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पश्चिम एशिया संकटः विदेशी मुद्रा बचाने के पीएम ने सुझाए 7 उपाय… देश हित की बात, खुद से शुरुआत

पीएम मोदी की सलाह मानी तो भारत बचा सकता है 45 अरब डॉलर

by ब्लिट्ज़ इंडिया
May 23, 2026
in the blitz
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विनोद शील

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत दिनों 24 घंटे में दो बार (10 व 11 मई); देशवासियों से एक वर्ष तक तेल बचाने, सोने की खरीद टालने और विदेश यात्रा कम करने की अपील करते हुए विदेशी मुद्रा बचाने के लिए 7 उपाय सुझाए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने देशहित की बात करते हुए खुद से इस पर अमल भी शुरू कर दिया। पीएम ने निर्देश दिया है कि अब उनके काफिले में न केवल गाड़ियों की संख्या आधी होगी बल्कि इलेक्टि्रक वाहनों (ईवी) की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम से विदेशी मुद्रा भी बचेगी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह एक बड़ा कदम भी होगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि जब नेतृत्व खुद उदाहरण पेश करता है तो पूरा देश बदलाव की राह पर चल पड़ता है।

पीएम ने कहा कि जैसे देश ने मिलकर कोरोना संकट का सामना किया था, वैसे ही मौजूदा संकट से भी बाहर निकल जाएंगे। उन्होंने कहा, कोरोना काल में हमने वर्क फ्रॉम होम, वर्चुअल मीटिंग, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और अन्य तरीके विकसित किए थे। समय की मांग है कि उन तरीकों को फिर से अपनाया जाए।

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पीएम मोदी ने कहा कि स्कूल ऑनलाइन हों और कंपनियां वर्क फ्रॉम होम दें। इससे पहले मंत्रियों ने भी पीएम की अपील को दोहराया और लोगों से न घबराने की अपील की। साथ ही भरोसा दिया कि देश में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और शीर्ष उद्योगपतियों ने भी कहा कि यह प्रधानमंत्री का कठिन वैश्विक दौर में ऊर्जा संरक्षण के प्रति बड़ा संदेश है। आम लोगों ने भी सहमति जताते हुए पीएम की बातों को अपनाने की बात कही है।

वैसे ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी प्रधानमंत्री ने देशवासियों से मितव्ययिता बरतने की अपील की हो। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस के शासन काल में ही पंडित जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और पी चिदंबरम भी इस तरह की अपील जनता से अपने-अपने कार्यकाल के दौरान कर चुके हैं। हालांकि हमेशा की तरह विपक्ष, विशेष कर कांग्रेस को पीएम की यह राय रास नहीं आई और उसने हंगामा खड़ा कर दिया है। वैसे तो पश्चिम एशिया में युद्ध के संकट के बावजूद भारत में स्थिति सामान्य है लेकिन जब प्रधानमंत्री मोदी ने ये सुझाव दिए तो विपक्ष इसे सरकार की नाकामी कहने लगा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि पांच राज्यों के चुनाव की वजह से सरकार ने जानबूझकर संकट पर आंख मूंदे रखीं। अब सवाल यह है कि क्या प्रधानमंत्री की सलाह के बहाने विपक्ष मौका ढूंढ़ रहा है अथवा क्या ये सलाह बड़े काम की है? आइए इसे इन तथ्यों से जानने की कोशिश करते हैं।

विदेश यात्रा और सोने की खरीद रोकने से होगा बड़ा फायदा

इसमें कोई संदेह नहीं कि वैश्विक युद्ध और महंगे कच्चे तेल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से ईंन्धन, विदेशी सामान और विदेश यात्राओं पर संयम बरतने की अपील की है। एक विश्लेषण के मुताबिक अगर लोग और कंपनियां इस सलाह को गंभीरता से अपनाते हैं तो भारत हर साल करीब 45 अरब डॉलर से ज्यादा विदेशी मुद्रा बचा सकता है।

यह रकम देश की आर्थिक मजबूती के लिए बड़ा सहारा बन सकती है। भारत अब हर डॉलर बचाने की रणनीति पर काम करता दिखाई दे रहा है। पीएम मोदी की हालिया अपील केवल ईंन्धन बचाने तक सीमित नहीं बल्कि देश की आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ी हुई मानी जा रही है। आम लोगों की छोटी-छोटी आदतों में बदलाव भी देश की अर्थव्यवस्था को बड़े संकट से बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

अपील के पीछे क्या है बड़ी चिंता?
पीएम ने हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान लोगों से पेट्रोल, डीजल और गैस जैसी आयातित चीजों का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में ऊर्जा की बचत करना बेहद जरूरी है।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि अगर देश आयातित वस्तुओं की खपत कम करता है तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और युद्ध जैसी परिस्थितियों का असर भी कम पड़ेगा।

तेल, सोना और खाद पर कटौती से होगी भारी बचत
विश्लेषण के मुताबिक अगर भारत कच्चे तेल के आयात में केवल 10 फीसदी की कमी लाता है तो करीब 13.5 अरब डॉलर की बचत हो सकती है। इसी तरह अगर लोग सोने की खरीदारी 10 फीसदी कम कर दें तो लगभग 7.2 अरब डॉलर देश में ही बच जाएंगे। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया था।

