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भारत-जर्मनी के बीच 4 ऐतिहासिक समझौते

डिफेंस और सेमीकंडक्टर पर बनी बात

by ब्लिट्ज़ इंडिया
January 17, 2026
in the blitz
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। 12 जनवरी का दिन भारत की कूटनीति और भविष्य की रणनीतियों के लिहाज से बेहद अहम रहा। एक तरफ पूरा देश स्वामी विवेकानंद की जयंती मना रहा था, तो दूसरी तरफ नई दिल्ली में भारत और जर्मनी के रिश्तों की एक नई इबारत लिखी जा रही थी। जर्मन चांसलर की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने चार ऐसे समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनका सीधा सरोकार हमारी सुरक्षा, शिक्षा और तकनीकी विकास से है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर के बीच हुई इस मुलाकात में केवल बातचीत नहीं हुई, बल्कि डिफेंस से लेकर सेमीकंडक्टर तक भविष्य की चुनौतियों से निपटने का पूरा खाका तैयार किया गया।
इन अहम समझौतों से बदलेगी तस्वीर
इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात का सबसे बड़ा हासिल वे चार प्रमुख समझौते (एमओयू) हैं, जिन पर दोनों देशों ने अपनी मुहर लगाई है। सबसे महत्वपूर्ण समझौता ‘क्रिटिकल मिनरल्स और सेमीकंडक्टर’ को लेकर हुआ है। आज के डिजिटल दौर में मोबाइल से लेकर मिसाइल तक, हर जगह सेमीकंडक्टर की जरूरत है, और जर्मनी का साथ मिलना भारत की तकनीकी क्षमता को नई उड़ान देगा।
पीएम मोदी ने इस समझौतों को आपसी भरोसे का प्रतीक बताया और रक्षा व्यापार का रोडमैप तैयार करने की बात कही।
इसके अलावा, रक्षा सहयोग पर एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया गया है। पीएम मोदी ने साफ कहा कि रक्षा और सुरक्षा में आपसी सहयोग हमारे आपसी भरोसे का सबसे बड़ा प्रतीक है। दोनों देश अब रक्षा व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करेंगे। तीसरा समझौता हायर एजुकेशन यानी उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुआ है, जिससे भारतीय छात्रों के लिए नए अवसर खुलने की उम्मीद है। वहीं, आयुर्वेद को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए भी दोनों देशों ने हाथ मिलाया है।
आतंकवाद पर गंभीर चर्चा
बातचीत केवल व्यापार तक सीमित नहीं रही। प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक शांति और सुरक्षा के मुद्दों पर भी जर्मन चांसलर के साथ गहन मंत्रणा की। दोनों नेताओं ने यूक्रेन और गाजा में चल रहे संघर्षों पर चर्चा की।
इस दौरान पीएम मोदी ने आतंकवाद को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे पूरी मानवता के लिए खतरा बताया। यह स्पष्ट संकेत था कि भारत सुरक्षा के मसले पर दुनिया को एकजुट करने की अपनी मुहिम में जर्मनी को एक अहम भागीदार मानता है। पीएम मोदी ने यह भी याद दिलाया कि भारत में 2000 से अधिक जर्मन कंपनियां लंबे समय से काम कर रही हैं, जो हमारे आर्थिक रिश्तों की गहराई को बयां करता है।
पीएम मोदी ने जर्मन चांसलर की यात्रा को स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन के साथ जोड़ते हुए कहा कि स्वामी जी ने भारत और जर्मनी के बीच दर्शन और न्याय के संबंधों की वकालत की थी। वहीं, जर्मन चांसलर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने सुबह ही महात्मा गांधी से जुड़े स्थल का दौरा किया। उन्होंने गांधी जी के उस प्रसिद्ध कथन को याद किया “आप वो बदलाव बनें, जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं।” चांसलर ने अहमदाबाद को आधुनिक भारत का पालना बताया और कहा कि गांधी ने यहीं से अपने संघर्ष की शुरुआत की थी।

19 समझौता ज्ञापन व आठ महत्वपूर्ण घोषणाएं
भारत और जर्मनी ने 19 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं और आठ महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। इनमें द्विपक्षीय रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए एक संयुक्त आशय घोषणा और व्यापार एवं निवेश को बढ़ावा देने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के मंच की स्थापना शामिल है।
भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि जर्मन चांसलर की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, कौशल, हरित ऊर्जा और जन-संबंधों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर महत्वपूर्ण बातचीत हुई। जर्मनी के माध्यम से भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा-मुक्त पारगमन की घोषणा और भारतीय स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की भर्ती के लिए एक नए तंत्र की घोषणा आवागमन के लिए एक प्रमुख उपलब्धि है। जर्मनी ने नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और जलवायु-लचीले शहरी अवसंरचना को समर्थन देने के लिए हरित और सतत विकास साझेदारी के तहत 1.24 बिलियन यूरो के वित्त पोषण की घोषणा की।

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