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मोदी कैबिनेट से बाहर हो सकते हैं ये 6 मंत्री: 9 नए चेहरों के शामिल होने की सुगबुगाहट

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मोदी कैबिनेट से बाहर हो सकते हैं ये 6 मंत्री: 9 नए चेहरों के शामिल होने की सुगबुगाहट

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 13, 2026
in the blitz
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मोदी कैबिनेट से बाहर हो सकते हैं ये 6 मंत्री: 9 नए चेहरों के शामिल होने की सुगबुगाहट

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।धर्मेंद्र प्रधान और हरदीप सिंह पुरी की मोदी कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का मंत्रालय बदले जाने और आरबीआई के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास को नया वित्तमंत्री बनाए जाने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक, मोदी मंत्रिमंडल में ये बड़ा फेरबदल अगले कुछ हफ्ते में हो सकता है।

1. धर्मेंद्र प्रधान, शिक्षा मंत्री

ये हैं कौन ः संघ और विद्यार्थी परिषद के बैकग्राउंड वाले धर्मेंद्र प्रधान 2 बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। अभी ओडिशा के संबलपुर से लोकसभा सांसद और पिछले 12 साल से मोदी सरकार में मंत्री। जुलाई 2021 से शिक्षा मंत्री हैं।

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क्यों हटाए जा सकते हैं: धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षामंत्री रहते 5 बड़ी लापरवाहियां हुईं- 2026 में नीट पेपर लीक, सीबीएसई बोर्ड की कॉपी चेकिंग में गड़बड़ी, यूजीसी इक्विटी गाइडलाइन्स, 2024 में यूजीसी-नेट पेपर लीक और 2020 में आई नई शिक्षा नीति के लागू होने में देरी। इसके चलते केंद्र सरकार बार-बार बैकफुट पर दिखी।

मोदी कैबिनेट से बाहर हो सकते हैं ये 6 मंत्री: 9 नए चेहरों के शामिल होने की सुगबुगाहट

2. हरदीप सिंह पुरी, पेट्रोलियम मंत्री

ये हैं कौन ः 1974 बैच के रिटायर्ड आईएफएस अफसर हरदीप सिंह पुरी 2014 में बीजेपी से जुड़े। 2 बार राज्यसभा सांसद बने। सितंबर 2017 से केंद्रीय मंत्री हैं। अभी इनके पास पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय है।

क्यों हटाए जा सकते हैं: सेक्स स्कैंडल ‘एपस्टीन फाइल्स’ में पुरी का नाम जुड़ा। फरवरी में कांग्रेस ने दावा किया कि 2014-17 के बीच पुरी ने जेफरी एपस्टीन से 62 ईमेल एक्सचेंज किए और 14 मीटिंग्स कीं। उन्हें हटाने की एक वजह उनकी उम्र भी हो सकती है। 74 साल के पुरी पिछले 9 साल से मंत्री हैं।

3. रवनीत सिंह बिट्टू, रेल राज्यमंत्री
ये हैं कौन ः पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू कांग्रेस में 3 बार लोकसभा सांसद बने। मार्च 2024 में बीजेपी से जुड़े। फिर राज्यमंत्री बने। अगस्त 2024 में राजस्थान से राज्यसभा पहुंचे।

क्यों हटाए जा सकते हैं : 3 जून को बिट्टू ने अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में उतरने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने कहा, ‘मैंने लोकसभा और राज्यसभा में 17 साल पूरे कर लिए हैं। मैंने अपना सामान पैक कर लिया है और पंजाब जाने के लिए पूरी तरह तैयार हूं।’

4 जून को बीजेपी ने राज्यसभा के लिए 11 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। इसमें बिट्टू का नाम नहीं था। 21 जून 2026 को उनका राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो गया। बिट्टू बीजेपी को पंजाब की सत्ता तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं। लुधियाना की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।

4. पंकज चौधरी, वित्त राज्यमंत्री
ये हैं कौन ः उत्तर प्रदेश की महाराजगंज सीट से 7 बार के लोकसभा सांसद पंकज चौधरी जुलाई 2021 से वित्त राज्यमंत्री हैं। दिसंबर 2025 में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया।

क्यों हटाए जा सकते हैं : बीजेपी की इंटरनल पॉलिसी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के चलते चौधरी को मोदी कैबिनेट से मुक्त किया जा सकता है, ताकि 2027 यूपी विधानसभा और 2029 लोकसभा चुनाव के लिए उनका पूरा फोकस संगठन और इलेक्शन मैनेजमेंट पर रहे।
5. हर्ष मल्होत्रा, सहकारिता राज्यमंत्री

