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बड़ा भूकंप आया तो यूपी के दो शहरों में होगा सबसे ज्यादा नुकसान

आईआईटी, कानपुर की रिसर्च ने बढ़ाई चिंता

by ब्लिट्ज़ इंडिया
March 4, 2026
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ब्लिट्ज ब्यूरो

कानपुर। 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के झटके उत्तर प्रदेश तक महसूस किए गए थे। लोग दहशत में घरों से बाहर निकल आए थे, लेकिन उस घटना के बाद भी भूकंप जैसी आपदा को लेकर गंभीर तैयारी नहीं हो सकी। अब आईआईटी कानपुर की एक विस्तृत रिसर्च ने चिंता बढ़ा दी है।

संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार, गंगा के मैदानी क्षेत्रों खासकर कानपुर और प्रयागराज में यदि 6.5 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है, तो बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है। सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा के मुताबिक इन दोनों शहरों की जमीन में मौजूद मिट्टी में बालू की मात्रा अधिक है और उसके कण बेहद महीन हैं।

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लिक्विफेक्शन से सबसे बड़ा खतरा
रिसर्च में बताया गया है कि भूकंप के तेज झटकों से मिट्टी की मजबूती खत्म हो जाती है। जब जमीन के नीचे मौजूद पानी और सिल्ट वाली बालू आपस में मिलकर ऊपर की ओर आने लगते हैं, तो इस प्रक्रिया को लिक्विफेक्शन कहा जाता है। ऐसी स्थिति में इमारतों की नींव कमजोर पड़ जाती है और पक्के ढांचे धंस सकते हैं या गिर सकते हैं।

प्रोफेसर पात्रा ने बताया कि साल 1803 और 1934 में गंगा के मैदानी क्षेत्रों में आए बड़े भूकंपों के बाद भी लिक्विफेक्शन की घटनाएं दर्ज की गई थीं। यह क्षेत्र भूकंपीय फॉल्ट के प्रभाव क्षेत्र में भी आता है, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है।

30-40 मीटर गहराई तक असर संभव
आमतौर पर भूकंप के दौरान 8 से 10 मीटर की गहराई तक लिक्विफेक्शन का प्रभाव देखा जाता है, लेकिन कानपुर और प्रयागराज में यह असर 30 से 40 मीटर गहराई तक हो सकता है। रिसर्च के दौरान दोनों शहरों में 20-20 स्थानों से मिट्टी के नमूने लिए गए। कानपुर में गंगा बैराज के पास 70-80 मीटर गहराई तक बोरहोल से सैंपल इकट्ठे किए गए। इस अध्ययन में गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार में भी सर्वे किया गया। लखनऊ और वाराणसी के कुछ हिस्सों में भी लिक्विफेक्शन की संभावना का आकलन किया गया।

सिस्मिक जोन 3/4 में आते हैं दोनों शहर
कानपुर और प्रयागराज भूकंप के सिस्मिक जोन-3/4 में आते हैं और हिमालय से लगभग 300 किलोमीटर की परिधि में स्थित हैं। यहां की मिट्टी अपेक्षाकृत कमजोर है, इसलिए निर्माण कार्य के दौरान विशेष सावधानी और ग्राउंड इम्प्रूवमेंट तकनीक अपनाने की जरूरत बताई गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते शहरी नियोजन, निर्माण मानकों और भूकंपरोधी तकनीकों को लागू नहीं किया गया, तो भविष्य में बड़ा भूकंप इन शहरों के लिए भारी तबाही का कारण बन सकता है।

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