आंदोलन

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 7, 2026
in the blitz
0
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। आर्किटेक्ट कृतिका शाह आज भारत की उन चुनिंदा सांस्कृतिक हस्तियों में गिनी जाती हैं, जिन्होंने कला और संस्कृति को सिर्फ मंच तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे एक सशक्त सामाजिक आंदोलन बना दिया। वे पेशे से एक सफल आर्किटेक्ट हैं और दिल से भारतीय संस्कृति की सच्ची संरक्षक। कृतिका शाह ने अपनी संस्था ताल ग्रुप सूरत के माध्यम से भारत की लोक और पारंपरिक नृत्य परंपराओं को बचाने, आगे बढ़ाने और दुनिया तक पहुंचाने का असाधारण कार्य किया है। उन्होंने यह साबित किया कि लोक संस्कृति केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भारत की पहचान और विरासत है।
प्रोफेशनल सफलता और सांस्कृतिक समर्पण का अनोखा संगम
कृतिका शाह एक प्रतिष्ठित आर्किटेक्ट और इंटीरियर डिज़ाइनर हैं लेकिन उनकी पहचान केवल डिजाइन की दुनिया तक सीमित नहीं रही। वे संस्कृति और सामाजिक कार्यों में भी उतनी ही सक्रिय हैं। उनकी प्रतिष्ठा का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्हें भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अंतर्गत डाक विभाग की फिलाटेलिक एडवाइजरी कमेटी का सदस्य बनाया गया। इस समिति में वे देश की महत्वपूर्ण और स्मारक डाक टिकटों (पोस्टेज स्टैम्प) से जुड़े विषयों पर सलाह देती हैं। यह पद उन्हें उनकी विश्वसनीयता और राष्ट्रीय स्तर की पहचान के कारण मिला।
नृत्य और कला यात्रा: बचपन से संस्कार, अनुशासन और साधना
कृतिका शाह ने मात्र चार वर्ष की उम्र में भरतनाट्यम सीखना शुरू किया। बाद में उन्होंने शास्त्रीय नृत्य में औपचारिक शिक्षा प्राप्त की और बृहद गुजरात संगीत समिति, अहमदाबाद से विशारद(बीए) और अलंकार(एमए) जैसी योग्यताएं प्राप्त कीं।
उनका अरंगेत्रम भी सफलतापूर्वक हुआ और इसके बाद उन्होंने कई प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुतियां दीं। वे केवल कलाकार नहीं, बल्कि एक अनुशासित और गहराई से जुड़ी हुई सांस्कृतिक साधिका हैं।


महिला संचालित है ताल ग्रुप
साल 2005 में कृतिका शाह ने ताल ग्रुप, सूरत की स्थापना की। यह संस्था एक ऐसा मंच है जो पूरी तरह महिला नेतृत्व से चलता है और गुजरात की सबसे पहचान वाली लोक कला संस्थानों में गिना जाता है।
ताल ग्रुप की सबसे खास बात यह है कि इसमें 8 साल की बच्चियों से लेकर 65 साल तक की महिलाएं एक साथ जुड़ी हैं। यह संस्था यह संदेश देती है कि कला किसी उम्र, पेशे या पृष्ठभूमि की मोहताज नहीं होती। ताल ग्रुप आज महिला सशक्तिकरण, संस्कृति संरक्षण और लोक कला को आगे बढ़ाने का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है।
यूनेस्को से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और वैश्विक पहचान
ताल ग्रुप को ‘सीआईओएफएफ (सिओफ) इंडिया’ से जुड़ने का गौरव प्राप्त है। सीआईओएफएफ (इंटरनेशनल काउंसिल आफ आर्गेनाइजेशंस आफ फोकलोर फेस्टिवल्स एंड फोक आर्ट्स) एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है, जो यूनेस्को की आफिशियल पार्टनर मानी जाती है और 100 से अधिक देशों में लोक कला और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए काम करती है। इस जुड़ाव ने ताल ग्रुप को एक अंतरराष्ट्रीय मंच दिया और उनकी विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा को और मजबूत बनाया।
भारत की लोक संस्कृति का
वैश्विक प्रतिनिधित्व
ताल ग्रुप ने भारत की लोक संस्कृति को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत किया है। संस्था ने यूरोप, इज़राइल, ब्राज़ील और भारत के अनेक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी कला का प्रदर्शन किया। उनके कार्यक्रम सिर्फ नृत्य नहीं होते, बल्कि एक प्रकार की सांस्कृतिक कूटनीति होते हैं—जहां भारत की आत्मा और परंपरा दुनिया के सामने जीवंत रूप में दिखाई देती है।
सूरत में ऐतिहासिक आयोजन: इंटरनेशनल फोकलोर डांस फेस्टिवल (2020)
कृतिका शाह का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक योगदान माना जाता है इंटरनेशनल फोकलोर डांस फेस्टिवल जो सूरत में 9 से 12 जनवरी 2020 के बीच आयोजित हुआ।
यह आयोजन सिओफ इंडिया और चारू कैसल फाउंडेशन के सहयोग से हुआ। इस कार्यक्रम में रोमानिया, इंडोनेशिया, पोलैंड, स्लोवाकिया और भारत से लोक कलाकारों की टीमें शामिल हुईं ं। कुल मिलाकर 80 से अधिक विदेशी कलाकार और लगभग 120 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया। यह आयोजन केवल मंचीय कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक पूर्ण सांस्कृतिक अनुभव था, जिसमें शामिल थे:
लोक नृत्य प्रदर्शन
कार्यशालाएं
योग सत्र
मेहंदी गतिविधियां
सांस्कृतिक भ्रमण
पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम
स्कूलों और युवाओं से संवाद
इस आयोजन ने सूरत को एक नए रूप में प्रस्तुत किया—सिर्फ व्यापारिक शहर नहीं, बल्कि एक उभरते हुए सांस्कृतिक केंद्र के रूप में।
कोरोना काल में भी सांस्कृतिक निरंतरता
जब पूरी दुनिया कोरोना महामारी के कारण बंद थी, तब भी ताल ग्रुप ने अपनी सांस्कृतिक यात्रा को नहीं रोका। संस्था ने सिओफ ब्राजील, सिओफ इजरायल और अन्य अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
यह दिखाता है कि कृतिका शाह और उनकी संस्था संस्कृति को केवल मंच तक सीमित नहीं मानते, बल्कि उसे एक जीवंत परंपरा के रूप में आगे बढ़ाते हैं।
नृत्य से आगे की सोच: महिला शक्ति, युवा जागरूकता और विरासत शिक्षा
कृतिका शाह की सोच सिर्फ नृत्य प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। वे संस्कृति को समाज के लिए एक शिक्षण और प्रेरणादायक माध्यम बनाती हैं। उन्होंने “नायिका” जैसे कार्यक्रम शुरू किए, जो लोक नृत्य के माध्यम से नारी शक्ति और महिला सम्मान का उत्सव है।
ब्लिट्ज इंडिया दृष्टिकोण
आज के दौर में जब वैश्वीकरण के कारण लोक संस्कृति कमजोर होती जा रही है, ऐसे समय में आर्किटेक्ट कृतिका शाह जैसी हस्तियां देश के लिए एक अनमोल धरोहर हैं। उन्होंने लोक कला को बचाने का कार्य ही नहीं किया, बल्कि उसे एक संगठित संस्था, महिला नेतृत्व और युवा जागरूकता के माध्यम से एक मजबूत आंदोलन बना दिया।

