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सुप्रीम कोर्ट में फिर उठी एनटीए को खत्म करने की मांग

by ब्लिट्ज़ इंडिया
June 2, 2026
in the blitz
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और एग्जाम कैंसिल होने के बाद देशभर में एनटीए के खिलाफ गुस्सा देखने को मिल रहा है। 2021, 2024 और अब 2026 में फिर से नीट परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक की घटनाओं से युवाओं और अभिभावकों में नाराजगी का महौला है। एक तरफ एनटीए ने नीट की नई एग्जाम डेट जारी कर दी है। वहीं दूसरी तरफ एनटीए को खत्म करने की मांग सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। कुछ दिनों में यह दूसरी बार है जब एनटीए को खत्म करने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है।

एक और याचिका

अंडरग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम यानी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट यूजी) 2026 के संचालन में कथित सिस्टमैटिक फेलियर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दूसरी याचिका दायर की गई है। याचिका में नीट एग्जाम कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मौजूदा स्वरूप को भंग करने की मांग की गई है।

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यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को उसके मौजूदा स्वरूप में भंग करने की मांग की है। यह मांग पेपर लीक के कथित विवाद और उसके बाद परीक्षा रद होने के चलते की गई है। यह याचिका यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट नामक एक पंजीकृत संगठन ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि नीट यूजी के आयोजन में ‘सिस्टेमैटिक और कैट्रोफिक फेलियर’ हुआ है। साथ ही एग्जाम सिस्टम में स्ट्रक्चरल रिफॉर्म की मांग गई है। इससे पहले, फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने नीट यूजी को ‘सिस्टेमैटिक फेलियर’ बताते हुए एनटीए के खिलाफ अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में एनटीए को खत्म करके न्यायिक निगरानी में परीक्षा फिर से आयोजित करने की मांग की गई है। दायर याचिका में एक हाई लेवल कमेटी का गठन करने की मांग की गई है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर जज को सौंपी जाए। इस कमेटी में एक साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट और एक फोरेंसिक साइंटिस्ट को भी शामिल करने की मांग की गई है।

इस संस्था ने कोर्ट से नीट एग्जाम के लिए हाई-लेवल कमेटी नियुक्त करने की गुहार लगाई। वकील तन्वी दुबे ने कहा, ‘हमने यह भी गुहार लगाई है कि अदालत (सुप्रीम कोर्ट) द्वारा एक हाई-लेवल कमेटी नियुक्त की जाए, जो परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था के कामकाज पर नजर रखे, और यह सुनिश्चित करे कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो। इस तरह की व्यवस्थागत विफलताएं दोबारा न हों।’

नीट एडमिट कार्ड 14 जून को

नीट एडमिट कार्ड 14 जून को आधिकारिक वेबसाइट neet.nta.nic.in पर जारी होगा। नीट एग्जाम के लिए फिर से रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। इसके अलावा जो उम्मीदवार 3 मई को हुई नीट परीक्षा में बैठे थे, एनटीए उनकी फीस वापस करेगी।

पेपर लीक का खुलासा करने वाले टीचर ने सुनाई कहानी

नीट पेपर लीक मामले में सीबीआई की जांच तेज हो गई है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, देहरादून, हरियाणा समेत कई राज्यों में पेपर लीक के तार जुड़े हैं। इस केस की गुत्थी सुलझाते हुए सीबीआई की टीम प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और सीनियर टीचर मनीषा गुरुनाथ मांधरे तक पहुंची है, जिन्हें नीट पेपर लीक कांड का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। इस बीच उस टीचर का वीडियो सामने आया है जिन्होंने पहली बार नीट पेपर लीक का खुलासा किया था और एनटीए को इसकी सूचना दी थी।

खुलासा पहली बार कैसे हुआ?

व्हिसिलब्लोअर शशिकांत सुथार का वीडियो सामने आया है। न्यूज एजेंसी को उन्होंने एक इंटरव्यू में शुरुआत से पूरी जानकारी दी है। उन्होंने कहा, ‘3 मई को परीक्षा होने और अपने छात्रों के लिए पेपर हल करने के बाद, मैं एक परिचित व्यक्ति से मिला। उस व्यक्ति ने मुझे एक पीडीएफ दिखाई जिसमें केमिस्ट्री के कुछ सवाल थे। जब मैंने उस पीडीएफ डॉक्यूमेंट के 45 सवालों का मिलान नीट-यूजी पेपर में दिए गए सवालों से किया, तो मैं हैरान रह गया, क्योंकि सभी 45 सवाल हूबहू मिल रहे थे। हमने एक शिक्षक से बायोलॉजी के 90 सवालों का मिलान भी नीट परीक्षा के पेपर से करने को कहा, वे सवाल भी मिल गए।’

गैस पेपर क्यों कहा जा रहा है?
टीचर शशिकांत ने बताया कि जिस पीडीएफ में नीट यूजी एग्जाम आए सवाल हूबहू मैच हो रहे थे उसमें काफी सवाल थे। उन्होंने कहा, ‘दोनों ही पीडीएफ में काफी ज्यादा सवाल थे, इसलिए हम उसे ‘गैस पेपर’ मान सकते हैं।’

एनटीए को नीट पेपर लीक की सूचना देने के बाद क्या हुआ?

व्हिसिलब्लोअर टीचर कहते हैं, ‘नीट पेपर लीक का पता चलने के बाद हमने एक-दो दिन सबूत जुटाए। सभी सबूतों के साथ एनटीए से कॉन्टेक्ट किया। हमने 7 मई की देर रात एनटीए को ईमेल किया था और 8 मई को सुबह से ही हमारे पास फोन और मैसेज आने शुरू हो गए थे। उन्होंने फास्ट ट्रैक तरीके से काम किया। शाम तक हमारे पास एनटीए की टीम पहुंच गई थी। इसके बाद इस मामले में एसओजी आई और उन्होंने भी बहुत तेजी से काम किया। इसके बाद इसमें सारी चीजें निकलकर आईं। देश में पहली बार ऐसा हुआ होगा कि किसी पेपर में तीन दिन पहले उसकी जांच शुरू होती है और चौथे दिन उसे पेपर लीक मानकर और री-नीट अनाउंस कर दिया जाता है। इसमें सीकर पुलिस से लेकर एनटीए का अहम भूमिक रही है और बच्चों की मेंटल हेल्थ को ध्यान रखते हुए बहुत तेज काम किया।’

शशिकांत सुथार ने कहा, ‘टीचर होने के नाते मैं यह नहीं सोच सकता था कि एक टीचर ऐसा करेगा। कुछ टीचर की वजह से पूरा शिक्षक समाज बदनाम होता है। सभी शिक्षक साथियों से आग्रह करना चाहूंगा कि भविष्य में ऐसी चीजें न हो। क्योंकि हम जिन बच्चों को मेहनत करने की राय देते हैं, उन बच्चों की मेहनत जाया जाती है। बतौर शिक्षक, हमारा भारत देश अच्छे डॉक्टर या विद्यार्थी देने का दावा करता है। ऐसी चीजें भविष्य में न हों, मैं इसकी कामना करता हूं।’

कौन हैं कुलकर्णी व मनीषा?

प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी केमिस्ट्री पढ़ाते हैं और मनीषा मांधरे बॉटनी, जूलॉजी के सवालों का अनुवाद करने की एक्सपर्ट थीं। इसी वजह से उनकी पहुंच एनटीए के नीट क्वेश्चन पेपर तक थी और इसकी का फायदा उठाकर उन्होंने पीवी कुलकर्णी और मनीष वाघमारे के साथ मिलकर नीट पेपर लीक को अंजाम दिया।

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