• Latest
  • Trending

राजनीतिक शुचिता देशहित में

August 29, 2025
daily-news

सप्ताह की समीक्षा: रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी, GST नियमों में राहत और रिकॉर्ड रक्षा निर्यात

October 11, 2026
daily-news

14416 पर चार साल में 47.75 लाख कॉल

October 10, 2026
medicine

दवा, कोयला, खादी और व्यापार पर सरकार के नए कदम

October 9, 2026
अर्थव्यवस्था

जीएसटी सुधार, नाविकों की संख्या और भारतनेट का विस्तार

October 9, 2026
यशोभूमि, नई दिल्ली में 10वें इंडिया मोबाइल कांग्रेस के उद्घाटन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 8 अक्टूबर 2026। श्रेय : पीएमओ (pmindia.gov.in)

किसान के फोन पर किस्त, हर जिले में 5जी

October 8, 2026
यूपीआई और डीपीआई ने बदली भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था

कर्ज महंगा, पर अर्थव्यवस्था 7.1% की रफ्तार पर

October 7, 2026
भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

भारत विकास: वीजा, रक्षा, खेल और ऊर्जा की बड़ी खबरें

October 6, 2026
भारतीय पायलट के हौसले की इंतहा...!

भारतीय पायलट के हौसले की इंतहा…!

October 5, 2026
jai-shankar

न्यूयॉर्क में दिखी नए भारत की ‘दबंग कूटनीति’

October 5, 2026
संसद का मॉनसून सत्र 2026: हंगामे में बर्बाद हुआ समय और जनता के धन का नुकसान

लोकतंत्र में विपक्ष कितना रचनात्मक

October 5, 2026
अर्थव्यवस्था के नए इंजन: उभरते 100 शहरों में 55 भारतीय

अर्थव्यवस्था के नए इंजन: उभरते 100 शहरों में 55 भारतीय

October 5, 2026
परमार्थ के पथ पर अशोक सिंघल युवा उनके आदर्शों से लें प्रेरणा

परमार्थ के पथ पर अशोक सिंघल युवा उनके आदर्शों से लें प्रेरणा

October 5, 2026
Sunday, October 11, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

राजनीतिक शुचिता देशहित में

by ब्लिट्ज़ इंडिया
August 29, 2025
in the blitz
0

YOU MAY ALSO LIKE

सप्ताह की समीक्षा: रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी, GST नियमों में राहत और रिकॉर्ड रक्षा निर्यात

14416 पर चार साल में 47.75 लाख कॉल

ब्लिट्ज ब्यूरो

क्या विपक्ष यह चाहता है कि राजनीति में शुचिता और नैतिकता की स्थापना के लिए कुछ भी न किया जाए? अतः यह जरूरी है कि सभी दल सही सोच के साथ राजनीति में शुचिता और नैतिकता लाने के लिए समग्र प्रयास करें। यही देशहित में भी है।
प्र धानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की ओर से संसद के मानसून सत्र की समाप्ति के एक दिन पूर्व गृहमंत्री अमित शाह ने जो 130वें संविधान संशोधन विधेयक पेश किए उनको लेकर विपक्ष की तरफ से अभूतपू्र्व हंगामा सदन में देखने को मिला। इस हंगामे के दौरान माननीयों द्वारा जिस आचरण का प्रदर्शन किया गया उसे किसी भी दृष्टि से शोभनीय नहीं का जा सकता। विपक्षी सांसदों ने उन विधेयकों को फाड़ कर उनकी बॉल बना कर गृहमंत्री अमित शाह पर फेंका। असहमति होने पर विरोध प्रकट करना लोकतंत्र में विपक्ष का अधिकार है पर जो दृष्टांत पेश किया गया, वह सही परंपरा की नींव नहीं रखता। दरअसल गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार अथवा हिरासत में लिए जाने पर प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री या मंत्रियों को गिरफ्तारी के 30 दिन बाद पद से हटाने के प्रावधान वाले विधेयकों पर लोकसभा पर विपक्ष ने आवश्यकता से अधिक शोरशराबा और हंगामा किया जो सामान्य विवेक से परे था। यह अच्छा ही हुआ कि गृहमंत्री अमित शाह ने अपनी ओर से इन विधेयकों को संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने का प्रस्ताव रखा जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार भी कर लिया।
पहले यह खबर थी कि विपक्ष का आईएनडीआईए (इंडिया) गठबंधन का कोई दल जेपीसी में शामिल नहीं होगा पर अब तीन विधेयक ने विपक्षी खेमे में दरार पैदा कर दी है। इस बिल को लेकर जेपीसी में शामिल होने पर विपक्षी धड़ा पूरी तरह से दो भागों में बंटा नजर आ रहा है। विपक्ष ने संसद में इन बिलों का संयुक्त रूप से विरोध किया था। समझा जाता है कि कांग्रेस नेतृत्व इस समिति में शामिल होने के पक्ष में है क्योंकि उसे लगता है कि जेपीसी की जांच के दौरान पार्टी और व्यापक विपक्ष की आलोचना दर्ज कराना जरूरी है। दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इसे ‘तमाशा’ बताकर समिति से बाहर रहने की घोषणा की है। इन दोनों दलों ने अपने गुट के भीतर अलग विचार को सार्वजनिक करने का विकल्प चुना है। अब इस लाइन पर शिवसेना भी विचार कर रही है। कभी गुट की सहयोगी रही आम आदमी पार्टी ने भी जेपीसी से दूर रहने का फैसला किया है। वहीं, वामपंथी दल जेपीसी में शामिल होने के पक्ष में हैं। कांग्रेस नेता डीएमके, एनसीपी-सपा, आरजेडी और जेएमएम जैसे अन्य सहयोगियों से बात करके उन्हें भी इसमें शामिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
कम से कम अब तो विपक्ष को विरोध के स्वर थाम कर इस गंभीर विषय पर समुचित विचार-विमर्श करना चाहिए। आखिर ऐसी कोई व्यवस्था क्यों नहीं होनी चाहिए कि उच्च पदों पर बैठे लोगों की गंभीर मामलों में गिरफ्तारी अथवा उन्हें हिरासत में लिए जाने पर उनके लिए पद छोड़ना अनिवार्य बन जाए? आखिर ऐसी किसी व्यवस्था में समस्या क्या है?
क्या इसकी अनदेखी कर दी जाए कि महत्वपूर्ण पदों पर बैठे व्यक्तियों पर गंभीर आरोप लगते हैं और कई बार प्रथम दृष्ट्या वे सही भी दिखते हैं लेकिन कोई इस्तीफा देने की पहल नहीं करता। एक समय ऐसा ही होता था। इस संदर्भ में गृहमंत्री अमित शाह ने स्वयं अपना उदाहरण दिया कि जब उन्हें गुजरात के मंत्री रहते गिरफ्तार किया गया था तो उन्होंने त्यागपत्र दे दिया था। क्या ऐसा अन्य नेताओं को नहीं करना चाहिए? दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में अरविंद केजरीवाल ने जेल में रहते हुए भी इस्तीफा नहीं दिया था। जमानत मिलने के बाद वे तब इस्तीफा देने को बाध्य हुए, जब बतौर मुख्यमंत्री उनके लिए कार्य करना कठिन हो गया। क्या विपक्ष यह चाहता है कि राजनीति में शुचिता और नैतिकता की स्थापना के लिए कुछ भी न किया जाए? अतः यह जरूरी है कि सभी दल सही सोच के साथ राजनीति में शुचिता और नैतिकता लाने के लिए समग्र प्रयास करें। यही देशिहत में भी है।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation