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‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर तालिबान के रुख से पाक को लगी मिर्ची

by ब्लिट्ज़ इंडिया
May 15, 2025
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। पाकिस्तान में आतंकी संगठनों के ठिकानों पर भारत के हमले के बाद तालिबान की तरफ से जो बयान आया, पाकिस्तान को जिसकी दूर-दूर तक उम्मीद नहीं थी। पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के कई पुराने दोस्त उससे किनारा कर गए और कई तो खुलेआम भारत के साथ आ गए। अब अफगान तालिबान के नेता ने जो कहा उससे पाकिस्तान तिलमिला गया है। अब्दुल सलाम जईफ ने कहा कि पश्तूनों को इस पूरे मसले से दूर रहना चाहिए। सलाम के इस बयान से जहां पाकिस्तान को बुरी तरह मिर्ची लग गई है, वहीं अफगानिस्तान में उनके इस बयान की तारीफ की जा रही है। कुल मिलाकर सलाम ने पाकिस्तान का साथ न देकर एक तरह से भारत के पक्ष में स्टैंड लिया है।
तालिबान नेता का ये बयान पाकिस्तान को मिर्ची लगाने वाला इसलिए है क्योंकि खैबर पख्तूनख्वा की बड़ी आबादी पश्तूनों की है, जिसने पहले से ही पाकिस्तान की सेना के साथ जंग का एलान कर रखा है। खैबर पख्तूनख्वा पहले से ही पाकिस्तान के लिए सिरदर्द रहा है और पहलगाम आतंकी हमले के बाद खैबर पख्तूनख्वा की मस्जिदों से भारतीय सेना का साथ देने का एलान किया गया है। अब्दुल सलाम जईफ अफगान तालिबान के प्रमुख नेताओं में से एक रहे हैं। वे तालिबान शासन के दौरान पाकिस्तान में अफगान राजदूत भी रह चुके हैं। लेकिन अब उनका एक बयान पाकिस्तान के लिए कड़वी गोली बन गया है।
तालिबान ने पाकिस्तान को दिया जोरदार झटका
सलाम जईफ ने इस बयान के जरिए साफ-साफ संकेत मिलता है कि जो कुछ भी भारत और पाकिस्तान के बीच हो रहा है, उसमें अफगानिस्तान या विशेष रूप से पश्तून समुदाय को बीच में नहीं पड़ना चाहिए। उनके इस बयान से तालिबान का भारत के प्रति नरम रूख का संकेत मिलता है। वहीं पश्तूनों को अलग करने का अर्थ है पाकिस्तान की पश्चिमी सीमाओं पर अस्थिरता, जो पाकिस्तान के जख्म पर नमक और मिर्च रगड़ने जैसा है।
पाकिस्तान के इस्लामिक नैरेटिव को झटका
पाकिस्तान, जो लंबे समय से अफगान तालिबान को एक ‘स्ट्रैटजिक प्रॉपर्टी’ मानता आया है, उसके लिए तालिबान अब बहुत बड़ा सिरदर्द बन गया है। इससे पाकिस्तान के इस्लामिक नैरेटिव को भी जोरदार झटका लगा है।
खासकर अफगानों के बीच भारत की लोकप्रियता काफी ज्यादा है और पाकिस्तान दावा करता है कि अफगान सीमा से आए आतंकी पाकिस्तान में हमले करते हैं, लिहाजा ये शहबाज शरीफ के लिए जोरदार झटका है। भारतीय अधिकारियों ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद तालिबान के नेताओं से मुलाकात की थी।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पहलगाम आतंकी हमले के बाद तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्ताकी ने विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव आनंद प्रकाश की अध्यक्षता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की थी। इस दौरान तालिबान ने आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की थी और उन्होंने आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के लिए भारत का समर्थन किया था। हाल के महीनों में काबुल में तालिबान शासन के साथ भारत के संबंधों में नाटकीय रूप से सुधार हुआ है, जो अगस्त 2021 में इस डर के विपरीत है, कि तालिबान द्वारा काबुल पर कब्जा करने के बाद, अफगानिस्तान भारत विरोधी तत्वों का अड्डा बन सकता है।

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