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घर-घर टिफिन पहुंचाने वाली बेटी बनी एसडीएम

संघर्षों से हर संकट, चुनौती पर विजय पाकर रचा इतिहास

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 4, 2026
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घर-घर टिफिन पहुंचाने वाली बेटी बनी एसडीएम

ब्लिट्ज ब्यूरो

ऋषिकेश। परिस्थिति कितनी भी विषम क्यों न हों, अगर दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर कड़ी मेहनत से लक्ष्य को पाने में जुटा जाए तो असंभव कुछ भी नहीं है।

ऋषिकेश में बेहद सामान्य परिवार में रहने वाली मीनाक्षी भाटिया ने उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा में एसडीएम के पद पर चयनित होकर इस कथन को चरितार्थ कर दिखाया है। एक साल पहले मीनाक्षी की बड़ी बहन भी उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा में सफलता हासिल कर सांख्यिकी अधिकारी बनी थी।
ऐसे में मीनाक्षी की सफलता न सिर्फ युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है, बल्कि पुत्र मोह की मानसिकता पालने वाले समाज के लिए भी बड़ी सीख बनेगी।
प्रगति विहार निवासी मीनाक्षी भाटिया ने बताया कि वह दो साल पहले यूपीएससी की परीक्षा में इंटरव्यू दे चुकीं लेकिन पांच अंक से चयन से चूक गईं।
उन्होंने उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा पहली बार दी, जिसमें उनका चयन हो गया है। बताया कि उन्होंने 2020 में ऋषिकेश परिसर श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि से बीकॉम किया है जिसमें वह विवि में रैंक 1 गोल्ड मेडलिस्ट रह चुकी हैं।

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बताया कि दो वर्ष पहले उत्तराखंड पीसीएस में उनकी बड़ी बहन शिल्पा भाटिया का सांख्यिकी अधिकारी के पद पर चयन हुआ था, जिसके बाद वह भी उत्तराखंड पीसीएस की तैयारी के लिए प्रेरित हुईं। वर्तमान में शिल्पा भाटिया पौड़ी में तैनात हैं। नीलम भाटिया ने कहा कि उनकी दोनों बेटियों ने उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा में सफलता हासिल की है। कहा कि उनकी दोनों बेटियों ने उनका सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। यह उन लोगों के लिए भी सीख है जो बेटी की तुलना में बेटों को अधिक महत्व देते हैं।

संघर्ष से भरी है दोनों बहनों की कहानी

मीनाक्षी भाटिया और शिल्पा भाटिया की सफलता की कहानी संघर्ष से भरी है। मीनाक्षी ने बताया कि वे दोनों बहनें पढ़ाई के साथ अपनी मां नीलम भाटिया को टिफिन सेवा में पूरा सहयोग करती थीं। उनकी मां भोजन बनाती थी और दोनों बहनें पैदल लंबी दूरी नापकर टिफिन की होम डिलीवरी करती थीं। कुछ समय बाद पैसे जुटाकर उन्होंने स्कूटी खरीदी तो होम डिलीवरी में थोड़ा समय बचने लगा और उन्होंने उस समय को पढ़ाई में लगाया। मीनाक्षी ने बताया कि वह तहसील कर्मियों को भी टिफिन की डिलीवरी करने जाया करती थी।

यह गर्व की बात है कि अब उन्हें तहसील प्रशासन की कमान संभालने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि टिफिन सेवा के अलावा उनकी बहन शिल्पा ने ट्यूशन सेंटर भी शुरू किया था, वह भी ट्यूशन में क्लास देकर घर की आर्थिकी सुधारने में योगदान दिया करती थी। वह किराये के घर में रहती हैं। अब वह जल्द अपना घर खरीदेंगी।

डेढ़ साल की उम्र में पिता को खोया

मीनाक्षी भाटिया ने बताया कि वर्ष 2003 में उनके पिता का निधन हुआ, तब वह महज डेढ़ वर्ष की थी। उनकी बड़ी बहन साढ़े छह वर्ष की थी। उनके पिता आईएसबीटी ऋषिकेश में छोटी सी दुकान चलाते थे। पिता के जाने के बाद उनके पास कुछ नहीं बचा था। उनकी माता ने टिफिन सर्विस शुरू कर दो वक्त की रोटी की व्यवस्था की।

चार साल इंटरनेट से बनाई दूरी

मीनाक्षी ने अपनी स्ट्रेटेजी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने कई प्रमुख पुस्तकों से अध्ययन किया है। उन्होंने कोई कोचिंग नहीं की। उन्हें टेस्ट सीरीज से काफी मदद मिली। कहा कि वह चार साल से इंटरनेट से दूर रहीं। सिर्फ अति आवश्यकता में ही सीमित उपयोग किया।

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