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युद्ध के बीच भारत को मिला ‘खजाने’ का नया रास्ता

दिल्ली में ब्रिक्स देशों के उप विदेश मंत्रियों व विशेष दूतों की अहम बैठक

by ब्लिट्ज़ इंडिया
May 6, 2026
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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली।भारत में ब्रिक्स देशों के उप विदेश मंत्रियों और विशेष दूतों की एक अहम बैठक हुई। बैठक ब्रिक्स के मिडिल ईस्ट एंड नॉर्थ अफ्रीका (मीना ) रीजन के देशों के बीच हुई। मीना रीजन के पास सबसे अहम तेल और गैस का अपार खजाना है। भारत 2026 में ब्रिक्स देशों की अध्यक्षता कर रहा है। अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद होर्मुज स्ट्रेट बाधित हो गया, जिससे भारत समेत दुनिया की करीब 20 फीसदी तेल-गैस की लाइफ लाइन रुक-रुककर चल पा रही है। ऐसे में भारत चुप बैठने वाला नहीं था, उसने ब्रिक्स के मीना क्षेत्र के देशों के साथ तेजी से बातचीत शुरू कर दी।

इनमें प्रमुख देश ईरान, संयुक्त अरब अमीरात , सऊदी अरब और मिस्र जैसे देश हैं। मगर, सऊदी अरब एक दुविधा में फंसा हुआ है। भारत ने ब्रिक्स मीना के देशों से तब बातचीत तेज की है, जब कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई थीं।

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विदेश मंत्रालय ने बताया-मीना को लेकर हुई ब्रिक्स की बात

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ट्वीट कर बताया कि नई दिल्ली में ब्रिक्स के उप विदेश मंत्रियों और विशेष दूत मीना को लेकर मिले। रीजन में मौजूदा हालात को लेकर चर्चा की। सभी सदस्यों ने मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष को लेकर गहरी चिंता जताई। सभी ने अपने विचार व्यक्त किए और इस मामले में अपने नजरिये और आकलन को शेयर किया।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस दौरान फलस्तीन के मुद्दे और गाजा के हालात को लेकर भी चर्चा हुई। इसमें मानवीय मदद मुहैया कराने, यूएनआरडब्ल्यूए और आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति और लेबनान में सीजफायर का स्वागत पर भी चर्चा हुई।

2027 में चीन की अगुवाई में फिर मिलेंगे सभी देश

विदेश मंत्रालय ने बताया कि ब्रिक्स7-मीना के सभी देशों ने यूनिफिल पर अस्वीकार्य हमलों, सीरिया में संघर्ष के बाद पुनर्निर्माण और पुनर्वास, यमन में राजनीतिक स्थिरता, इराक में विकास और स्थायित्व, लीबिया में राजनीतिक प्रक्रिया और सूडान में मानवीय संकट पर भी चर्चा की। इसके बाद सभी 2027 में चीन की अध्यक्षता में मिलने पर सहमत हुए।

मीना क्या बन सकता है विकल्प

मिडिल ईस्ट एंड नॉर्थ अफ्रीका में अलग-अलग व्याख्याओं के आधार पर 19 से लेकर 27 देश हैं। मीना क्षेत्र पीले सोने यानी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से भरपूर है।

अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से ही भारत ब्रिक्स के मीना रीजन के देशों के लगातार संपर्क में है। हाल ही में विदेश मंत्री एस जयशंकर यूएई गए थे। वहीं, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी कतर के दौरे पर गए थे।

सऊदी अरब को किस बात की है दुविधा

ब्रिक्स समूह में अगस्त, 2023 में दक्षिण अफ्रीका में हुई बैठक के दौरान कई मीना देशों जैसे मिस्र, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात और ईरान को ब्रिक्स में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया था। इनमें से सऊदी अरब को छोड़कर बाकी के देश 2024 में ब्रिक्स में शामिल हुए थे। उनके साथ ही अर्जेंटीना और इथियोपिया भी शामिल हुए थे।

सऊदी अरब ने ब्रिक्स में शामिल होने के न्योते को ‘विचाराधीन’ रखा हुआ है। उसके पीछे बड़ी वजह है कि सऊदी अरब खाड़ी में अमेरिका का बड़ा दोस्त है और अमेरिका को ब्रिक्स कतई रास नहीं आता है। अमेरिका नहीं चाहता है कि उसके क्वॉड के मुकाबले ब्रिक्स जैसे देश न खड़े हो सकें।
सऊदी अरब अभी तक ब्रिक्स का पूर्णकालिक सदस्य इसीलिए नहीं बना है। हालांकि, वह अपने प्रतिनिधियों को ब्रिक्स की बैठकों में भेजता रहा है।

अमेरिका को इसलिए नहीं पसंद है ब्रिक्स

ब्रिक्स में दुनिया की तीन बड़ी ताकतें रूस, चीन और भारत शामिल हैं। रूस और चीन से अमेरिका की दुश्मनी जगजाहिर है। दुनिया की बड़ी महाशक्ति के रूप में तेजी से उभर रहे चीन के दबदबे को रोकने के लिए अमेरिका ने प्रशांत महासागर में क्वॉड बनाया है, जिसमें खुद अमेरिका के अलावा, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया हैं। ऐसे में अमेरिका कतई नहीं चाहता है कि ब्रिक्स मजबूत बने और भारत रूस-चीन के खेमे में चला जाए। ब्रिक्स देशों के स्थानीय मुद्रा में कारोबार पर जोर देना भी अमेरिका को खटकता रहा है। अमेरिका कतई नहीं चाहता है कि दुनिया पर राज करने वाले उसके डॉलर को कोई चुनौती दे। अमेरिका को महाशक्ति बनाने में इसी डॉलर का योगदान है। ऐसे में अगर डॉलर कमजोर पड़ा तो उसका दबदबा खत्म हो सकता है।

ब्रिक्स 33 फीसदी इकनॉमी वाला समूह

2001 में अर्थशास्त्री जिम ओ नील ने ब्रिक्स का सबसे पहले आइडिया दिया था। हालांकि, उस वक्त ब्रिक्स के बजाया ब्रिक (ब्राजील, रूस , भारत, चीन ) ही था। मगर 2011 में ब्रिक में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के साथ ही इसका नाम ब्रिक्स पड़ गया। मौजूदा वक्त में ब्रिक्स दुनिया की 40 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। यह दुनिया की एक-तिहाई अर्थव्यवस्था वाला समूह है। यह महज एक आर्थिक समूह है।

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