नई दिल्ली। तेजस एमके-1ए कार्यक्रम में इंजन सप्लाई की रुकावट कम होने लगी है। साल के अंत तक 12 और जीई इंजन आने की उम्मीद है। एचएएल के पास 27 एयरफ्रेम तैयार हैं जबकि एक स्क्वाड्रन इंडक्शन का लक्ष्य 2026 के अंत तक का तय किया गया है।
भारतीय वायुसेना के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके-1ए कार्यक्रम में लंबे समय से चली आ रही इंजन सप्लाई की समस्या अब धीरे-धीरे कम होने की पुष्टि रक्षा मंत्रालय ने की है। मंत्रालय का कहना है कि साल के अंत तक भारत को जीई एयरोस्पेस के 12 और एफ404 इंजन मिलने की उम्मीद है।
यह विकास महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पास पहले से 27 तेजस एमके-1ए एयरफ्रेम तैयार पड़े हैं। अब तक 10 इंजन मिल चुके हैं। बाकी एयरफ्रेम को टेस्ट या रिजर्व इंजन से उड़ाया जा रहा है। अंतिम इंटीग्रेशन और वैलिडेशन का काम जारी है।
जीई एयरोस्पेस ने हर महीने चार इंजन देने का वादा किया है। इससे सरकार का लक्ष्य पूरा होने में मदद मिलेगी कि 2026 के अंत तक कम से कम एक पूरा तेजस एमके-1ए स्क्वाड्रन इंडक्ट हो जाए। तेजस एमके-1ए कार्यक्रम में सबसे बड़ी रुकावट इंजन की कमी रही है। अब रक्षा मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार जीई की सप्लाई नियमित होने वाली है। एचएएल चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रवि के ने पहले कहा था कि 27 एयरफ्रेम तैयार हैं लेकिन अंतिम डिलीवरी टेस्टिंग और इंटीग्रेशन पर निर्भर है। खासकर रडार और हथियार सिस्टम के इंटीग्रेशन से जुड़ी तकनीकी समस्याएं अब भी हल की जा रही हैं। इंजन मिलने के साथ ये काम भी पूरा होने पर विमान संचालन के लिए तैयार हो सकेंगे। यह बदलाव कार्यक्रम को गति देने वाला साबित हो सकता है।
पहला कॉन्ट्रैक्ट फरवरी 2021 में 83 विमानों का हुआ था। दूसरा कॉन्ट्रैक्ट सितंबर 2025 में 97 अतिरिक्त विमानों के लिए साइन हुआ। इसमें 68 फाइटर और 29 ट्विन-सीटर शामिल हैं। इसकी लागत कर छोड़कर 62,370 करोड़ रुपये से ज्यादा है।














