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बिजनेस बन गया है आरटीआई : सुप्रीम कोर्ट

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बिजनेस बन गया है आरटीआई : सुप्रीम कोर्ट

दो एक्टिविस्टों को नहीं मिली बेल

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 4, 2026
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बिजनेस बन गया है आरटीआई : सुप्रीम कोर्ट

राजेश दुबे

नई दिल्ली। सूचना का अधिकार कानून के जरिए सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप के आरोपों से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तीखी टिप्पणी की है। इसके साथ ही कोर्ट ने दो आरटीआई कार्यकर्ताओं की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि आरटीआई एक्टिविज्म अब एक बिजनेस बन गया है। इसकी आड़ में सरकारी कर्मचारियों को अपना काम करने से रोका जा रहा है।

ये मामला पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला से जुड़ा है। यहां रहने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट रमेश बहल और राजीव कुमार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। दोनों ने दावा किया था कि वे एक सरकारी सड़क निर्माण परियोजना में कथित भ्रष्टाचार का पर्दाफाश कर रहे थे। हालांकि उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में राहत देने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया।

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जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कई कड़ी टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा कि आरटीआई एक्टिविज्म एक ऐसे व्यवसाय का रूप लेता जा रहा है, जो सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोक रहा है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से सीधे कई सवाल भी किए।

अदालत ने पूछा, आप लोगों को काम नहीं करने देते। सड़क निर्माण कार्य की प्रगति पर नजर रखने वाले आप कौन होते हैं? क्या आप वहां इंजीनियर हैं? क्या आप कोई उच्च अधिकारी हैं? या फिर जनता के अधिकृत प्रतिनिधि हैं? अदालत की इन टिप्पणियों से संकेत मिला कि न्यायालय सरकारी परियोजनाओं में अनधिकृत हस्तक्षेप को गंभीरता से देख रहा है।

आरोप है कि दोनों कार्यकर्ताओं ने सरकारी सड़क निर्माण कार्य में बाधा डाली। उनके खिलाफ पर्यवेक्षक अधिकारी पर हमला करने, मजदूरों के साथ मारपीट करने और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपियों की हरकतें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति एक्ट के तहत अपराध हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस तरह की गतिविधियों को सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप का माध्यम बताते हुए इसे येलो जर्नलिज्म यानी पीत पत्रकारिता जैसा व्यवहार करार दिया। अदालत का मानना था कि यदि कोई व्यक्ति वैधानिक अधिकारों की आड़ में सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसे संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

आरटीआई कार्यकर्ता रमेश बहल और राजीव कुमार पहले पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचे थे। उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन 14 मई को हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद दोनों ने राहत पाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में विशेष याचिका दाखिल की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

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