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एआई पर सख्त नियमों के पक्ष में पूरी दुनिया

by ब्लिट्ज़ इंडिया
February 15, 2025
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The whole world is in favor of strict regulations on AI
ब्लिट्ज ब्यूरो

पेरिस। एआई पर नियंत्रण के लिए नियामक को लेकर दुनिया बंटती नजर आ रही है। पेरिस में आयोजित एआई एक्शन समिट को संबोधित करते हुए अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि उनका देश एआई पर सख्त नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा, मैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस बात से सहमत हूं कि एआई कभी इंसानों की जगह नहीं लेगा।

वेंस ने कहा, ट्रंप प्रशासन इसका आश्वासन देगा कि अमेरिका में तैयार एआई प्रणाली वैचारिक पूर्वाग्रहों से मुक्त है। उन्होंने कहा कि दुनिया एआई के जरिए एक नई औद्योगिक क्रांति की तरफ बढ़ रही है, यदि इसको लेकर बहुत अधिक बंदिशें लग जाएंगी तो इसके लक्ष्यों को कभी हासिल नहीं किया जा सकता है।

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मैक्रों बोले, भरोसा जताना होगा
एआई पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूख को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने सराहा है। वे बोले, दुनिया बंटनी नहीं चाहिए और लोगों को एआई पर भरोसा करना चाहिए। मैं इस पर विश्वास नहीं करता कि दुनिया ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ में बंट जाए। हमें एआई पर पीढ़ियों के बंटने से बचना होगा।

अरबों खर्च होंगे
यूरोप में एआई को बढ़ावा देने के लिए यूरोपियन आयोग 200 अरब यूरो का निवेश करेगा। समिट में आयोग की प्रमुख उर्सुला गटूंड वॉन डेर लेयेन ने ये एलान किया।

एआई के लोकतांत्रिक इस्तेमाल पर जोर
सम्मेलन में एआई के लोकतांत्रिक इस्तेमाल पर जोर दिया गया। भारत के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने सम्मेलन के राउंडटेबल सत्र को दिल्ली से ऑनलाइन संबोधित किया। उन्होंने कहा, भारत-फ्रांस तकनीकी स्तर पर तालमेल को मजबूत करेंगे। द्विपक्षीय बैठक के इतर भारत फ्रांस संग शिक्षा और कौशल क्षेत्र को बेहतर करने के लिए भी काम करेगा। बैठक में एआई के विकास और उसको मॉडल को लागू करने से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा हुई।

यूरोपः विश्वास जरूरी
यूरोपियन यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला गर्दड वॉन डेर लेयेन कहा, एआई पर लोगों को विश्वास की जरूरत है। ये सुरक्षित हो, यह अहम है। सुरक्षा इस उद्योग की सबसे बड़ी कड़ी है। हमें इसे आसान बनाना होगा और जो भी चुनौतियां हैं, उन्हें खत्म करना होगा।

चीन ः सख्ती के खिलाफ
चीन के वाइस प्रीमियर झांग गुओकिग वैश्विक स्तर पर एआई के लिए मानक के पक्ष में थे। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि यूरोपीय सरकारें एआई पर कड़ा प्रतिबंध लगाती हैं तो अमेरिका को अपनी नाटो प्रतिबद्धताओं पर पुनर्विचार करना चाहिए। बीजिंग एआई पर बहुत ज्यादा सख्ती के खिलाफ है।

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