ये हैं कौन ः 2015-16 में पूर्वी दिल्ली नगर निगम के महापौर बने। 2024 में पूर्वी दिल्ली से सांसद और मोदी कैबिनेट में राज्यमंत्री बने। मई 2026 में दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष बने।

क्यों हटाए जा सकते हैं ः बीजेपी की ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति के तहत 62 साल के मल्होत्रा को कैबिनेट से हटाया जा सकता है।

6. जॉर्ज कुरियन, अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री

ये हैं कौन ः सुप्रीम कोर्ट में वकील रहे। जून 2024 में मोदी सरकार में राज्य मंत्री बने। अल्पसंख्यक कार्य और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय का जिम्मा संभाला। अगस्त 2024 में मध्यप्रदेश से राज्यसभा पहुंचे।

क्यों इस्तीफा दिया : 23 जून को मोदी कैबिनेट के इकलौते ईसाई मंत्री कुरियन ने इस्तीफा दे दिया। इसकी एक वजह अप्रैल-मई में हुआ केरलम विधानसभा चुनाव भी है। बीजेपी को उम्मीद से कमतर नतीजे मिले। 65 साल के कुरियन ने भी चुनाव लड़ा, लेकिन ‘कंजिराप्पल्ली’ सीट पर वे तीसरे नंबर पर रहे।

इनकी हो सकती एंट्री

1. शक्तिकांत दास

ये हैं कौनः तमिलनाडु कैडर के 1980 बैच के रिटायर्ड आईएएस अफसर शक्तिकांत दास पीएम मोदी के प्रधान सचिव-2 हैं। आर्थिक मामलों के सचिव, राजस्व सचिव, 15वें वित्त आयोग के सदस्य, जी20 शेरपा और 2018 से 2024 तक आरबीआई के गवर्नर रह चुके हैं।

एंट्री क्यों हो सकती है : मोदी सरकार के बड़े आर्थिक फैसले- नोटबंदी और जीएसटी लागू करने में दास की अहम भूमिका रही। बतौर आरबीआई गवर्नर 3 बार कार्यकाल विस्तार मिलना उन पर मोदी सरकार के भरोसे का सबूत है।

इस दौरान दास ने भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखा, डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा दिया और बैंकिंग रेगुलेशन मजबूत किया। सरकार को उम्मीद है कि प्रशासनिक और आर्थिक समझ रखने वाले दास वित्तीय स्थिति को मजबूत करेंगे।

2. अनुराग ठाकुर

ये हैं कौन ः हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के बेटे हैं। बीसीसीआई के अध्यक्ष रहे। हमीरपुर लोकसभा सीट से लगातार 5वीं बार सांसद बने।

एंट्री क्यों हो सकती है: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अनुराग राज्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। तब बतौर सूचना एवं प्रसारण मंत्री उनका रिपोर्ट कार्ड अच्छा था।

अगले साल हिमाचल में विधानसभा चुनाव है। बीजेपी चाहती है कि अनुराग के बूते युवा वोटर्स को लामबंद करके मौजूदा कांग्रेस सरकार को हटाकर भाजपा सत्ता में आए।

3. वीडी शर्मा

ये हैं कौन ः मध्यप्रदेश से आने वाले वीडी शर्मा पुराने स्वयंसेवक माने जाते हैं। 3 दशकों तक आरएसएस और ABVP में काम किया। 2013 में बीजेपी में एक्टिव हुए। 2020 से 2025 तक बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रहे। अभी खजुराहो से लगातार दूसरी बार सांसद हैं।

एंट्री क्यों हो सकती है : मध्यप्रदेश के ज्यादातर राष्ट्रीय नेताओं को राज्य की राजनीति तक सीमित कर दिया गया है। जैसे- नरेंद्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, प्रह्लाद सिंह पटेल।

55 साल के वीडी शर्मा को केंद्र में मंत्री पद देकर बीजेपी मध्यप्रदेश से अगली पीढ़ी के राष्ट्रीय नेता तैयार करना चाहती है।

पार्टी में वीडी की छवि मजबूत संगठनकारी नेता की है। उनके अध्यक्ष रहते बीजेपी ने 2024 में मध्यप्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटें जीतीं।

4. तरुण चुग

ये हैं कौन ः पंजाब के अमृतसर से आते हैं। आरएसएस का बैकग्राउंड है। 2 बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीते नहीं। 2018 से वे बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं।

एंट्री क्यों हो सकती है : हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने पंजाब के कोटे से चुग को मध्यप्रदेश से उतारा और वे जीते भी। चुग को रवनीत सिंह बिट्टू की जगह राज्यसभा सीट मिली और अब मंत्री पद भी मिल सकता है।

