ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने भारत के एयरो-इंजन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मौजूदगी में एचएएल कोरापुट द्वारा निर्मित 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी की गई। इसी अवसर पर हेलीकॉप्टर में लगने वाले शक्ति इंजन की दूसरी निर्माण लाइन का भी उद्घाटन किया गया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि भारत की एयरोस्पेस यात्रा और सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता में महत्वपूर्ण योगदान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इन इंजनों के पीछे कई पीढ़ियों के इंजीनियरों, तकनीशियनों, पर्यवेक्षकों, वैज्ञानिकों और कुशल कामगारों की प्रतिबद्धता और कर्तव्यनिष्ठा है। वर्ष 1964 में स्थापना के बाद से एचएएल कोरापुट भारत की एयरो-इंजन क्षमता के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित हुआ है। यहां निर्मित और रखरखाव किए गए इंजनों ने मिग-21, मिग-27, मिग-29 और सुखोई-30 एमकेआई जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को शक्ति दी है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि 2,000वें इंजन की उपलब्धि इसी लंबी यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने एचएएल कोरापुट के इंजीनियरों, तकनीशियनों और पूरी टीम को उनके समर्पण और तकनीकी दक्षता के लिए बधाई दी। वहीं, कोरापुट में शक्ति इंजन के लिए दूसरी उत्पादन लाइन भी स्थापित की गई है। इस पर 218 करोड़ रुपए का निवेश किया गया है। इससे देश में शक्ति इंजन के उत्पादन की अतिरिक्त क्षमता तैयार होगी। यह अतिरिक्त क्षमता उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर और हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर जैसे स्वदेशी हेलीकॉप्टरों की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि कलपुर्जों के स्वदेशीकरण से लेकर इंजन तैयार करने में लगने वाले समय में कमी तक, एचएएल की ओर से किए जा रहे प्रयास सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारी को मजबूत कर रहे हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि 2,000वें इंजन की डिलीवरी को केवल एक उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने इसे भविष्य के बड़े लक्ष्य की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा, “आज के 2,000वें इंजन की डिलीवरी को हम केवल एक मील का पत्थर न लें, बल्कि अगले 10 हजार, अगले 1 लाख और एक ऐसी भारतीय एयरोस्पेस उद्योग के निर्माण के संकल्प के रूप में लें, जो दुनिया की सबसे उन्नत प्रणोदन प्रणालियों को डिजाइन, विकसित, निर्मित और उनका समर्थन करने में सक्षम हो।”
उन्होंने कहा कि एयरो-इंजन पर महारत हासिल करना आधुनिक उद्योग की सबसे उन्नत तकनीकों में महारत हासिल करने के बराबर है। दुनिया में कुछ ही देश इस क्षमता को हासिल कर पाए हैं और भारत उनमें शामिल है। राजनाथ सिंह ने कहा कि लगभग 5,000 करोड़ रुपए के निवेश की दिशा में किए जा रहे प्रयास बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल के स्वदेशीकरण की दिशा में मिश्र धातु निगम लिमिटेड के साथ साझेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया।
रक्षा मंत्रालय सेना के लिए खरीदेगा 770 करोड़ के रडार
नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना की हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) के साथ करीब 770 करोड़ रुपए की डील की है। इसके तहत इम्प्रूव्ड लो लेवल लाइट वेट रडार (एलएलएलआर-I) खरीदे जाएंगे।
ये रडार फाइटर जेट के साथ बेहद छोटे ड्रोन का भी पता लगाकर उनकी गतिविधियों को ट्रैक कर सकेंगे। ये रडार हवाई लक्ष्यों की पहचान कर यह भी तय कर सकेंगे कि किस खतरे पर पहले ध्यान देना जरूरी है। इससे दुश्मन के ड्रोन से निपटने में सेना को मदद मिलेगी। साथ ही, देश की हवाई सुरक्षा मजबूत होगी और भारत में रक्षा उपकरण बनाने को बढ़ावा मिलेगा।रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इस डील पर मुहर लगी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक रडार खरीदने का करार देश में रक्षा उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देगा। इससे घरेलू रक्षा उद्योग और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को भी अवसर मिलने की उम्मीद है। यह पहल आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के लक्ष्यों के अनुरूप है।














