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नेवी को मिले 3 स्वदेशी युद्धपोत

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नेवी को मिले 3 स्वदेशी युद्धपोत

आत्मनिर्भरता में है हमारी शक्ति की पहचान: मोदी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 4, 2026
in the blitz
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नेवी को मिले 3 स्वदेशी युद्धपोत

ब्लिट्ज ब्यूरो

कोलकाता। तीन स्वदेशी वॉरशिप्स आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक और एंटी-सबमरीन आईएनएस अग्रय विगत दिवस भारतीय नौसेना में शामिल हुए।

आईएनएस संशोधक एक बार में लगातार 12 हजार किलोमीटर तक जा सकता है। आईएनएस दूनागिरी 8 ब्रह्मोस मिसाइल्स से लैस है। वहीं, आईएनएस अग्रय भारतीय तटरेखा के पास मौजूद दुश्मन पनडुब्बियों को नष्ट कर सकता है।

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इस दौरान कार्यक्रम में पीएम नरेंद्र मोदी भी मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि यह नए भारत की सबसे बड़ी ताकत है। आज भारत रक्षा क्षेत्र में केवल खरीदार बनकर नहीं रहना चाहता। हमारी शक्ति की पहचान विश्व का बाजार बनने में नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता में है। कार्यक्रम के दौरान नौसेना के जवानों ने परेड और फ्लैग होस्टिंग की।

कमीशंड वॉरशिप्स अब अपने निर्धारित कमांड में तैनात कर दिए जाएंगे।

भारतीय नौसेना में 140 से 145 वॉरशिप्स

भारतीय नौसेना के पास इस समय लगभग 140 से 145 सक्रिय वॉरशिप्स हैं। नौसेना का मुख्य लक्ष्य साल 2030 तक अपने जहाजों की कुल संख्या को 150 से 160 तक पहुंचाना है।

भारत अपने इन युद्धपोतों को मुख्य रूप से तीन नौसैनिक कमांड्स और एक रणनीतिक द्वीप कमान में तैनात करता है। विशाखापट्टनम (पूर्वी कमान) के जहाज बंगाल की खाड़ी और मलक्क ा में चीन की घेराबंदी करते हैं।

मुंबई और कारवाड़ (पश्चिमी कमान) के युद्धपोत अरब सागर में पाकिस्तान पर नजर रखने और समुद्री लुटेरों से व्यापारिक जहाजों को बचाने के लिए चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। इसके अलावा, समंदर के बीचों-बीच अंडमान और निकोबार कमान में तैनात जहाज दुश्मन के प्रवेश मार्ग को पूरी तरह ब्लॉक कर देते हैं। आधुनिक नौसैनिक युद्ध में युद्धपोतों की भूमिका सबसे अहम हो चुकी है, क्योंकि दुनिया का 90% व्यापार समुद्री रास्तों से ही होता है। आज के युद्धपोत केवल जहाज नहीं, बल्कि समंदर में तैरते मिलिट्री बेस हैं।

समुद्र में बढ़ी परमाणु ताकत

रिपोर्ट में भारत की समुद्री परमाणु क्षमता को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है। भारत की परमाणु पनडुब्बियां, खासकर आईएनएस अरिहंत, अब देश की ‘सेकेंड स्ट्राइक कैपेसिटी’ का बड़ा आधार बन रही हैं। सिपरी का अनुमान है कि भारत अब शांति काल में भी सीमित संख्या में परमाणु हथियारों को बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों पर तैनात करने लगा है। इससे दुश्मन के पहले हमले के बाद भी जवाबी कार्रवाई की क्षमता बनी रहती है। आईएनएस अरिघात पनडुब्बी पानी के अंदर से परमाणु हथियार लॉन्च कर सकती है।

तीनों वॉरशिप की खासियतें

आईएनएस दूनागिरी- ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों से लैस
आईएनएस दूनागिरी प्रोजेक्ट-17ए का 5वां स्टील्थ फ्रिगेट वॉरशिप है। इसे नेवी के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। प्रोडक्शन कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड ने किया है। जहाज के कमांडिंग ऑफिसर (डिजाइनेट) कैप्टन दिव्य आलोक ने कहा कि दूनागिरी ईस्ट नेवल कमान और ईस्टर्न फ्लीट का हिस्सा बनेगा।

आईएनएस संशोधक- समुद्र का नक्शा और सर्वे करेगा
आईएनएस संशोधक सर्वे वेसल (लार्ज) सीरीज का चौथा जहाज है। इसका काम युद्ध लड़ना नहीं, बल्कि समुद्र का सर्वे करना है। इसे तट और गहरे समुद्र में हाइड्रोग्राफिक सर्वे, समुद्री डेटा कलेक्शन और डिफेंस-सिविल यूज के लिए बनाया गया है। बंदरगाहों और समंदर के रास्तों का सर्वे करना भी इसके मुख्य काम में शामिल है।

आईएनएस अग्रय- दुश्मन की सबमरीन खोजकर नष्ट करेगा
आईएनएस अग्रय अर्नाला क्लास का चौथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट यानी उथले पानी का वॉरशिप है। इसे हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और एडवांस्ड सोनार सिस्टम से लैस किया गया है जिससे यह तटों पर तैनात दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाकर उन्हें निशाना बना सकता है।

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