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मिसाइल एक, टारगेट अनेक

by ब्लिट्ज़ इंडिया
May 23, 2026
in the blitz
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत ने अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करने के लिए एडवांस अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण विगत सप्ताह ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस मिसाइल में मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेड रि-एंट्री ह्वीकल (एमआईआरवी) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। बताया जा रहा है कि इस एक मिसाइल से कई टारगेट को आसानी से निशाना बनाया जा सकता है।

परीक्षण के दौरान मिसाइल को कई पेलोड्स के साथ लॉन्च किया गया जिन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर निर्धारित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदा। मिसाइल की पूरी उड़ान पर नजर रखने के लिए जमीन और समुद्र आधारित ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। लॉन्च से लेकर सभी पेलोड्स के लक्ष्य पर पहुंचने तक पूरे मिशन की निगरानी की गई।

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रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस सफलता के साथ भारत ने एक बार फिर यह क्षमता दिखाई है कि वह एक ही मिसाइल सिस्टम के जरिए कई रणनीतिक लक्ष्यों पर हमला कर सकता है। यह मिसाइल डीआरडीओ की प्रयोगशालाओं द्वारा देश के विभिन्न उद्योगों के सहयोग से विकसित की गई है। परीक्षण के दौरान डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक और भारतीय सेना के अधिकारी मौजूद रहे।

अग्नि-5 मिसाइल की ताकत

अग्नि-5 मिसाइल की रेंज 5,000 किलोमीटर से ज्यादा है। इसमें तीन चरण वाला सॉलिड फ्यूल इंजन इस्तेमाल किया गया है। एमआईआरवी तकनीक वाली मिसाइलें सामान्य मिसाइलों से ज्यादा ताकतवर मानी जाती हैं क्योंकि इनमें एक साथ कई न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने की क्षमता होती है। इसके अलावा डीआरडीओ ने अग्नि मिसाइल के कई दूसरे वर्जन भी बनाए हैं।

इनमें अग्नि-1 की रेंज 700 किलोमीटर, अग्नि-2 की 2,000 किलोमीटर, अग्नि-3 की 3,000 किलोमीटर और अग्नि-4 की 4,000 किलोमीटर है। अग्नि-5 के एमआईआरवी सिस्टम में पूरी तरह स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

अग्नि सीरीज में भारत के पास अग्नि-1, 2, 3, 4 और 5 मिसाइलें हैं। अग्नि-5 भारत की पहली इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आर्इसीबीएम) थी जिसे डीआरडीओ ने बनाया है। ये भारत के पास मौजूद लंबी दूरी की मिसाइलों में से एक है। आईसीबीएम ऐसी मिसाइलें होती हैं जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक हमला कर सकती हैं। यह मिसाइल डेढ़ टन तक न्यूक्लियर हथियार अपने साथ ले जा सकती है। इसकी स्पीड मैक 24 है, यानी आवाज की स्पीड से 24 गुना ज्यादा। अग्नि-5 के लॉन्चिंग सिस्टम में कैनिस्टर तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस वजह से इस मिसाइल को कहीं भी आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है। अग्नि-5 मिसाइल का इस्तेमाल भी बेहद आसान है, इस वजह से देश में कहीं भी इसकी तैनाती की जा सकती है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय सेना और रक्षा उद्योग को इस सफल परीक्षण के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि बढ़ते सुरक्षा खतरों के बीच देश की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करेगी। साथ ही बढ़ते खतरों को निपटने में मदद करेगी। वहीं सरकार की तरफ से यह नहीं बताया गया कि अग्नि-5 का एमआईआरवी वर्जन कितने वॉरहेड ले जा सकता है लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह चार या पांच वॉरहेड ले जाने में सक्षम हो सकता है।

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