YOU MAY ALSO LIKE

हरित भारत मिशन का दस साल का हिसाब

पराली जो अब सड़क बनेगी

एक जुनूनी कलाकार जैना शाह
जैना शाह सूरत के फाउंटेनहेड स्कूल में 16 साल की हाई स्कूल स्टूडेंट हैं। वह एक उभरती हुई आर्टिस्ट और कला और संस्कृति की शौकीन हैं। जैना ‘रंगिनी’ यूथ आर्ट फेस्टिवल के पीछे की दूरदर्शी सोच हैं, जिन्होंने इसे आज के युवाओं में भारत की लोक कलाओं जैसे पिथोरा, मधुबनी पेंटिंग, जरदोजी कढ़ाई, लिप्पन कला और कई अन्य के बारे में जागरूकता पैदा करने और उन्हें शिक्षित करने के लिए एक अनोखे प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार किया है। गहरी कलात्मक समझ और रचनात्मक अभिव्यक्ति के साथ, जैना के कला और संस्कृति के प्रति प्रेम ने फेस्टिवल के सौंदर्य संबंधी दृष्टिकोण, थीम और कलात्मक यात्रा को आकार दिया है, जिससे उनकी कल्पना ‘रंगिनी’ यूथ आर्ट फेस्टिवल में भाग लेने वाले युवाओं के लिए एक सार्थक सांस्कृतिक अनुभव में बदल गई है।

सूरत को बनाया लोक विरासत का ग्लोबल हब
जब हम सूरत की बात करते हैं, तो दिमाग में चमकते हीरे और कपड़ों के बड़े व्यापार की छवि उभरती है लेकिन इसी औद्योगिक शहर के बीचों-बीच, आर्किटेक्ट कृतिका शाह एक अलग तरह की ‘इमारत’ खड़ी कर रही हैं—एक ऐसी इमारत जो ईं ंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि भारत की लोक कला, लय और सांस्कृतिक गौरव से बनी है।
कृतिका शाह केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक मिशन का नाम है। पेशे से आर्किटेक्ट और दिल से कलाकार, कृतिका ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिकता और परंपरा एक साथ चल सकते हैं। कृतिका शाह का व्यक्तित्व दो विपरीत छोरों का मिलन है। जहां एक आर्किटेक्ट के रूप में वे नक्शों और डिजाइनों में सटीकता ढूंढ़ती हैं, वहीं नृत्यांगना के रूप में लोक कलाओं की भावुक दुनिया में रमी रहती हैं। कृतिका शाह आज की आधुनिक नारी और भारतीय परंपरा के बीच का वो मजबूत सेतु हैं, जिससे हमारी लोक कलाएं भविष्य में भी सुरक्षित रहेंगी।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation