• Latest
  • Trending
How did BJP get 'Lotus' and Congress 'Panja'?

भाजपा को ‘कमल’ और कांग्रेस को कैसे मिला ‘पंजा’

May 3, 2024
daily-news

भारत की प्रमुख खबरें 22 सितंबर 2026: बुजुर्ग योजना, कोर सेक्टर, हाईवे और रक्षा

September 22, 2026
daily-news

भारत की प्रमुख खबरें 21 सितंबर 2026: तेजस उड़ान, ग्वालियर टेलीकॉम जोन, खेल और फिल्म पुरस्कार

September 21, 2026
ब्रिक्स ने पहलगाम आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की

ब्रिक्स 2026: भारत की कूटनीतिक विजय

September 21, 2026
केदारनाथ यात्रा 2026

केदारनाथ पर बढ़ता प्राकृतिक जोखिम

September 21, 2026
पीएम मोदी का ‘दिमागी नक्सल’ बयान: विपक्ष की प्रतिक्रिया और वैचारिक बहस

सेवा के 25 वर्ष सुशासन का संकल्प और राष्ट्र निर्माण की सतत यात्रा।

September 21, 2026
modi

पीएम मोदी के जन्मदिन पर शुरू हुआ ‘सेवा संकल्प अभियान’

September 21, 2026
yogI

विश्वकर्मा योजना में जुड़े 14 नए ट्रेड, 10 लाख तक का मिलेगा लोन

September 21, 2026
10 हजार स्टार्टअप की कैपिटल बनेगी दिल्ली, 4 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार

10 हजार स्टार्टअप की कैपिटल बनेगी दिल्ली, 4 लाख युवाओं को मिलेगा रोजगार

September 21, 2026
लखनऊ स्वच्छ वायु सर्वेक्षण

देश का सबसे साफ हवा वाला शहर बना लखनऊ

September 21, 2026
मुंबई से खत्म होगा झुग्गियों का नामो निशान: सीएम

मुंबई से खत्म होगा झुग्गियों का नामो निशान: सीएम

September 21, 2026
सूरत में ‘फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल’ का आयोजन

सूरत में ‘फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल’ का आयोजन

September 21, 2026
भारत की सुरक्षा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव का हिस्सा था ऑपरेशन सिंदूर : जनरल नरवणे

भारत की सुरक्षा नीति में महत्वपूर्ण बदलाव का हिस्सा था ऑपरेशन सिंदूर : जनरल नरवणे

September 21, 2026
Tuesday, September 22, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

भाजपा को ‘कमल’ और कांग्रेस को कैसे मिला ‘पंजा’

दिलचस्प है चुनाव चिह्नों की कहानी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
May 3, 2024
in the blitz
0
How did BJP get 'Lotus' and Congress 'Panja'?
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। आजादी के समय देश की साक्षरता दर बेहद कम थी। ऐसे में चुनाव के दौरान पार्टियों और उम्मीदवारों को चुनाव निशान दिए गए थे। यह परंपरा आज तक चली आ रही है।

चुनाव में पार्टियों के लिए उनके चुनावी निशान बेहद जरूरी होते हैं। इस बार चुनाव से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोट की अपील करते हुए कहा था कि आप सिर्फ इतना समझिए कि चुनाव कमल लड़ रहा है। दरअसल आजादी के समय देश की साक्षरता दर बेहद कम थी। ऐसे में पार्टियों या फिर प्रत्याशियों की पहचान के लिए चुनाव निशान देने की शुरूआत हुई थी। हालांकि ये चुनाव निशान आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने 70 साल पहले थे। कई बार पार्टियों में फूट पड़ने के बाद चुनाव निशान के लिए लोग कोर्ट तक जाते हैं।

YOU MAY ALSO LIKE

भारत की प्रमुख खबरें 22 सितंबर 2026: बुजुर्ग योजना, कोर सेक्टर, हाईवे और रक्षा

भारत की प्रमुख खबरें 21 सितंबर 2026: तेजस उड़ान, ग्वालियर टेलीकॉम जोन, खेल और फिल्म पुरस्कार

