• Latest
  • Trending
This 'Agniveer' did wonders

इस ‘अग्निवीर’ ने तो गजब कर दिया

February 24, 2025
jal-jeevan-mission-jal-suraksha

नल लग गया। अब असली सवाल यह है कि उसमें पानी रोज़ आता है या नहीं, और वह पीने लायक़ है या नहीं

July 29, 2026
solar

छह महीने में 29 गीगावाट: छत पर लगे सोलर ने भारत की हरित रफ़्तार को वह गति दे दी जो 2030 के लक्ष्य के लिए चाहिए थी

July 29, 2026
vikram

एक साल में सात मिशन: इसरो अंतरिक्ष का सबसे मुश्किल काम कर रहा है — लय बनाना

July 29, 2026
store

सेंसेक्स 889 अंक चढ़ा, और नतीजों में एक बड़ी बात: गांव का बाज़ार लगातार दूसरी तिमाही शहर से आगे

July 29, 2026
exam

क़ानून, कार्रवाई और एक टास्क फ़ोर्स: देश अपनी सबसे बड़ी परीक्षाओं का पूरा ढांचा दोबारा खड़ा कर रहा है

July 29, 2026
भारत का भूजल संकट और जल सुरक्षा की चुनौती

ज़मीन के नीचे का पानी: भारत का सबसे ज़रूरी संसाधन वही है जो दिखता नहीं

July 29, 2026
भारत इलेक्ट्रिक वाहन

बारह महीनों में 28 लाख इलेक्ट्रिक गाड़ियां: अब यह प्रयोग नहीं, बाज़ार है

July 29, 2026
vikram

सात प्रक्षेपण और एक क्रू मॉड्यूल: इसरो के सामने अपना सबसे व्यस्त साल

July 29, 2026
राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस कार्यक्रम ने 21 करोड़ जांच पूरी की

21 करोड़ लोगों की जांच: देश का सबसे कम चर्चित स्वास्थ्य अभियान सबसे बड़े अभियानों में है

July 29, 2026
राष्ट्रमंडल खेल 2026: खेलो इंडिया से मजबूत हुआ भारत

ग्लासगो में 12 पदक, देश में 1,067 केंद्र: अब भारत के पदक अचानक नहीं आते

July 29, 2026
solar

288 गीगावॉट के बाद का सवाल: भारत शाम की बिजली कहां रखेगा

July 27, 2026
vikram

तीन जांचें और पूरी: गगनयान उन पड़ावों से गुज़रा जिनकी तस्वीरें नहीं छपतीं

July 27, 2026
Thursday, July 30, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

इस ‘अग्निवीर’ ने तो गजब कर दिया

- 17 दिन में 1100 किमी दौड़कर पहुंचा महाकुंभ

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 24, 2025
in the blitz
0
This 'Agniveer' did wonders
ब्लिट्ज ब्यूरो

सुपौल। एक अग्निवीर का सफर आत्मबल, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन गया। बीते 23 जनवरी को सहरसा से शुरू हुई उसकी यात्रा 17 दिनों में पूरी हुई। रोजाना 10 घंटे दौड़ते हुए अग्निवीर रूपेश ने अपनी मंजिल पाई और 8 फरवरी को दोपहर 12 बजे संगम में स्नान किया। रास्ते में कई कठिनाइयों का सामना भी किया, लेकिन उनका आत्मबल अडिग रहा। 1 फरवरी को दानापुर में उनकी तबीयत खराब हो गई, वहीं उनका पर्स और मोबाइल भी चोरी हो गया। इसके बावजूद, दोस्तों और स्थानीय लोगों की मदद से उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी। क्यूआर कोड के माध्यम से 5-6 हजार रुपये का आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ।

300 रुपये व दृढ़ निश्चय के सहारे शुरू की यात्रा
बता दें कि रूपेश ने महाकुंभ तक की यह अनोखी यात्रा मात्र 300 रुपये लेकर शुरू की। इस राशि से उन्होंने अपनी यात्रा का पोस्टर तैयार कराया, जिसमें क्यूआर कोड के जरिए आर्थिक सहयोग की अपील की गई थी। सोशल मीडिया पर उन्होंने अपनी यात्रा साझा की, जिससे कई लोगों ने आर्थिक मदद की।

YOU MAY ALSO LIKE

नल लग गया। अब असली सवाल यह है कि उसमें पानी रोज़ आता है या नहीं, और वह पीने लायक़ है या नहीं

छह महीने में 29 गीगावाट: छत पर लगे सोलर ने भारत की हरित रफ़्तार को वह गति दे दी जो 2030 के लक्ष्य के लिए चाहिए थी

दोस्तों ने छोड़ा साथ, लेकिन रूपेश ने नहीं मानी हार
इस यात्रा की शुरुआत में रूपेश के साथ दो दोस्त भी थे, लेकिन बख्तियारपुर पहुंचने से पहले ही वे थककर वापस लौट गए। इसके बाद, कठिन परिस्थितियों में भी रूपेश ने अकेले ही 1100 किमी की यात्रा पूरी की। उन्होंने न केवल अपनी आस्था को प्रमाणित किया, बल्कि अपने साहस और दृढ़ निश्चय से लोगों के दिलों को जीत लिया।

परिवार और समाज से सुननी पड़ी बातें
रूपेश के पिता रामप्रवेश यादव ने बताया कि शुरुआत में उनके बेटे के इस निर्णय पर लोग ताने मारते थे। कई लोग कह रहे थे कि रूपेश पैसे मांगने के लिए यात्रा कर रहा है लेकिन, जब उन्होंने उसकी लगन और समर्पण देखा, तो सभी की सोच बदल गई। अब पूरे इलाके में रूपेश की प्रशंसा हो रही है, और परिवार गर्व से भरा हुआ है।

राष्ट्रभक्ति और गोल्ड मेडल का सपना
रूपेश धावक 2024 में अग्निवीर के लिए चयनित हो चुके हैं। वर्तमान में वह बीएनएमयू के घैलाढ़ कॉलेज से स्नातक कर रहे हैं। उनका सपना है कि वह मैराथन में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीते। इसके लिए उन्होंने सरकार और समाज से समर्थन की अपील की है।

राष्ट्रभक्ति और आस्था का संगम
रूपेश की यह यात्रा केवल एक महाकुंभ स्नान नहीं थी। यह उनके साहस, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन गई। उनका जज्बा और आत्मबल आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगा। यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation