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आईआईटी दिल्ली क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग्स 2027 में फिर अव्वल

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आईआईटी दिल्ली क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग्स 2027 में फिर अव्वल

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 4, 2026
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आईआईटी दिल्ली क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग्स 2027 में फिर अव्वल

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (आईआईटी, दिल्ली) ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स 2027 में भारत के सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थान के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखी है। आईआईटी दिल्ली को इस बार वैश्विक स्तर पर 118वां स्थान मिला है, जो किसी भी भारतीय संस्थान द्वारा हासिल की गई संयुक्त रूप से सबसे अच्छी रैंकिंग में शामिल है। यह उपलब्धि दिखाती है कि भारतीय संस्थान अब दुनिया के शीर्ष विश्वविद्यालयों के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

वहीं, भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था की वैश्विक पहचान भी लगातार बढ़ रही है। क्यूएस रैंकिंग्स 2027 में इस बार 52 भारतीय विश्वविद्यालयों को जगह मिली है, जिससे भारत दुनिया का पांचवां सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला देश बन गया है। वर्ष 2017 में जहां केवल 14 भारतीय संस्थान इस रैंकिंग में शामिल थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 52 हो गई है। यह वृद्धि जी20 देशों में सबसे तेज मानी जा रही है।

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रैंकिंग के अनुसार, 26 भारतीय विश्वविद्यालयों ने अपनी स्थिति में सुधार किया, नौ ने अपनी रैंकिंग बरकरार रखी, 15 की रैंकिंग में गिरावट आई, जबकि दो संस्थान पहली बार रैंकिंग में शामिल हुए। भारत के पूर्व में रैंकिंग में शामिल आधे से अधिक विश्वविद्यालयों ने इस वर्ष अपने प्रदर्शन में सुधार किया है।
प्रदर्शन का स्वागत करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि परिणाम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत शुरू किए गए सुधारों के प्रभाव को दर्शाते हैं।

प्रधान ने कहा, नवीनतम वैश्विक विश्वविद्यालय रैंकिंग में भारत का सशक्त प्रदर्शन एनईपी 2020 के परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाता है। अब 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 52 विश्वविद्यालय रैंकिंग में शामिल हैं और आधे से अधिक विश्वविद्यालयों ने अपनी स्थिति में सुधार किया है। आईआईटी दिल्ली जैसे संस्थानों की रिकॉर्ड-उच्च रैंकिंग के साथ, भारत अनुसंधान, नवाचार और अपने युवाओं की प्रतिभा के बल पर एक अग्रणी वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में उभर रहा है।

अन्य भारतीय विश्वविद्यालयों ने भी रचा इतिहास
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली लगातार मजबूत हो रही है। उनके अनुसार, सरकारी और निजी दोनों तरह के संस्थानों में सुधार देखने को मिल रहा है, जिससे भारत एक वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में उभर रहा है। यह बदलाव देश में शिक्षा की गुणवत्ता, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के प्रयासों का परिणाम है।

आईआईटी बॉम्बे को 134वां, आईआईटी मद्रास को 170वां, आईआईटी खडगपुर को 205वां और आईआईटी कानपुर को 221वां स्थान मिला। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की रैंकिंग सुधरकर 322वें स्थान पर पहुंच गई, जबकि जामिया मिलिया इस्लामिया को 686वां स्थान मिला। रैंकिंग से यह भी पता चलता है कि भारत की सफलता अब सिर्फ आईआईटी संस्थानों तक सीमित नहीं है। जामिया मिलिया इस्लामिया, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय समेत 18 भारतीय संस्थानों ने अपनी अब तक की सबसे अच्छी रैंकिंग हासिल की है। इनमें से अधिकांश गैर आईआईटी संस्थान हैं।

विदेशी छात्रों को आकर्षित करना अब भी चुनौती
भारत के विश्वविद्यालयों ने रिसर्च और रोजगार क्षमता के क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया है। प्रति संकाय उद्धरण के मामले में 11 भारतीय विश्वविद्यालय दुनिया के शीर्ष 100 संस्थानों में शामिल हो गए हैं, जबकि नियोक्ता प्रतिष्ठा के आधार पर 6 भारतीय संस्थानों ने वैश्विक टॉप-100 में जगह बनाई है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा शोध उत्पादन वाला देश बन चुका है।

रैंकिंग में कई भारतीय संस्थानों ने बड़ी छलांग लगाई है। वीआईटी ने 94 स्थानों की बढ़त के साथ 597वीं रैंक हासिल की, बिट्स पिलानी 93 स्थान ऊपर चढ़कर 575वें स्थान पर पहुंच गया, जबकि जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने भी 75 से अधिक स्थानों का सुधार दर्ज किया।

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