• Latest
  • Trending

यूएई के फैसले से ग्लोबल ऑयल मार्केट में भूचाल

May 6, 2026
हरित भारत मिशन CAG रिपोर्ट 2026

हरित भारत मिशन का दस साल का हिसाब

August 31, 2026
पराली से बायो-बाइंडर तकनीक

पराली जो अब सड़क बनेगी

August 31, 2026
भारत-उज़्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

भारत-उज़्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

August 31, 2026
daily-news

भारत-उज़्बेकिस्तान सहयोग: शिक्षा, दवा, कृषि, योग और खेल में नई साझेदारी

August 31, 2026
प्रोजेक्ट इम्पोर्ट्स योजना CAG ऑडिट 2026

जिस फ़ाइल की कोई आख़िरी तारीख़ नहीं

August 31, 2026
भारत सरकारी योजनाएं और प्रमुख घटनाक्रम अगस्त 2026

भारत का अपना पॉपकॉर्न बीज

August 31, 2026
daily-news

भारत सरकारी योजनाएं और प्रमुख घटनाक्रम अगस्त 2026

August 31, 2026
भारतीय मानक समय नियम 2026

अब पूरे देश की घड़ी एक होगी

August 31, 2026
भारत-जापान स्टार्टअप और डीप टेक 2026

अब भारत सस्ता नहीं, हुनर बेच रहा है

August 30, 2026
भारत की आर्थिक और कारोबारी गतिविधियाँ अगस्त 2026

सप्ताह की समीक्षा

August 30, 2026
ई-श्रम पोर्टल के 5 साल: 31.89 करोड़ पंजीकरण, 54.28% महिलाएँ

हर दिन पौने दो लाख नाम

August 30, 2026
CAG Railway Audit Report 2026: ₹1,130.92 Crore की 26 टिप्पणियाँ

छब्बीस टिप्पणियाँ, ग्यारह सौ करोड़

August 30, 2026
Monday, August 31, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

यूएई के फैसले से ग्लोबल ऑयल मार्केट में भूचाल

कच्चा तेल आसमान पर, ओपेक के सामने गंभीर चुनौती

by ब्लिट्ज़ इंडिया
May 6, 2026
in the blitz
0

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। यूनाइटेड अरब अमीरात के फैसले से दुनिया भर में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। ब्रेंट क्रूड करीब 2.8% बढ़कर 121 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि डब्ल्यू टीआई भी लगभग 100 डॉलर के आसपास है। यूएई ने 1 मई से ओपेक और ओपेक+ छोड़ने का बड़ा फैसला लिया । इससे पूरी दुनिया के तेल बाजार, कीमतों और सप्लाई सिस्टम पर असर पड़ सकता है।

ओपेक और ओपेक + क्या है?

ओपेक यानी ऑर्गनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज एक ऐसा ग्रुप है जिसमें बड़े तेल उत्पादक देश शामिल हैं। इनमें सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत जैसे देश शामिल हैं और हाल तक यूएई भी इसका हिस्सा था। इसका मुख्य काम तेल उत्पादन को कंट्रोल करके कीमतों को मैनेज करना है।

YOU MAY ALSO LIKE

हरित भारत मिशन का दस साल का हिसाब

पराली जो अब सड़क बनेगी

ओपेक कैसे काम करता है?

ओपेक अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बैलेंस बनाए रखने की कोशिश करता है। जब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें गिरने लगती हैं, तो ओपेक देश मिलकर तेल की सप्लाई (उत्पादन) में कटौती कर देते हैं, ताकि मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने से कीमतें फिर से स्थिर हो सके। इसके विपरीत, जब तेल की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ जाती हैं और दुनिया भर में ऊर्जा संकट का खतरा मंडराने लगता है, तो ओपेक उत्पादन बढ़ाकर बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ा देता है। इससे सदस्य देशों की कमाई सुरक्षित बनी रहती है और ग्लोबल मार्केट में कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता।

ओपेक क्या है और क्यों इतना ताकतवर

ओपेक+ में ओपेक के साथ कुछ और देश भी जुड़े हैं, जैसे रूस। यह 2016 में तब बना जब तेल की कीमतें गिर गई थीं और ओपेक अकेले बाजार को संभाल नहीं पा रहा था।आज ओपेक+ दुनिया के करीब 40-50% तेल उत्पादन को कंट्रोल करता है।

ओपेक+ की असली ताकत इस बात में छिपी है कि यह संगठन दुनिया के तेल सप्लाई के एक बहुत बड़े हिस्से को कंट्रोल करता है। जब भी ओपेक+ के सदस्य देश कोई फैसला लेते हैं, तो उसका असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिखाई देता है और तेल की कीमतें पलक झपकते ही ऊपर-नीचे होने लगती हैं। चूंकि दुनिया की इकोनॉमी तेल पर टिकी है, इसलिए इनके फैसलों का सीधा असर हर देश की महंगाई, ट्रांसपोर्ट की लागत और पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यही वजह है कि ओपेक+ को इतना ताकतवर माना जाता है, क्योंकि यह पूरी दुनिया की जेब और बाजार की दिशा बदल सकती है।

यूएई ने ओपेक क्यों छोड़ा? जान लें वजह

यूएई को भविष्य की भी चिंता है क्योंकि रिन्यूएबल एनर्जी के बढ़ते चलन के कारण आने वाले समय में तेल की मांग घट सकती है। ऐसे में यूएई की सोच यह है कि आज का तेल भविष्य की तुलना में ज्यादा कीमती हो सकता है, इसलिए वह अभी अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल करके ज्यादा से ज्यादा कमाई करना चाहता है। ओपेक की पाबंदियों से बाहर निकलकर वह अपनी इकोनॉमी को और मजबूत करने और भविष्य के जोखिमों से निपटने की तैयारी कर रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई और सऊदी अरब के बीच लंबे समय से उत्पादन को लेकर मतभेद थे। इसके अलावा कोटा सिस्टम से यूएई संतुष्ट नहीं था। वह अपनी मार्केट शेयर बढ़ाना चाहता है।

यूएई के बाहर निकलने का असर

यूएई के ओपेक से बाहर निकलने का असर काफी गहरा हो सकता है, जिससे सबसे पहले ओपेक की वैश्विक ताकत कमजोर पड़ सकती है। यूएई उन गिने-चुने देशों में शामिल था जिसके पास जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त तेल उत्पादन करने की बड़ी क्षमता थी, और उसके जाने से संगठन का दबदबा कम होना तय है। दूसरा बड़ा असर तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के रूप में दिख सकता है। चूंकि अब सप्लाई को एक सुर में कंट्रोल करना मुश्किल होगा, इसलिए बाजार पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा वोलाटाइल हो सकता है। अंत में, इससे तेल बाजार पूरी तरह बिखर सकता है। जब हर देश अपने निजी फायदे और रणनीति के हिसाब से फैसले लेने लगेगा, तो इससे एकजुटता कम होगी और भविष्य में ग्लोबल मार्केट को संतुलित करना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।

क्यों बढ़ रही हैं तेल की कीमतें?

इस समय सबसे बड़ा कारण है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना, जहां से दुनिया का करीब 20% तेल गुजरता है। ईरान युद्ध के कारण सप्लाई बाधित है और निर्यात कम हो गया है। इसी वजह से कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। अगर हालात सामान्य होते हैं और यूएई ज्यादा उत्पादन शुरू करता है। सप्लाई बढ़ सकती है कीमतें फिर नीचे आ सकती हैं.लेकिन अभी बाजार अनिश्चित है कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।

भारत पर क्या असर पड़ेगा?

ग्लोबल ऑयल मार्केट में होने वाली इस हलचल का भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर सीधा और बड़ा असर पड़ता है।व कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से न केवल पेट्रोल-डीजल महंगा होने का डर रहता है, बल्कि इससे माल ढुलाई की लागत बढ़ती है, जिससे सीधे तौर पर महंगाई में इजाफा होता है और देश का व्यापार घाटा भी बढ़ सकता है। हालांकि, आम जनता के लिए राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार ने फिलहाल कीमतों में बढ़ोतरी की किसी भी संभावना से इनकार किया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ किया है कि पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation