नई दिल्ली। इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी ) के इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत में ज्वेलरी बनाने के पारंपरिक हुनर को जिंदा रखना है तो स्कूल व कॉलेज लेवल की पढ़ाई में शामिल करना बहुत जरूरी है। ज्वेलरी इंडस्ट्री में युवाओं की कमी है और पहले के मुकाबले ज्वेलरी इंडस्ट्री में करियर बनाने वाले लोगों की संख्या कम हुई है।
दरअसल, कोलकाता में इंडस्ट्री के लीडर्स ने भारत के ज्वेलरी सेक्टर की लंबे समय तक ग्रोथ और इसकी कारीगरी की समृद्ध परंपरा को बनाए रखने के लिए फॉर्मल एजुकेशन को स्किल-बेस्ड ट्रेनिंग के साथ जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया।
ज्वेलरी इंडस्ट्री में युवाओं की कमी
एक्सपर्ट्स ने कहा कि कारीगर ज्वेलरी इंडस्ट्री की रीढ़ हैं, लेकिन युवा पीढ़ी को इस पेशे की ओर आकर्षित करना बड़ी चुनौती बन गई है। नेमीचंद बामलवा एंड संस के डायरेक्टर और इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईसीसी) में ज्वेलरी और लाइफस्टाइल पर नेशनल एक्सपर्ट कमेटी के चेयरमैन विनोद बामलवा ने कहा कि इंडस्ट्री युवा कारीगरों की कमी का सामना कर रही है क्योंकि कम लोग ज्वेलरी कारीगरी को करियर के तौर पर चुन रहे हैं। उनके अनुसार, इसका एक मुख्य कारण ज्वेलरी बनाने को एक व्यवस्थित वोकेशनल एजुकेशन पाथवे के तौर पर औपचारिक मान्यता न मिलना है।
ज्वेलरी क्राफ्ट्सशिप को डिग्री और सर्टिफिकेट प्रोग्राम से जोड़ना चाहिए
विनोद बामलवा ने कहा कि टेक्निकल स्किल्स को डिग्री और सर्टिफिकेशन प्रोग्राम के साथ जोड़ने से इस प्रोफेशन का दर्जा बढ़ाने और सेक्टर में ज्यादा टैलेंट को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने बताया कि स्कूल लेवल पर छात्रों के लिए ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग और उससे जुड़े टेक्निकल सब्जेक्ट्स को शुरू करने की कोशिशें चल रही हैं, जिसमें ऐसे प्रोग्राम को डिजाइन करने और उन्हें सपोर्ट करने में इंडस्ट्री की भागीदारी अहम भूमिका निभा रही है।
युवाओं के लिए रोजगार के मौके बढ़ेंगे
आईसीसी की ज्वेलरी और लाइफस्टाइल पर नेशनल एक्सपर्ट कमेटी के को-चेयरमैन और सेनको गोल्ड एंड डायमंड्स के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ शुभंकर सेन ने कहा कि स्कूल-कॉलेज में ज्वेलरी बनाने का हुनर सिखाने से युवाओं को रोजगार के नए मौके मिल सकते हैं। स्कूल और कॉलेज लेवल पर ऐसे सब्जेक्ट्स को शुरू करने से युवाओं के लिए रोजगार और एंटरप्रेन्योरशिप के अवसर खुल सकते हैं।
सेन ने बताया कि ज्वेलरी एजुकेशन सिर्फ गहने बनाने की कला से कहीं आगे तक फैली हुई है और इसमें मेटलर्जी, मार्केटिंग, सेल्स तकनीक और प्रोडक्ट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं।
उन्होंने जोर दिया कि अगर ज्वेलरी सेक्टर को एक ज्यादा व्यवस्थित और प्रोफेशनल ढंग से मैनेज करने के लिए इसकी शिक्षा को प्रैक्टिकल स्किल डेवलपमेंट के साथ जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल लंबे समय से ज्वेलरी कारीगरी का केंद्र रहा है, जहां के कारीगर मुंबई, सूरत और दक्षिण भारत सहित देश भर के ज्वेलरी सेंटर्स में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
ज्वेलरी में करियर कैसे बनाएं?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ज्वेलरी क्राफ्ट्समैनशिप को बतौर करियर चुनने वाले युवाओं की कमी आई है लेकिन ऐसा नहीं है कि भारत में इसकी पढ़ाई को लेकर सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। 10वीं या 12वीं क्लास के बाद इस फील्ड में करियर बनाने के कई मौके होते हैं। सीएडी डिजाइन, स्टोन सेटिंग या जेमोलॉजी सीखने के लिए शार्ट-टर्म डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स होते हैं। इसके बाद, डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, मेटलर्जी और बिजनेस मैनेजमेंट में गहरी समझ के लिए बी.डेस या बी.वोक डिग्री प्रोग्राम कोर्स कर सकते हैं।














