नई दिल्ली। देश के भारतीय प्रबंधन संस्थानों (आईआईएम्स) में प्रवेश लेने की प्रॉसेस में आने वाले समय में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। दरअसल, भारतीय प्रबंधन संस्थानों के बीच अंडरग्रेजुएट (यूजी) मैनेजमेंट प्रोग्राम में दाखिले के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट शुरू करने पर चर्चा हुई है। इसके अलावा एमबीए काउंसलिंग, फीस रिफंड की एक समान नीति और एक आईआईएम से दूसरे आईआईएम में छात्रों के ट्रांसफर जैसे मुद्दों पर भी विचार किया गया है। यह जानकारी एक आरटीआई के जरिए सामने आई है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 14 मई 2026 को अहमदाबाद में आईआईएम्स की कोऑर्डिनेशन फोरम की एक बैठक हुई। इस बैठक की अध्यक्षता तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की थी। आईआईएम अहमदाबाद के निदेशक भारत भास्कर समेत आईआईएम व्यवस्था से जुड़े कई निदेशकों और प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया था। बैठक में यूजी और इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट (आईपीएम) में दाखिले के लिए 10 से अधिक प्रवेश परीक्षाएं होने के फायदे और नुकसान पर चर्चा हुई। यह सवाल भी उठाया गया कि क्या इन परीक्षाओं को एक कॉमन टेस्ट में मिलाकर छात्रों का तनाव कम किया जा सकता है।
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कही थी ये बात
बता दें कि धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि यूजी दाखिले के लिए कई अलग-अलग प्रवेश परीक्षाओं से बचना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसे सरकार के हस्तक्षेप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि प्रक्रिया में सरकार की एक हितधारक के तौर पर भूमिका के रूप में समझा जाना चाहिए।
राय अलग-अलग
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कॉमन टेस्ट को लेकर सभी आईआईएम्स की राय एक जैसी नहीं थी। साल 2011 में पहला आईपीएम शुरू करने वाले आईआईएम इंदौर ने कहा कि अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं छात्रों को कई अवसर देती हैं और अलग-अलग प्रोग्राम की जरूरतों के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया बनाने में मदद करती हैं। हालांकि, संस्थान ने माना कि कई परीक्षाओं के लिए आवेदन और एडमिशन प्रक्रिया में शामिल होने से छात्रों पर पैसों का बोझ बढ़ता है।
आईआईएम इंदौर ने सुझाव दिया कि आईपीएम शुरू करने की योजना बना रहे आईआईएम्स को मौजूदा आईपीएमएटी व्यवस्था में शामिल होना चाहिए। इस सुझाव को आईआईएम रोहतक का समर्थन मिला।
वहीं आईआईएम बोधगया, जम्मू, अमृतसर और रांची ने कॉमन एंट्रेंस टेस्ट का समर्थन किया। आईआईएम जम्मू और आईआईएम बोधगया ने यह परीक्षा एनटीए के माध्यम से कराने का सुझाव दिया। आईआईएम कोझिकोड ने कहा कि दाखिले की प्रक्रिया में ज्यादा नियम नहीं होने चाहिए और हर आईआईएम को अपनी जरूरत के हिसाब से प्रवेश प्रक्रिया तय करने की आजादी मिलनी चाहिए। आईआईएम उदयपुर ने नई परीक्षा के बजाय जेईई, सीयूईटी और क्लैट जैसे मौजूदा एंट्रेंस एग्जाम के स्कोर इस्तेमाल करने का सुझाव दिया।
22 में से 13 आईआईएम में यूजी प्रोग्राम
फिलहाल, देश के 22 आईआईएम्स में से 13 संस्थान यूजी प्रोग्राम संचालित करते हैं। इनमें आईआईएम इंदौर, रोहतक, रांची, जम्मू, बोधगया, अमृतसर और शिलांग पांच वर्षीय आईपीएम चलाते हैं। इन संस्थानों में दाखिले के लिए फिलहाल आईपीमैट, जिपमैट और आईआईएम रोहतक की अपनी एप्टीट्यूड टेस्ट जैसी तीन अलग-अलग प्रवेश व्यवस्थाएं हैं।
गौरतलब है कि आईआईएम्स पहले से ही पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम में दाखिले के लिए कॉमन एडमिशन टेस्ट (सीएटी) आयोजित करते हैं। यूजी दाखिले के लिए कॉमन टेस्ट को लेकर अभी अलग-अलग आईआईएम्स के सुझाव सामने आए हैं और बैठक में इस पर विचार-विमर्श किया गया है।













