नई दिल्ली। आज के डिजिटल दौर में कंपनियों के लिए अपने प्रोडक्ट और सेवाओं का ऑनलाइन प्रचार करना जितना जरूरी है, उतना ही अहम यह समझना भी हो गया है कि उनके मार्केटिंग कैंपेन से बिजनेस को कितना फायदा मिल रहा है। यही वजह है कि डिजिटल मार्केटिंग के साथ मार्केटिंग एनालिटिक्स की भूमिका भी तेजी से बढ़ रही है।
ऐसे में करियर बनाने की तैयारी कर रहे लोगों के सामने सवाल रहता है कि दोनों में क्या अंतर है और बदलती इंडस्ट्री में किन स्किल्स की मांग बढ़ रही है? एक्सपर्ट ने यहां इसी नए करियर ट्रेंड और मार्केटिंग की बदलती जरूरतों के बारे में विस्तार से बताया है।
हर साल हो रही डिजिटल एडवरटाइजिंग में बढ़ोतरी
आज मार्केटिंग इंडस्ट्री के सामने सवाल यह नहीं है कि ब्रांड्स को डिजिटल में निवेश करना चाहिए या नहीं। डिजिटल पहले ही मार्केटिंग इकोसिस्टम का केंद्र बन चुका है। मार्केटिंग एक्सपर्ट और वायरल पिच के फाऊंडर सुमित गुप्ता ने बताया कि भारत में विज्ञापन खर्च का 50-60% हिस्सा डिजिटल एडवरटाइजिंग का है और इसमें हर साल बढ़ोतरी हो रही है। जैसे-जैसे कैंपेन को समझना आसान हो रहा है और कंज्यूमर जर्नी कठिन होती जा रही है, डिजिटल मार्केटिंग और मार्केटिंग एनालिटिक्स के बीच का अंतर खत्म होता जा रहा है।
बदल चुका ट्रेंड,अब ये भी जरूरी
डिजिटल मार्केटिंग का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना और उन्हें किसी ब्रांड या प्रोडक्ट के बारे में जागरूक करना था। उस समय किसी कैंपेन की सफलता को व्यूज, लाइक्स, फॉलोअर्स और रीच जैसे आंकड़ों से देखा जाता था। हालांकि, अब मार्केटिंग का नजरिया बदल चुका है। कंपनियां अपने विज्ञापन और प्रमोशन पर खर्च किए गए पैसे का हिसाब चाहती हैं।
उनके लिए यह जानना ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है कि किसी कैंपेन से कितने नए ग्राहक जुड़े, कितने पुराने ग्राहक बने रहे और बिजनेस को कितना वास्तविक लाभ हुआ। यही वजह है कि अब मार्केटर्स को केवल लोगों का ध्यान खींचने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि यह भी समझना होगा कि विज्ञापन देखने के बाद ग्राहकों ने क्या कदम उठाया और उसका बिजनेस पर क्या असर पड़ा।
अब काम से ज्यादा रिजल्ट पर फोकस
इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार डिजिटल मार्केटिंग में नौकरियों के अवसर कम नहीं हैं लेकिन काम और तरीका बदल रहा है। सोशल मीडिया, कंटेंट क्रिएशन, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग, सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (एसईओ), परफॉर्मेंस मार्केटिंग और डिजिटल स्ट्रैटेजी जैसे क्षेत्रों में लगातार नए अवसर सामने आ रहे हैं। खासतौर पर इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग ब्रांड्स की रणनीति का अहम हिस्सा बनती जा रही है। इसके साथ ही सोशल मीडिया और ऑनलाइन वीडियो पर कंपनियों का निवेश भी डिजिटल विज्ञापन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
हालांकि, अब केवल अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म चलाना या उन पर कैंपेन तैयार करना पर्याप्त नहीं है। मार्केटर्स को यह समझना होगा कि ग्राहक किसी खास प्रोडक्ट की ओर क्यों आकर्षित होते हैं, वे खरीदारी का फैसला कैसे लेते हैं और किस तरह का कंटेंट उन्हें ग्राहक में बदलने में सफल रहता है।
बन रहा आवश्यकता
आज कंपनियों के पास बड़ी मात्रा ग्राहकों और मार्केटिंग कैंपेन से जुड़ा डेटा उपलब्ध है। सीआरएम सिस्टम, विज्ञापन प्लेटफॉर्म और वेबसाइट ट्रैफिक के माध्यम से लगातार नई जानकारियां मिलती रहती हैं लेकिन केवल डेटा एकत्र कर लेना किसी कंपनी को आगे नहीं ले जा सकता। महत्व इस बात का है कि उस जानकारी का इस्तेमाल सही फैसले लेने के लिए कैसे किया जाता है। प्रस्तुत हैं खास टिप्स।
क्रिएटिव थिकिंग- ग्राहकों की जरूरत और पसंद को ध्यान में रखकर प्रभावशाली मार्केटिंग कैंपेन तैयार करना।
डेटा एनालिसिस- विज्ञापनों और ग्राहकों से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन करके उपयोगी निष्कर्ष निकालना।
कस्टमर बिहेवियर की समझ- यह जानना कि ग्राहक किसी ब्रांड या प्रोडक्ट के प्रति किस तरह प्रतिक्रिया देते हैं।
सही रणनीति बनाना- डेटा के आधार पर मार्केटिंग अभियानों में जरूरी बदलाव करना।
बिजनेस रिजल्ट पर फोकस- कैंपेन की सफलता को केवल व्यूज और रीच से नहीं, बल्कि वास्तविक व्यावसायिक परिणामों से जोड़ना।
एआई के दौर में बदल रहे काम के तरीके, मार्केटर्स का भविष्य
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मार्केटिंग इंडस्ट्री में काम करने के तरीकों को बदल रहा है। रिपोर्ट तैयार करना, कंटेंट के अलग-अलग वर्जन बनाना और भविष्य के ट्रेंड का अनुमान लगाने जैसे कई काम अब एआई टूल्स की मदद से किए जा सकते हैं। इससे मार्केटिंग प्रोफेशनल्स के सामने नई संभावनाएं और चुनौतियां आई हैं।