वहीं खाद्य तेलों के आयात में 10 फीसदी कटौती करने से करीब 1.95 अरब डॉलर बच सकते हैं। सबसे बड़ी बचत उर्वरक यानी खाद के आयात में कमी से हो सकती है। अगर रासायनिक खाद का उपयोग आधा कर दिया जाए तो देश लगभग 7.3 अरब डॉलर बचा सकता है। इन चार क्षेत्रों में थोड़ी सी कटौती से कुल मिलाकर करीब 30 अरब डॉलर की बचत संभव बताई गई है।

विदेश यात्रा रोकने से भी मिलेगा बड़ा फायदा
प्रधानमंत्री मोदी ने विदेश में शादी, छुट्टियां मनाने और घूमने की बढ़ती आदत पर भी चिंता जताई। उन्होंने लोगों से कम से कम एक साल तक विदेश यात्रा टालने की अपील की। आंकड़ों के अनुसार लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम यानी एलआरएस के तहत वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 28.8 अरब डॉलर विदेश भेजे गए। माना जा रहा है कि इसका बड़ा हिस्सा विदेश यात्रा और छुट्टियों पर खर्च हुआ। अगर एक साल तक इस तरह का खर्च रोक दिया जाए तो करीब 15.8 अरब डॉलर भारत के भीतर ही रह सकते हैं। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा और रुपये को मजबूती मिल सकती है।

विदेशी मुद्रा भंडार व रुपये पर बढ़ रहा दबाव
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मई के पहले सप्ताह में घटकर 690.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया। वहीं डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड गिरावट के साथ 95.17 तक पहुंच गया। इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। फरवरी में जहां भारत लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल की दर से तेल खरीद रहा था, वहीं मई में यह कीमत बढ़कर 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। लगातार तीसरे महीने तेल की कीमतें 100 डॉलर के आसपास बनी हुई हैं। इससे भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ रहा है और सरकार की चिंता भी बढ़ती जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर लोग थोड़ी सावधानी बरतें और अनावश्यक खर्च कम करें तो इसका बड़ा आर्थिक असर दिखाई दे सकता है। भारत हर साल बड़ी मात्रा में तेल, सोना, खाद और खाद्य तेल आयात करता है। केवल इन चार चीजों का आयात देश के कुल आयात बिल का करीब 31 फीसदी हिस्सा है। ऐसे में थोड़ी भी कमी अरबों डॉलर की बचत करा सकती है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगर देश लंबे समय तक आत्मनिर्भरता और सीमित विदेशी खर्च की नीति अपनाता है तो भविष्य में वैश्विक संकटों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर कम पड़ेगा। फिलहाल सरकार की कोशिश यही है कि आर्थिक दबाव को कम किया जाए और विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखा जाए।

पीएम ने गत सोमवार यानी 11 मई की शाम वड़ोदरा में कहा कि जैसे देश ने मिलकर कोरोना संकट का सामना किया था, वैसे ही मौजूदा संकट से भी बाहर निकल जाएंगे। इससे पहले मंत्रियों ने पीएम की अपील को दोहराया और लोगों से न घबराने की अपील की। साथ ही, भरोसा दिया कि देश में पेट्रोल, डीजल या एलपीजी की कोई कमी नहीं है।

क्या हैं 7 उपाय

1 तेल खपत कम करें, पार्सल रेल से भेजें
2 कार पूल और सार्वजनिक वाहनों का प्रयोग करें
3 एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचें
4 विदेश घूमने जाना कम करें
5 घर से ही काम करें
6 केमिकल फर्टिलाइजर का प्रयोग कम करें
7 खाद्य तेलों का उपयोग कम करें

पहले भी की गईं हैं ऐसी अपील

जवाहरलाल नेहरू (1962)

अवसर: 1962 के भारत-चीन युद्ध।

अपील: युद्ध के समय संसाधनों की कमी को देखते हुए नेहरू ने देशवासियों से सोना दान करने, चावल व अन्य खाद्यान्नों का उपभोग कम करने की अपील की थी।

लाल बहादुर शास्त्री (1965)

अवसर: 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध।

अपील: शास्त्री जी ने देशवासियों से हफ्ते में एक दिन (सोमवार की शाम) उपवास रखने की अपील की थी।

नेतृत्व: उन्होंने इस अपील का पालन करने से पहले खुद अपने घर से एक समय का भोजन छोड़ना शुरू किया था।

पी चिदंबरम (2013)

अवसर: 2013 में यूपीए-2 सरकार के दौरान जब देश चालू खाता घाटे (करंट अकाउंट डेफिसिट) और सोने के भारी आयात के कारण आर्थिक दबाव में था।

अपील: तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने विदेश मुद्रा बचाने के लिए देशवासियों से सोना न खरीदने या सोने की खरीदारी कम करने की अपील की थी।

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