5. राघव चड्ढा

ये हैं कौन ः चार्टर्ड अकाउंटेंट से नेता बने। अरविंद केजरीवाल के करीबी रहे। 2020 में दिल्ली के राजेंद्र नगर से विधायक और दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष बने। 2022 में पंजाब से राज्यसभा पहुंचे।

एंट्री क्यों हो सकती है : अप्रैल में राघव ने अाम आदमी पार्टी (आप) के 6 अन्य राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी जॉइन कर ली। बीजेपी की कोशिश है- अगले साल पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव में राघव के बूते आप को हराना।

दरअसल, पंजाब के पिछले विधानसभा चुनाव में राघव ने आप के लिए ग्राउंड वर्किंग और इलेक्शन मैनेजमेंट किया था। उन्हें आप की अंदरूनी बातें पता हैं। राघव बीजेपी के लिए पंजाब में एग्रेसिव कैम्पेन कर सकते हैं। शहरी इलाकों और जेन-जी वोटर्स में बीजेपी के लिए पैठ बना सकते हैं।

6. श्रीकांत शिंदे

ये हैं कौनः महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे हैं। कल्याण सीट से लगातार तीसरी बार सांसद।

एंट्री क्यों हो सकती है: शिवसेना (उद्धव गुट) के 6 लोकसभा सांसदों तोड़ने के लिए हुए ‘ऑपरेशन टाइगर’ में श्रीकांत ने अहम भूमिका निभाई। इनाम के तौर पर मंत्री पद मिल सकता है।

7. संजय दीना पाटिल

ये हैं कौन ः एनसीपी से राजनीति शुरू की। मुंबई की भांडुप से विधायक रहे। 2009 में उत्तर-पूर्वी मुंबई से लोकसभा सांसद बने। 2022 में शिवसेना (उद्धव) से जुड़े और 2024 में दोबारा लोकसभा सांसद बने।

एंट्री क्यों हो सकती है : ‘ऑपरेशन टाइगर’ के चलते पाटिल शिवसेना (शिंदे) में आए हैं। बागी होने के इनाम के तौर पर संजय को भी मंत्री पद मिल सकता है। इसके पीछे स्ट्रेटेजी है- शिवसेना (उद्धव) को और कमजोर करना, बीजेपी वाले ‘महायुति गठबंधन’ को मजबूत करना।

8. काकोली घोष दस्तीदार

ये हैं कौन ः डॉक्टर से नेता बनीं काकोली पश्चिम बंगाल की बारासात सीट से लगातार चौथी बार सांसद हैं। टीएमटी की संस्थापक सदस्य और पूर्व सीएम ममता बनर्जी की करीबी रहीं।

एंट्री क्यों हो सकती है: काकोली नेतृत्व में 20 टीएमटी सांसद बागी हो गए। वे एनसीपीआई से जुड़े और बीजेपी को सपोर्ट दिया। इस टूट के इनाम के तौर पर काकोली को मंत्री बनाया जा सकता है।

9. अरुण गोविल

ये हैं कौन ः ‘रामायण’ सीरियल में भगवान राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल। 2021 में वे बीजेपी से जुड़े। 2024 में उत्तर प्रदेश की मेरठ लोकसभा सीट से सांसद बने।

एंट्री क्यों हो सकती है: अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। सोशल इंजीनियरिंग के तहत गोविल को मंत्री बनाया जा सकता है। गोविल पश्चिमी यूपी के वैश्य समाज से आते हैं। उनके बूते बीजेपी हिंदुत्व और सांस्कृतिक मुद्दे को भुना सकती है।

इनका बदल सकता है मंत्रालय

1. निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री

ये हैं कौनः कर्नाटक से आने वाली निर्मला सीतारमण 2014 से राज्यसभा सांसद हैं। 2017 में वे रक्षा मंत्री बनीं। 2019 से वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री हैं।

मंत्रालय क्यों बदल सकता है: सरकार और भारत की माली हालात कुछ महीनों से ठीक नहीं है। महंगाई पिछले 16 महीने के ऊंचे स्तर पर 3.9% पर पहुंच गई है। जबकि पीएम मोदी का लक्ष्य है- भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी और ग्लोबल मैन्युफेक्चरिंग हब बनाना। सरकार को लग रहा है कि किसी टेक्नोक्रेट को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जाए। ऐसे में निर्मला की जगह आरबीआई गवर्नर रहे शक्तिकांत दास को लाया जा सकता है। निर्मला को शिक्षा मंत्रालय मिल सकता है।

2. ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री

ये हैं कौनः मध्यप्रदेश के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया 2020 में कांग्रेस से बीजेपी में आए। जुलाई 2021 में मोदी सरकार में मंत्री बने। नागरिक उड्डयन और दूरसंचार जैसे मंत्रालय संभाले। अभी उनके पास पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास और संचार मंत्रालय का जिम्मा है।

मंत्रालय क्यों बदल सकता है: सिंधिया ‘हाई-परफॉर्मिंग’ और डिलीवर करने वाले नेता माने जाते हैं। उनकी क्षमता और प्रभाव को देखते हुए उन्हें प्रमोट करने की तैयारी है। उन्हें रेल, वाणिज्य, उद्योग जैसा कोई अहम मंत्रालय मिल सकता है।

3. प्रह्लाद जोशी, नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री

ये हैं कौनः कर्नाटक बीजेपी के अध्यक्ष रहे प्रहलाद जोशी धारवाड़ से लगातार 5वीं बार सांसद हैं। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में संसदीय कार्य, कोयला और खनन मंत्री रहे। अभी वे नवीकरणीय ऊर्जा और उपभोक्ता मामलों के मंत्री हैं।

मंत्रालय क्यों बदल सकता है: जोशी के सांगठनिक और संसदीय अनुभव के मद्देनजर उन्हें किसी बड़े या ज्यादा राजनीतिक प्रभाव वाले मंत्रालय का जिम्मा मिल सकता है। 2028 में जोशी के गृह राज्य कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हैं, जहां बीजेपी को उम्मीदें हैं।

मोदी कैबिनेट में फेरबदल के होते हैं कुछ विशेष कारण

1. परफॉर्मेंस नहीं तो छुट्टी तय

कॉर्पोरेट कंपनियों की तरह मोदी सरकार में भी अगर कोई मंत्री उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता या उसके मंत्रालय से जुड़ा कोई विवाद खड़ा हुआ, तो बिना किसी हिचकिचाहट के उसकी छुट्टी कर दी जाती है।

‘मी टू’ मामले में घिरे विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने 2018 में इस्तीफा दिया था। 2021 में कोरोना महामारी के मिस-मैनेजमेंट के बाद तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को हटाया गया था।

बतौर आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद, शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को अच्छा प्रदर्शन न होने के कारण कैबिनेट से बाहर कर दिया गया था।

2. नौकरशाहों और एक्सपर्ट्स पर भरोसा

मोदी सरकार में सिर्फ पारंपरिक नेता ही मंत्री नहीं बनते, बल्कि जटिल और अहम मंत्रालयों का जिम्मा पूर्व आईएएस, आईएफएस अफसर या डोमेन एक्सपर्ट्स (टेक्नोक्रेट्स) को देने का चलन भी है। जैसे- पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर को विदेश मंत्री बनाना, पूर्व आईएएस अफसर अश्विनी वैष्णव को रेल और आईटी मंत्रालय सौंपना, पूर्व आईएएस अफसर अर्जुन राम मेघवाल और रिटायर्ड आईएफएस अफसर हरदीप सिंह पुरी को केंद्रीय मंत्री बनाना।

3. चुनावी राज्यों की इंजीनियरिंग

मोदी सरकार में ये पैटर्न रहा है कि हर कैबिनेट फेरबदल में अगले विधानसभा चुनावों की सोशल और इलेक्टोरल इंजीनियरिंग को सेट किया जाता है।
जुलाई 2021 में मोदी कैबिनेट का सबसे बड़ा फेरबदल हुआ। तब उत्तर प्रदेश के पंकज चौधरी, अजय मिश्रा टेनी, अनुप्रिया सिंह पटेल, एसपी सिंह बघेल, भानु प्रताप सिंह वर्मा, कौशल किशोर; गुजरात के महेंद्र मुंजापारा, दर्शना जरदोश, देवूसिंह चौहान जैसे नेताओं को मंत्री बनाया गया था। इसके पीछे 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव थे।

4. ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की पॉलिसी

बीजेपी बार-बार ये बात दोहराती है कि वे ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति अपनाती है। यानी कोई नेता सरकार और संगठन दोनों में एक साथ बड़े पद नहीं पा सकता।

जैसे- 2014 में राजनाथ सिंह गृहमंत्री बने, तो 2 महीने बाद बीजेपी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
2019 में जब अमित शाह गृहमंत्री बने, तो अगले ही महीने जगत प्रकाश नड्डा को भारतीय जनता पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया और 8 महीने बाद शाह ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। जनवरी 2026 में जब नितिन नबीन पार्टी अध्यक्ष बने, तो उन्हें बिहार सरकार में मंत्री पद छोड़ना पड़ा।

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