नई दिल्ली। बिहार के विश्वविद्यालयों में पीएचडी में दाखिले के पात्रता नियम और सख्त कर दिए गए हैं। सभी विश्वविद्यालयों को पीएचडी ऑर्डिनेंस और पीएचडी रेगुलेशन 2026 के प्रावधानों के अनुरूप ही दाखिला लेने को कहा गया है। साथ ही लंबित दाखिला प्रक्रिया को जल्द पूरा करने और आगे की प्रवेश प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से संचालित करने का निर्देश दिया गया है। विश्वविद्यालयों में पीएचडी दाखिले की प्रक्रिया को लेकर लोकभवन ने सख्त निर्देश जारी किये हैं।
पीएचडी में नेट की पात्रता को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गयी है। जिस वर्ष अभ्यर्थी ने नेट उत्तीर्ण किया है, उसे उसी वर्ष के दाखिला चक्र के लिए पात्र माना जायेगा। उदाहरण के तौर पर 2024 सत्र में दाखिले के लिए नेट-2024 उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को पात्र माना जायेगा। नेट योग्यता और उसके वेटेज का निर्धारण पीएचडी रेगुलेशन 2026 के अनुसार होगा। निर्देश में कहा गया है कि विवि 2024, 2025 और 2026 के पीएचडी दाखिला प्रक्रिया से संबंधित विज्ञापन जल्द से जल्द जारी कर लंबित प्रक्रिया को नियमित करें।
भविष्य में पीएचडी दाखिले में अनावश्यक विलंब नहीं हो, इसके लिए प्रवेश प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करनी होगी। यह निर्देश बीएयू और बीएएसयू को छोड़कर राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भेजा गया है। शोध की गुणवत्ता बनाये रखने को किसी एक पीएचडी दाखिला चक्र में उपलब्ध रिक्त सीटों की एक तिहाई से अधिक सीटें नहीं भरी जायेंगी।
वहीं, 2026 सत्र तक रिक्त सीटों की अधिकतम दो-तिहाई सीटों तक दाखिला लिया जा सकेगा। विश्वविद्यालयों को शोध पर्यवेक्षकों की उपलब्धता, शोध सुविधाओं और पीएचडी नियमों में निर्धारित अन्य मानकों को भी ध्यान में रखना होगा। बिहार के विश्वविद्यालयों में कौन-सा शोध हो रहा है, यह अब सार्वजनिक होगा। लोकभवन ने सभी विश्वविद्यालयों को इसका निर्देश दिया है। पीएचडी के रेगुलेशन के तहत सभी विश्वविद्यालयों को अपने यहां होने वाले रिसर्च को विवि की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा।














