• Latest
  • Trending
Fire

भ्रष्टतंत्र पर प्रहार जरूरी

July 4, 2026
ब्लूमबर्ग ने देखा सशक्त भारत का ट्रेलर

फास्ट-ट्रैक अदालतों को 2031 तक मिला फंड

November 6, 2026
solar

सौर बिजली रात तक सहेजने को ₹14,500 करोड़ मंजूर

November 6, 2026
स्वदेशी एआई

अब 22 भारतीय भाषाओं में बोलेगा देसी एआई

November 4, 2026
स्वच्छ ऊर्जा से मजबूत हो रही भारत की ऊर्जा सुरक्षा

21 लाख सोलर घरों का बिजली बिल शून्य

November 3, 2026
श्रीहरिकोटा से एनवीएस-03 लेकर उड़ान भरता जीएसएलवी-एफ18। एजेंसी जांच: तस्वीर पर एएनआई, पीटीआई या रॉयटर्स का नाम हो तो न लगाएं।

नाविक को मिला तीसरा नया उपग्रह

November 2, 2026
नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

नार्को-सिंडिकेट पर महाप्रहार

October 31, 2026
नशे पर सर्जिकल स्ट्राइक

नशे पर सर्जिकल स्ट्राइक

October 31, 2026
युवाओं के आइडिया और उत्पादों को पंख देने की तैयारी

युवाओं के आइडिया और उत्पादों को पंख देने की तैयारी

October 31, 2026
केविन पीटरसन ने बताया, कैसे बदल रहा है भारत

नया भारत, जिसे दुनिया देख रही है

October 31, 2026
यूपी सरकार 1,000 एकड़ में डेटा सेंटर और आईटी हब करेगी विकसित

यूपी सरकार 1,000 एकड़ में डेटा सेंटर और आईटी हब करेगी विकसित

October 31, 2026
यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली के 70 घाटों पर उतरे हजारों लोग

यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली के 70 घाटों पर उतरे हजारों लोग

October 31, 2026
फिर बदला भदोही का नाम

फिर बदला भदोही का नाम

October 31, 2026
Friday, November 6, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

भ्रष्टतंत्र पर प्रहार जरूरी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 4, 2026
in the blitz
0
Fire

दीपक द्विवेदी

मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इस विषय में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं हो सकती।

आज भारत के लगभग हर शहर में अनियोजित विकास दिखाई देता है। चाहे योजनाबद्ध कालोनियां हों, शहर-गांव हों या तेजी से बढ़ते बाहरी इलाके। ये सभी शहरों को सस्ता आवास, सेवाएं और रोजगार उपलब्ध कराते हैं। समस्या तब पैदा होती है जब विकास के साथ सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार नहीं होता। होता भी है तो अनदेखी अथवा भ्रष्ट कर्मियों की साठगांठ से नियमों में अनदेखी की जाती है जो बाद में हादसों के रूप में सामने आती है। देश में सड़कों, होटलों, सिनेमा घरों, विभिन्न संस्थानों के भवनों या अन्य स्थानों पर लंबे समय से ऐसे हादसे हो रहे हैं और निर्दोष लोग उनमें अपनी जान गंवा रहे हैं जिनको रोका जा सकता था किंतु ऐसा हम कर नहीं पा रहे। कहना गलत नहीं होगा कि ये हादसे अक्षम और भ्रष्ट सरकारी तंत्र का नतीजा होते हैं। हादसों के बाद सरकारें मुआवजा देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेती हैं और जांच कमेटियों की रिपोर्टें ठंडे बस्ते में चली जाती हैं।