हाल ही में एनसीपी और शिवसेना में फूट पड़ने के बाद चुनाव चिह्न पर दोनों ही गुट दावेदारी कर रहे थे। वहीं दो पत्ती के निशान के लिए टीटीवी दिनाकरन ने भी कोर्ट के चक्क र काटे। बता दें कि बड़ी पार्टियों के चुनाव चिह्न फिक्स होते हैं लेकिन निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनाव आयोग के पास मौजूद लिस्ट में से चुनाव चिह्न का चयन करना होता है। पहले आओ पहले पाओ की बिनाह पर चुनाव चिह्न अलॉट किए जाते हैं। बता दें कि एमएस सेठी को 1950 में ड्राफ्टमैन के रूप में नियुक्त किया गया था जो कि एचबी पेंसिल की मदद से चुनाव निशान बनाते थे। यही चुनाव निशान इस्तेमाल होते रहे।

– चुनाव निशान आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने 70 साल पहले थे

उनके द्वारा बनाई गई तस्वीरों का इस्तेमाल आज भी चुनाव में होता है। चुनावों में जानवरों की तस्वीरों वाले का भी खूब इस्तेमाल होता था। हालांकि 1991 में इसका विरोध किया गया और इसके बाद जनवरों और पक्षियों की तस्वीरों का इस्तेमाल बंद हो गया।
हालांकि अब भी कुछ पार्टियों के पास ऐसे चुनाव निशान हैं। जैसे कि बीएसपी का निशान हाथी है। एमजीपी का शेर व नागा पीपुल्स फ्रंट का निशान मुर्गा है।

बीजेपी का चुनाव निशान
भारतीय जनता पार्टी आज दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है। इसकी नींव 1980 में पड़ी थी। वैसे तो श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में ही जनसंघ की नींव डाल दी थी। इसका चुनाव निशान दीपक हुआ करता था। आपातकाल खत्म होने के बाद जनसंघ का विलय जनता पार्टी में हो गया और इसका निशान ‘हलधर किसान’ हो गया। 1980 में जब भाजपा बनी तो इसके पहले अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी थे। इसके बाद हिंदू परंपरा से जोड़कर इस पार्टी का चुनाव निशान कमल चुना गया। भाजपा ने इसलिए भी कमल को चुना क्योंकि इसका इस्तेमाल स्वतंत्रता आंदोलन में भी अंग्रेजों के खिलाफ किया गया था।

‘पंजे’ की कहानी
पहले कांग्रेस का चुनावी निशान ‘दो बैलों की जोड़ी’ हुआ करता था। हालांकि जब कांग्रेस में फूट पड़ी तो जगजीवन राम वाली कांग्रेस (आर) को असली कांग्रेस माना गया। वहीं निजलिंगप्पा कि अध्यक्षता वाली कांग्रेस (ओ) को दो बैलों की जोड़ी निशान नहीं दिया गया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के आदेश पर रोक लगा दी और कहा कि दोनों ही गुट अब पुराने निशान का इस्तेमाल नहीं करेंगे। इसके बाद 1971 में कांग्रेस (ओ) को चरखा और कांग्रेस (आर) को बछड़ा और गाय चुनाव निशान दे दिया गया।

कांग्रेस (आर) फिर टूटी
बाद में कांग्रेस (आर) फिर टूट गई। तब इंदिरा गांधी की कांग्रेस (आई) को ‘हाथ के पंजे’ का निशान दिया गया । इंदिरा गांधी गाय और बछड़ा वाला ही निशान चाहती थीं लेकिन चुनाव आयोग ने उनकी मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी चुनाव आयोग के ही फैसले को बरकरार रखा। इस तरह पार्टियां टूटने के बाद निशान बदलते गए और 1978 से कांग्रेस का चुनावी निशान हाथ का पंजा ही है।

ShareTweetSend

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation