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‘सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’

by ब्लिट्ज़ इंडिया
March 4, 2026
in the blitz
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दीपक द्विवेदी

हां, यह बात अवश्य स्पष्ट हो गई है कि इस सम्मेलन से दुनिया में भारत का कद कई गुना बढ़ गया है। लगभग 20 देशों के शासनाध्यक्षों और संसार की शीर्ष टेक कंपनियों के सीईओ की इसमें सक्रिय भागीदारी इस बात की पुष्टि करती है।

नई दिल्ली में आयोजित हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स (एआई) को लेकर दुनिया का सबसे बड़ा सम्मेलन ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट2026’ अब जब संपन्न हो चुका है, तब संतोष के साथ यह कहा जा सकता है कि यह आयोजन अपने उद्देश्यों में पूरी तरह सफल रहा। एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भागीदारों की उपस्थिति ने डिजिटल रूप से जुड़े भारतीयों द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स (एआई) प्रौद्योगिकियों के प्रति जो अत्यधिक उत्साह दर्शाया, वह वास्तव में उल्लेखनीय और यादगार रहने वाला है। हालांकि एआई कंपनियों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों में अक्सर भारत को अमेरिका के बाहर सबसे बड़ा उपयोगकर्ता आधार बताया गया है पर पूरे सप्ताह के दौरान उमड़ी भीड़ इस बात का सबसे बड़ा संकेत थी कि कितने भारतीय इस तकनीक को अपनाने के लिए उत्सुक हैं। मूल रूप से यह शिखर सम्मेलन एआई पर वार्षिक बहुपक्षीय चर्चाओं की श्रंखला की निरंतरता थी और 89 देशों व अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने एआई के लोकतंत्रीकरण पर ज्ञान साझा करने के लिए स्वैच्छिक प्रतिबद्धताओं के एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए हैं जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इन देशों में अमेरिका और चीन भी शामिल हैं जिनका फिलहाल एआई के क्षेत्र में दबदबा है। इन दोनों के अलावा रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, कनाडा और यूरोपीय संघ आदि ने भी इस घोषणापत्र का समर्थन किया है। कुल मिलाकर, इन देशों व संगठनों ने भारत के ‘सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय’ दर्शन को स्वीकार किया है और ‘नई दिल्ली ए आई इम्पैक्ट समिट घोषणापत्र’ इसकी तस्दीक करता है।

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शिखर सम्मेलन का संदर्भ भारत के लिए कुछ गंभीर चुनौतियां लेकर भी आता है। यह एक ऐसी तकनीक को तैनात करना और उसका प्रसार करना है जिसकी पूंजी और बुनियादी ढांचा विदेशों में स्थित है। ऐसी स्थिति में यह जरूरी है कि वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र में भारत के लिए एक ऐसा स्थान बने जो भारतीयों को इस तकनीक को अपनाने से होने वाले आर्थिक परिवर्तनों एवं लाभ में अच्छी तरह से शामिल कर सके। आज भारत की डेटा सेंटर क्षमता तेजी से बढ़ रही है लेकिन एआई के इस दौर में और गति की आवश्यकता है जो एक कठिन चुनौती है क्योंकि एआई को संचालित करने वाले ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) की लागत घरेलू तैनाती की लागत को काफी बढ़ा देती है।

एआई एक ऐसी तकनीक है जिसमें आर्थिक और सामाजिक व्यवधान पैदा करने की भी अपार क्षमता है। चुनौती यह भी है कि देशों को वार्षिक एआई मंच का उपयोग सामूहिक रूप से ऐसे उपकरण और सुरक्षा मानक विकसित करने के लिए करना चाहिए जो समाज में एआई के प्रसार को नियंत्रित करने में प्रभावी भूमिका निभा सकें। वैश्विक दक्षिण के नेतृत्व का अर्थ है उन देशों को सशक्त बनाना जो महाशक्तियों की प्रतिद्वंद्विता के युग में अप्रत्यक्ष रूप से होने वाले नुकसान के प्रति संवेदनशील हैं। एआई को उत्साहपूर्वक अपनाने वाले देश के रूप में भारत के पास एआई शासन के लिए एक आशावादी लेकिन विवेकपूर्ण मार्ग प्रशस्त करने की क्षमता है। दरअसल एआई को समग्र रूप से लाभकारी बनाने के लिए इसकी क्षमताओं का लोकतंत्रीकरण आवश्यक है। यदि इस शिखर सम्मेलन से कुछ स्पष्ट हुआ तो वह यह है कि भारत एआई के वैश्विक विकास में स्वाभाविक रूप से योगदान देने में जितना सक्षम है उतना ही वह इसके व्यवस्थित विकास को आकार देने वाली शक्ति बनने में भी सक्षम है।

हालांकि एआई के विकास में बड़ा निवेश भी चाहिए होता है जबकि अनेक देश तो अभी अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में ही उलझे हुए हैं। दिल्ली घोषणापत्र में भी दर्ज प्रतिबद्धताएं बाध्यकारी नहीं हैं। देश अपनी स्वेच्छा से निर्णय लेंगे कि वे किस हद तक काम कर सकते हैं। फिर भी एआई तक सस्ती और आसान पहुंच, स्थानीय जरूरतों के हिसाब से नवाचार के पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने की जो प्रतिबद्धता जताई गई है वे एआर्इ के लोकतंत्रीकरण की अहमियत को दर्शाती है। हां, यह बात अवश्य स्पष्ट हो गई है कि इस सम्मेलन से दुनिया में भारत का कद कई गुना बढ़ गया है। लगभग 20 देशों के शासनाध्यक्षों और संसार की शीर्ष टेक कंपनियों के सीईओ की इसमें भागीदारी इस बात की पुष्टि करती है कि यदि नई दिल्ली एआई इम्पैक्ट समिट घोषणापत्र के मुताबिक देशों ने कदम उठाए तो वह दिन दूर नहीं जब ‘ग्लोबल विलेज’ की अवधारणा सचमुच साकार हो जाएगी क्योंकि एआई में किसी किस्म का एकाधिकार संपूर्ण मानवता के लिए हानिकारक होगा और भारत ने सम्मेलन के सूक्त वाक्य ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ में ही अपना दृष्टिकोण रख कर यह स्पष्ट कर दिया है।

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