• Latest
  • Trending

‘ऊंचे पदों पर बैठकर जमीनी हकीकत जाने बिना फैसले सुना देता है सुप्रीम कोर्ट’

March 11, 2026
हरित भारत मिशन CAG रिपोर्ट 2026

हरित भारत मिशन का दस साल का हिसाब

August 31, 2026
पराली से बायो-बाइंडर तकनीक

पराली जो अब सड़क बनेगी

August 31, 2026
भारत-उज़्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

भारत-उज़्बेकिस्तान व्यापक रणनीतिक साझेदारी

August 31, 2026
daily-news

भारत-उज़्बेकिस्तान सहयोग: शिक्षा, दवा, कृषि, योग और खेल में नई साझेदारी

August 31, 2026
प्रोजेक्ट इम्पोर्ट्स योजना CAG ऑडिट 2026

जिस फ़ाइल की कोई आख़िरी तारीख़ नहीं

August 31, 2026
भारत सरकारी योजनाएं और प्रमुख घटनाक्रम अगस्त 2026

भारत का अपना पॉपकॉर्न बीज

August 31, 2026
daily-news

भारत सरकारी योजनाएं और प्रमुख घटनाक्रम अगस्त 2026

August 31, 2026
भारतीय मानक समय नियम 2026

अब पूरे देश की घड़ी एक होगी

August 31, 2026
भारत-जापान स्टार्टअप और डीप टेक 2026

अब भारत सस्ता नहीं, हुनर बेच रहा है

August 30, 2026
भारत की आर्थिक और कारोबारी गतिविधियाँ अगस्त 2026

सप्ताह की समीक्षा

August 30, 2026
ई-श्रम पोर्टल के 5 साल: 31.89 करोड़ पंजीकरण, 54.28% महिलाएँ

हर दिन पौने दो लाख नाम

August 30, 2026
CAG Railway Audit Report 2026: ₹1,130.92 Crore की 26 टिप्पणियाँ

छब्बीस टिप्पणियाँ, ग्यारह सौ करोड़

August 30, 2026
Monday, August 31, 2026
Retail
संपर्क
डाउनलोड
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर
No Result
View All Result
Welcome To Blitz India Media
No Result
View All Result

‘ऊंचे पदों पर बैठकर जमीनी हकीकत जाने बिना फैसले सुना देता है सुप्रीम कोर्ट’

आत्मनिरीक्षण जैसी है सीजेआई सूर्यकांत की ये टिप्पणी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
March 11, 2026
in the blitz
0
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक विशेष टिप्पणी की है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा-सुप्रीम कोर्ट ऊंचे स्थान पर बैठकर कई मौकों पर भारत की सामाजिक जमीनी हकीकतों की अनदेखी करते हुए और सामाजिक ताने-बाने पर उनके प्रतिकूल प्रभाव को समझे बिना व्यापक आदेश पारित करता है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी आत्मनिरीक्षण जैसी है।

पुलिस को एफआईआर से पहले जांच की अनुमति का केस
मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में राजद्रोह प्रावधान और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता(बीएनएसएस) में पुलिस को एफआईआर दर्ज करने से पहले शुरुआती जांच करने की अनुमति देने वाले प्रावधान की वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई। यह सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची के पीठ के समक्ष हुई।

YOU MAY ALSO LIKE

हरित भारत मिशन का दस साल का हिसाब

पराली जो अब सड़क बनेगी

वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि पुलिस को एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच करने की अनुमति देना सुप्रीम कोर्ट के 2014 के ललिता कुमारी फैसले का उल्लंघन है।

मुख्य न्यायाधीश ने यह टिप्पणी 2013 के ललिता कुमारी बनाम यूपी सरकार केस से जुड़े आजाद सिंह कटारिया बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में की है।

लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने ललिता कुमारी फैसले पर अपनी चिंता जताई। उन्होंने कहा-कभी-कभी फैसले ऊंचे पदों पर बैठकर सुनाए जाते हैं। क्या आपने देखा है कि उस फैसले से किस तरह के मुकदमेबाजी का सिलसिला शुरू हुआ है? संज्ञेय अपराध का खुलासा होते ही एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य हो जाता है। इस देश में उस फैसले का कितना दुरुपयोग हुआ है?

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा-कई बार न्यायिक अदालतों का दुरुपयोग होता है। सभी झगड़ालू लोग दुरुपयोग करते हैं। हमारे समाज की परिस्थितियों, जमीनी हकीकतों और ग्रामीण समुदायों को जाने बिना, लोगों के जीवन को समझे बिना, हम कथित अधिकारों के नाम पर फैसले सुनाते रहते हैं, जिससे देश का ताना-बाना पूरी तरह से बिखर जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने ललिता कुमारी फैसले में क्या कहा था
2014 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि शिकायत में संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है तो पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए, लेकिन सीमित मामलों में प्रारंभिक जांच की जा सकती है।

नए कानून को कुछ वक्त देना चाहिए : सीजेआई सूर्यकांत
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि किसी भी नए कानून के प्रावधानों की वैधता का परीक्षण करने के लिए, उसके कामकाज को देखने के लिए कुछ वर्षों तक इंतजार करना चाहिए और खामियां पाए जाने पर उसे चुनौती दी जा सकती है।

पुलिस नहीं जांचेगी तो और कौन जांचेगा
वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि एफआईआर दर्ज करते समय पुलिस के पास शिकायत की सत्यता निर्धारित करने का अधिकार कैसे हो सकता है? पीठ ने कहा-अगर पुलिस एफआईआर में बदलने से पहले शिकायत की सत्यता तय नहीं कर सकती, तो और कौन करेगा? जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा-ललिता कुमारी फैसले के तहत वैवाहिक विवादों सहित कई श्रेणियों के मामलों में पुलिस को प्रारंभिक जांच का अधिकार दिया गया है।

विधायिका ने इन अपराधों के लिए निर्धारित सजा की मात्रा के संबंध में कानून में इस पहलू को प्रतिबिंबित किया है। ऐसा प्रावधान ललिता कुमारी फैसले के विपरीत नहीं हो सकता। गुरुस्वामी ने तर्क दिया कि राजद्रोह का प्रावधान बीएनएस में तब भी शामिल किया गया जब केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष ऐसा न करने का वचन दिया था। पीठ ने कहा-केंद्र सरकार ऐसा वचन दे सकती है, लेकिन संसद इससे बाध्य नहीं है।

ShareTweetSend

POPULAR NEWS

  • India shows way out to UN military observer group

    संरा के सैन्य पर्यवेक्षक समूह को भारत ने दिखाया बाहर का रास्ता

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • प्रोपर्टी पर जिसका 12 साल से कब्जा, वही होगा मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • 12 साल से है जमीन पर कब्जा तो वही होगा असली मालिक

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • गंगाजल खराब नहीं होता, लेकिन क्यों ?

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
  • पृथ्वी का आखिरी देश जहां सूरज केवल 40 मिनट के लिए ही डूबता है

    0 shares
    Share 0 Tweet 0
Welcome To Blitz India Media

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

Navigate Site

  • About
  • Our Team
  • Contact

Follow Us

No Result
View All Result
  • देश
  • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय
    • उत्तर-प्रदेश
  • राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्री
  • चुनाव विशेष
  • स्टेट-नेशनल
  • महिला-खेल
  • डाउनलोड
  • अंग्रेजी
  • संपर्क
  • ई-पेपर

© 2023 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation