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पांच अतिरिक्त अंकों पर हरियाणा सरकार को झटका

by ब्लिट्ज़ इंडिया
June 28, 2024
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Shock to Haryana government on five extra marks
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। हरियाणा स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (एचएसएससी) परीक्षा में पांच अतिरिक्त अंकों के मुद्दे पर प्रदेश सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। हरियाणा के मूल निवासियों को सामाजिक आर्थिक आधार पर भर्ती परीक्षाओं में अतिरिक्त पांच अंक देने की नीति लागू करने की सरकार की अंतिम उम्मीद भी खत्म हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार और हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की वो याचिका खारिज कर दी जिसमें मूल निवासियों को भर्ती परीक्षाओं में पांच अतिरिक्त अंक देने की अधिसूचना रद करने के हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।

हाईकोर्ट के आदेश पर मुहर
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है। शीर्ष अदालत ने हरियाणा सरकार की नीति को लोक लुभावन करार देते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से इन्कार कर दिया।

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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का क्या था आदेश
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने गत 31 मई को पांच अतिरिक्त अंक देने की नीति को असंवैधानिक ठहराते हुए अधिसूचना रद कर दी थी जिसके खिलाफ हरियाणा सरकार और हरियाणा स्टाफ सलेक्शन कमीशन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की थी।

हाई कोर्ट के फैसले में कोई त्रुटि नजर नहीं आती
न्यायमूर्ति अभय एस ओका व न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की अवकाशकालीन पीठ ने बहस सुनने के बाद याचिका खारिज करते हुए कहा कि उन्हें हाई कोर्ट के फैसले में कोई त्रुटि नजर नहीं आती जिसके लिए उसमें हस्तक्षेप किया जाए। मामले पर सुनवाई की शुरुआत में ही पीठ याचिका पर विचार करने की इच्छुक नहीं दिख रही थी।

लोक लुभावन उपाय बताया
जैसे ही सुनवाई शुरू हुई पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि एक मेधावी छात्र को 60 अंक मिलते हैं तथा किसी और को भी 60 अंक मिलते हैं लेकिन सिर्फ पांच अनुग्रह अंकों के कारण वह ऊपर नहीं जाता। ये सभी लोक लुभावन उपाय हैं। पीठ ने हरियाणा सरकार की ओर से बहस कर रहे अटार्नी जनरल और अन्य वरिष्ठ वकीलों से कहा कि आप ऐसी कार्रवाई का बचाव कैसे कर सकते हैं जिसमें किसी को पांच अंक अतिरिक्त मिल रहे हों।

अटार्नी जनरल की दलील बेअसर
हालांकि अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने राज्य सरकार की नीति का बचाव करते हुए दलील दी कि हरियाणा सरकार ने सार्वजनिक रोजगार की सुरक्षा से वंचित लोगों को अवसर देने के लिए अनुग्रह अंक नीति पेश की थी। वेंकटरमणी ने हाई कोर्ट के दोबारा लिखित परीक्षाएं आयोजित कराने के आदेश का भी विरोध किया और कहा कि हाई कोर्ट का आदेश ठीक नहीं है।

मानक का उल्लंघन
जबकि पहले से कैविएट दाखिल करने वाले और कोर्ट में मौजूद टीजीटी अभ्यर्थियों के वकील जसबीर सिंह मलिक ने हाई कोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए कहा कि सामाजिक और आर्थिक आधार पर पांच अतिरिक्त अंक देने की नीति सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी फैसले में तय किये गए आरक्षण की अधिकतम 50 फीसद सीमा के मानक का उल्लंघन है।

– सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक बताया, याचिका खारिज की
– पहले चयनित उम्मीदवारों को भी दोबारा देनी होगी परीक्षा

पांच मई 2022 की अधिसूचना
हरियाणा सरकार ने पांच मई 2022 को एक अधिसूचना जारी की जिसमें हरियाणा के मूल निवासियों (डोमीसाइल) को भर्ती परीक्षाओं में सामाजिक आर्थिक आधार पर पांच अतिरिक्त अंक देने की नीति थी। नीति के मुताबिक जिनकी पारिवारिक आय एक लाख 80 हजार से कम है, उन्हें इसका लाभ मिलना था। इसके बाद राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में ग्रुप सी और ग्रुप डी की भर्तियां निकाली और टीजीटी टीचरों की भी भर्तियां निकाली। कुछ अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर सामाजिक आर्थिक आधार पर पांच अतिरिक्त अंक देने की नीति को चुनौती दी। हाई कोर्ट ने याचिकाएं स्वीकार करते हुए अतिरिक्त अंक देने की अधिसूचना असंवैधानिक ठहराते हुए रद कर दी।

समानता के अधिकार के उल्लंघन का दिया हवाला
हाई कोर्ट ने माना कि नीति संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 समानता के अधिकार का उल्लंघन करती है। हाई कोर्ट ने 10 जनवरी 2023 और 25 जुलाई 2023 के सीईटी परीक्षा परिणाम रद कर दिये थे और सीईटी अंकों के आधार पर नये सिरे से मेरिट लिस्ट तैयार करने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने नये सिरे से भर्ती विज्ञापन निकालने और चयन का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि जिनकी नियुक्ति हो चुकी है, उन्हें नयी चयन प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति होगी और वे नये चयन तक काम करते रह सकते हैं लेकिन अगर नये चयन में वे पास नहीं हुए तो तत्काल प्रभाव से पद से हट जाएंगे। हाई कोर्ट के इस आदेश से नियुक्ति पाने वाले हजारों लोग प्रभावित हुए हैं जिन्हें दोबारा चयन प्रक्रिया में भाग लेना होगा।

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