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नया भारत बड़े राजनीतिक, वैचारिक बदलाव का प्रतीक

by ब्लिट्ज़ इंडिया
June 14, 2026
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विनोद शील

नई दिल्ली। भारत आज एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पड़ाव की ओर बढ़ रहा है। देश को “नए और आत्मनिर्भर भारत” का संकल्प देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकतांत्रिक तरीके से लगातार सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले प्रधानमंत्री बन चुके हैं। पीएम मोदी का कार्यकाल केवल रिकॉर्ड का नहीं बल्कि स्वतंत्र एवं नए भारत की राजनीतिक और वैचारिक यात्रा में आए बड़े बदलाव का भी प्रतीक है।

प्रधानमंत्री मोदी को सत्ता संभाले हुए 12 साल पूरे हो चुके हैं। मोदी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। लगातार निर्वाचित प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी 4,399 और अभी जारी दिनों के कार्यकाल के साथ एक नया रिकॉर्ड बनाते जा रहे हैं।

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पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की राजनीतिक प्राथमिकताओं में एक स्पष्ट बदलाव दिखाई देता है। मोदी सरकार ने विकास और सांस्कृतिक पहचान को परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक के रूप में प्रस्तुत किया। पिछले एक दशक में सरकार ने भारतीय सभ्यता, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक प्रतीकों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में स्थापित करने का प्रयास किया है।

राम मंदिर से लेकर काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर तक

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का पुनर्विकास, महाकाल लोक परियोजना और वैश्विक मंचों पर भारत को ‘विश्वगुरु’ के रूप में प्रस्तुत करने जैसे कदम इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा हैं। सरकार का तर्क है कि उपनिवेशवाद की मानसिकता से पूर्ण मुक्ति तभी संभव है, जब देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों और ऐतिहासिक विरासत को आत्मविश्वास के साथ स्वीकार करे।

मतदाता की प्राथमिकताओं में परिवर्तन

विशेषज्ञों का मत है कि यह बदलाव केवल राजनीतिक नेतृत्व की सोच तक सीमित नहीं है बल्कि भारतीय मतदाता की प्राथमिकताओं में आए परिवर्तन को भी दर्शाता है। आज बड़ी संख्या में मतदाता साझा सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक गौरव को भी राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण तत्व मानते हैं।
आधुनिक विकास की अवधारणा की बात करें तो मोदी सरकार इसमें भी अग्रणी है।

डिजिटल इंडिया, अंतरिक्ष कार्यक्रम, बुनियादी ढांचा निर्माण और तकनीकी नवाचार को भी मोदी सरकार उतनी ही प्राथमिकता देती है। वर्तमान शासन मॉडल में आधुनिक तकनीक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को साथ-साथ लेकर आगे बढ़ाने का मूल मंत्र साफ नजर आता है। इसलिए मोदी का कार्यकाल केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक और वैचारिक यात्रा के दो महत्वपूर्ण अध्यायों के संगम का प्रतीक भी है।

अन्य बड़े बदलाव

गौर करें तो गत 12 सालों में देश में अनेक महत्वपूर्ण बदलाव हुए जिनके पीछे पीएम मोदी द्वारा एक के बाद एक लिए गए बड़े फैसले रहे जिनकी देश और दुनिया में खूब चर्चा हुई। सरकार ने जहां इन फैसलों को इच्छाशक्ति का परिणाम बताया तो विपक्ष ने हमेशा की तरह विरोध किया।

सरकार के फैसलों को जनता का भरपूर समर्थन मिलने का प्रमाण यही है कि आज देश के 29 में से 22 राज्यों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसके राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की सरकारें हैं। कभी बीजेपी के मात्र दो सांसद हुआ करते थे।

एक बड़ा बदलाव यह भी है कि इन 12 सालों में पीएम मोदी देश ही नहीं, दुनिया में एक मजबूत और लोकप्रिय नेता के रूप में स्थापित हो चुके हैं। उनकी ऐसी छवि बनी है कि वे कड़े फैसले लेने में हिचकते नहीं हैं। मोदी के फैसलों ने न सिर्फ देश की दिशा बदली बल्कि वैश्विक मंचों तक भारत की जबरदस्त छाप छोड़ी। कश्मीर में अलगाववाद और विद्रोह को चारा मुहैया कराने वाले अनुच्छेद 370 का खात्मा किया गया तो आतंकवाद पर भी नकेल कसी गई। मुस्लिम महिलाओं को भी तीन तलाक से आजादी दिलवाई गई।

इसमें कोई दोराय नहीं कि उथल-पुथल भरे वैश्विक माहौल एवं बाधाओं के बीच भी मोदी सरकार के फैसले निश्चित रूप से भारत को विकसित देशों की पंक्ति में खड़ा करने और भारत को “विकसित भारत@2047” के लक्ष्य को हासिल करने की ओर निरंतर अग्रसर कर रहे हैं। पीएम मोदी दुनिया को यह आश्वस्त करने में भी सफल रहे कि भारत कितना सक्षम है। यही नहीं, देश के आर्थिक ढांचे को भी सुदृढ़ बनाने का काम किया गया है। मोदी सरकार की दो शानदार पहल देश की अर्थव्यवस्था को आकार देंगी और समृद्धि का आधार भी तैयार करेंगी।

भारत सरकार का सेमीकंडक्टर मिशन

दशकों तक भारत ने सेमीकंडक्टरों का उपभोग तो किया पर उन्हें बनाया नहीं। दिसंबर 2021 में 76 हजार करोड़ रुपये के कोष और असाधारण रूप से उदार संरचना (केंद्र सरकार द्वारा 50 प्रतिशत और राज्य सरकार द्वारा 25 प्रतिशत तक की सब्सिडी, जो निर्माण लागत का 75 प्रतिशत तक कवर करती है) के साथ शुरू किए गए ‘भारत सेमीकंडक्टर मिशन’ के अंतर्गत अब तक छह राज्यों में दस परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इन परियोजनाओं में करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का कुल निवेश हुआ है। सरकार की योजना के मुताबिक 2026 के अंत तक चार संयंत्र चालू हो जाने चाहिए ताकि भारत 2029 तक दुनिया के शीर्ष पांच चिप इकोसिस्टम में शामिल हो सके।

यदि हम प्रस्तावित समय सीमा में काम पूरा कर लेते हैं तो इसका परिणाम क्रांतिकारी होगा। भारत अपनी सबसे महंगी रणनीतिक निर्भरताओं में से एक से मुक्त हो पाएगा जिससे हर साल अरबों डॉलर के आयात बिल में बड़ी कमी आएगी और रक्षा प्रणालियों से लेकर ऑटोमोबाइल तक; हर चीज को अगली वैश्विक चिप की कमी से बचाया जा सकेगा।

एफटीए से भारत को क्या मिलेगा

भारत को सालों तक संरक्षणवादी और मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से कतराने वाले देश के रूप में दर्शाया गया है पर पिछले दो साल इस लिहाज से परिवर्तनकारी रहे हैं। भारत-ब्रिटेन सीईटीए पर जुलाई 2025 में दस्तखत हुए। इससे द्विपक्षीय व्यापार में सालाना 34 अरब डॉलर की वृद्धि होने का अनुमान है। इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण बात जनवरी 2026 में भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुआ मुक्त व्यापार समझौता है । यह एफटीए करीब दो दशक की बातचीत के बाद संपन्न हुआ। इसे ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील’ कहा गया। इस समझौते से करीब दो अरब उपभोक्ता लाभान्वित होंगे। यह यूरोपीय संघ की ओर से किया गया अब तक का सबसे बड़ा समझौता है। ओमान, न्यूजीलैंड और फरवरी 2026 में संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अंतरिम ढांचे को जोड़ने के बाद, भारत के पास अब दर्जनों देशों के साथ एफटीए हैं। इसे व्यापार के क्षेत्र में मोदी सरकार अपनी सबसे बड़ी जीत कह सकती है।

इस दौरान भारत ने और भी कई परिवर्तन देखे हैं जिनका मूल गरीबों का कल्याण रहा है। इनमें प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, स्वच्छ भारत, पीएम आवास योजना और आयुष्मान भारत जैसी कई पहल शामिल हैं। ये सभी पहल लोगों को गरिमा और अवसर दिलाने के सरल उद्देश्य से प्रेरित हैं। स्वयं पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सहायता सीधे और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंच रही है।

उन्होंने कहा, इससे खामियों में कमी आई है, कार्यकुशलता में सुधार हुआ है और शासन में विश्वास मजबूत हुआ है। इसी तरह गरीब कल्याण को आगे बढ़ाने की यह यात्रा मानव सशक्तिकरण और विकसित भारत के हमारे सपने को साकार करने की दिशा में एक सामूहिक आंदोलन बन गई है।

नरेंद्र मोदी

हमारी सरकार के बीते 12 वर्ष विश्वास, विकास और जनकल्याण को समर्पित रहे हैं। 140 करोड़ देशवासियों के आशीर्वाद और राष्ट्र प्रथम की भावना से हमने युवाओं, महिलाओं और अपने किसान भाई-बहनों को सशक्त बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। यह हमारे अथक प्रयासों का ही परिणाम है कि डिजिटल क्रांति तक आज देश को दुनियाभर में एक नई पहचान मिली है। विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए हम सेवा, सुशासन और समृद्धि के इसी पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे।

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