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पृथ्वी के साथ सूर्य का चक्कर लगा रहे मिनी मून का सुलझ गया रहस्य

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पृथ्वी के साथ सूर्य का चक्कर लगा रहे मिनी मून का सुलझ गया रहस्य

by ब्लिट्ज़ इंडिया
April 25, 2024
in अन्तरराष्ट्रीय
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The mystery of the mini moon revolving around the sun along with the earth has been solved.
ललित दुबे

वाशिंगटन। वैज्ञानिकों ने 8 साल पहले अंतरिक्ष में एक रहस्यमय चीज देखी थी, जो पृथ्वी के साथ सूर्य की परिक्रमा कर रही थी। अब वैज्ञानिकों ने इस रहस्य को हल करते हुए इस क्षुद्रग्रह के बारे में पता लगा लिया है। खगोलविदों का मानना है कि ये पिंड चंद्रमा का टुकड़ा हो सकता है। यही नहीं, उन्होंने वो जगह भी ढूंढ़ निकाली है, जहां से यह अलग होकर बाहर गया था। अब इस टुकड़े को मिनी मून नाम दिया गया है।

नेचर एस्ट्रोनॉमी जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में पाया गया है कि पृथ्वी के नजदीक मौजूद क्षुद्रग्रह कामोओलेवा स्पेस में किसी चट्टान के चंद्रमा से टकराने की वजह से बना हो सकता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि कामोओलेवा से जो प्रकाश परावर्तन हो रहा है, वह चंद्रमा पर क्षतिग्रस्त चंद्र चट्टान से मेल खाता है। इसका आकार, उम्र और स्पिन सभी 22 किमी चौड़े जियोर्डानो ब्रूनो क्रेटर से मेल खाते हैं, जो चंद्रमा के दूर की ओर स्थित है। चीन ने 2025 में इस क्षुद्रग्रह तक एक स्पेस मिशन भेजकर सैंपल लाने की योजना बनाई है। स्पेस डॉट कॉम के अनुसार, तियानवेन-2 नामक यह मिशन लगभग ढाई साल बाद कामोओलेवा के टुकड़े लेकर वापस लौटेगा।

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– चंद्रमा से टूटकर अलग हुआ था कामोओलेवा नामक क्षुद्रग्रह
– के जियार्डानो क्रेटर से निकलकर हुआ है निर्माण

2016 में हुई थी क्षुद्रग्रह की खोज
कामो ओलेवा की खोज 2016 में हवाई में हलेकाला वेधशाला के शोधकर्ताओं द्वारा की गई थी। इसका व्यास लगभग 100 से 200 फीट है। हर 28 मिनट में यह घूर्णन का अपना एक चक्क र पूरा करता है। क्षुद्रग्रह पृथ्वी के समान पथ पर सूर्य की परिक्रमा करता है। कभी-कभी यह 1.6 करोड़ किमी के भीतर आ जाता है।

शोधकर्ता चेंग और उनके सहयोगियों ने इस बात की गणना की चंद्रमा की सतह से कामोओलेवा जैसे टुकड़े को बाहर निकालने के लिए किस आकार की वस्तु और किस प्रभाव की गति की आवश्यकता होगी।

उन्होंने पाया कि 18 किलोमीटर प्रति सेकेंड की गति और 45 डिग्री के प्रभाव से टक्क र होने के बाद 10 से 20 किलोमीटर गड्ढा छोड़ सकता है।

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