ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।दिल्ली में आज से योजना ज़मीन पर उतर रही है। पर सबसे ज़रूरी बात वह है जो आंकड़ों के पीछे छिपी है — करीब 2.6 लाख महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन तो कर लिया, आवेदन पूरा नहीं किया।
दिल्ली सरकार आज, 26 अगस्त को, दिल्ली लक्ष्मी योजना के तहत 4,000 पात्र महिलाओं को स्वीकृति पत्र सौंप रही है। योजना के तहत हर पात्र महिला को हर महीने ₹2,500 मिलेंगे, और यह रकम सीधे बैंक खाते में जाएगी। सरकार ने बताया है कि पैसा अगले महीने की पहली तारीख, यानी 1 सितंबर से खातों में पहुंचना शुरू होगा। दिल्ली के 2026-27 के बजट में इस योजना के लिए ₹5,110 करोड़ रखे गए हैं।
अब वह आंकड़ा, जिस पर ध्यान जाना चाहिए। सरकार के मुताबिक अब तक 9 लाख 13 हज़ार से ज़्यादा महिलाओं ने योजना के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है, लेकिन 6 लाख 52 हज़ार से कुछ ज़्यादा आवेदन ही अंतिम रूप से जमा हुए हैं। यानी करीब 2.6 लाख आवेदन बीच में ही अटके हैं — हर दस में से लगभग तीन। सीधी बात यह है कि रजिस्ट्रेशन कर देना और आवेदन पूरा कर देना, दो अलग काम हैं। और पैसा सिर्फ़ दूसरे वाले पर आता है।
बजट में जगह, अब खाते में पैसा। दिल्ली विधानसभा भवन। दिल्ली लक्ष्मी योजना के लिए 2026-27 के बजट में ₹5,110 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
बजट में रकम रख देना सरकार का काम है। फ़ॉर्म पूरा करवा देना — यह उससे भी बड़ा काम है, और अक्सर वहीं योजनाएं रुक जाती हैं।
एक नज़र में
• योजना: दिल्ली लक्ष्मी योजना
• राशि: ₹2,500 प्रति माह, सीधे बैंक खाते में
• आज: 4,000 महिलाओं को स्वीकृति पत्र, 26 अगस्त 2026
• पैसा कब से: 1 सितंबर से
• रजिस्ट्रेशन: 9.13 लाख से ज़्यादा · पूरे आवेदन: 6.52 लाख से ज़्यादा
• बजट प्रावधान: ₹5,110 करोड़ (2026-27)
₹5,110 करोड़ का मतलब क्या है, यह भी समझ लीजिए। ₹2,500 महीने के हिसाब से एक महिला पर साल भर में ₹30,000 खर्च होता है। इस हिसाब से यह रकम करीब 17 लाख महिलाओं को पूरे बारह महीने का भुगतान दे सकती है। लेकिन योजना 1 सितंबर से शुरू हो रही है, यानी इस वित्त वर्ष में सिर्फ़ सात महीने (सितंबर से मार्च) का भुगतान होगा — प्रति महिला ₹17,500। उस हिसाब से यही रकम करीब 29 लाख महिलाओं तक पहुंच सकती है। बजट कम नहीं है। सवाल यह है कि आवेदन कितने पूरे होते हैं।
जिनका आवेदन अधूरा है, उनके लिए सबसे आम रुकावटें तीन हैं, और तीनों का हल घर बैठे निकल सकता है। पहला — ई-केवाईसी अधूरा रहना। दूसरा — बैंक खाता आधार से लिंक न होना; डीबीटी यानी सीधे खाते में पैसा तभी जाता है जब खाता आधार से जुड़ा हो और डीबीटी के लिए सक्रिय हो। तीसरा — दस्तावेज़ अपलोड करके अंतिम “सबमिट” न दबाना, जिससे आवेदन ड्राफ्ट में पड़ा रह जाता है। सरकार ने सभी पात्र महिलाओं से समय पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पूरा करने की अपील की है।
आगे का रास्ता क्या हो, यह भी साफ़ है। जिन 2.6 लाख आवेदनों पर काम अधूरा है, उन्हें एसएमएस पर यह बताया जाए कि कौन-सा कदम बाकी है — सिर्फ़ यह कि “आवेदन अधूरा है”, काफ़ी नहीं। मोहल्ला स्तर पर कैंप लगें, जहां ई-केवाईसी और बैंक सीडिंग एक ही जगह हो जाए, क्योंकि जिस महिला के पास स्मार्टफ़ोन नहीं है वह पोर्टल पर नहीं पहुंचेगी। और हर हफ़्ते यह आंकड़ा सार्वजनिक हो कि कितने आवेदन पूरे हुए और कितने बचे — जो योजना अपनी प्रगति खुद दिखाती है, उस पर भरोसा भी जल्दी बनता है। पैसा 1 सितंबर से आना है। फ़ॉर्म अगस्त में ही पूरा होना है।