YOU MAY ALSO LIKE

फास्ट-ट्रैक अदालतों को 2031 तक मिला फंड

सौर बिजली रात तक सहेजने को ₹14,500 करोड़ मंजूर

कुछ दिन पूर्व दिल्ली के एक होटल में लगी आग ऐसा ही हादसा था जिसने 22 इंसानी जिंदगी लील लीं थीं और अब लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड में भी 15 नौजवानों की जान चली गई। दिल्ली के होटल के लिए केवल छह कमरों की मंजूरी ली गई थी और 25 कमरों के साथ संचालित किया जा रहा था। लखनऊ के कोचिंग सेंटर में भी अनियमितताओं की लंबी फेहरिस्त पाई गई है। दिल्ली, लखनऊ और देश के दूसरे हिस्सों में हुए ऐसे हादसों की सूची बहुत लंबी है। सभी घटनाओं में एक साझा विलेन सामने आता है, वह है नियमों का अनुपालन न होना। ऐसे में इस बात की पड़ताल प्रासंगिक हो जाती है कि एक लोक कल्याणकारी लोकतंत्र वाले देश भारत में इंसानों की जिंदगी इतनी सस्ती क्यों है?

इन हादसों के पीछे क्या कारण हैं; इसके बारे में संबंधित विभागों को पहले से ही जानकारी होती है। ऐसे में जिम्मेदार लोगों की पहचान करके उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए; भले ही वे सेवानिवृत्त ही क्यों न हो चुके हों। केवल ऐसी सख्त कार्रवाई से ही हादसे रोके जा सकते हैं।
दरअसल ऐसा लगने लगा है कि देश में हादसों में मौत सिर्फ एक आंकड़ा मात्र बन गई है जबकि पश्चिम के देशों में अपने एक- एक व्यक्ति के जीवन को बचाने के लिए सारी एजेंसियां जमीन-आसमान एक कर देती हैं। वहां मानव जीवन इतना अनमोल है, वहीं दूसरी तरफ हमारे देश में मानवजनित हादसों की बाढ़ है। भारत में हर एक बड़े हादसे के बाद एक तयशुदा पटकथा चलती है। जांच के आदेश दिए जाते हैं। मुआवजे की घोषणा और कुछ अधिकारियों का हादसे वाली जगह से तबादला, बस। स्थिति जस की तस बनी रहती है।

हाल ही में हुई आग की घटनाएं बेहद दुखद हैं लेकिन सवाल यह है कि क्या यह केवल आग लगने की घटना थी? शायद नहीं। आग तो अक्सर आखिरी घटना होती है, जो हमें नजर आती है लेकिन असली त्रासदी तो बहुत पहले ही शुरू हो जाती है, जब नियमों की अनदेखी होती है, बुनियादी सुविधाओं की कमी को नजरअंदाज किया जाता है और अवैध निर्माण धीरे-धीरे सामान्य बन जाता है। यह सब तभी रुक सकेगा जब देश के किसी भी इलाके में हो रहे मानवजनित हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों को त्वरित कार्रवाई करके कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी। ऐसा होने पर ही लालच में लिप्त और नियम-कानूनों का पालन न कराने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों में भय व्याप्त होगा। ऐसे हादसों के लिए हर विभाग के मौजूदा अथवा सेवानिवृत्त उत्तरदायी कर्मियों को कटघरे में लाना होगा। तभी लोगों की जान को जोखिम में डालने वालों पर लगाम कस सकेगी।

गौर करें तो भारत में प्रशासनिक भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी एक बेहद जटिल और गहरी समस्या है। वर्ष 1995 के डबवाली अग्निकांड ने पूरे विश्व को झकझोर दिया था। उस त्रासदी के बाद अग्नि सुरक्षा संबंधी अनेक नियम, कानून और दिशा-निर्देश बनाए गए। केंद्र और राज्य सरकारों को चाहिए कि अग्निशमन विभाग में रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा सभी सार्वजनिक एवं निजी संस्थानों में अग्नि सुरक्षा नियमों की नियमित जांच कर उनके प्रभावी पालन को सुनिश्चित किया जाए। सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसे हादसों से देश की साख प्रभावित होती है। एक लोकतंत्र के तौर पर अगर हम परिपक्व हो रहे हैं तो यह बात देश को चलाने वाली संस्थाओं में भी दिखनी चाहिए। देश को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और इस विषय में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं हो सकती।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation