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अब महंगा नहीं होगा हवाई सफर, 10 हजार करोड़ की योजना को मंजूरी

एविएशन सेक्टर के शेयरों में तेजी

by ब्लिट्ज़ इंडिया
July 4, 2026
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कनाडा ने माना, एअर इंडिया फ्लाइट ब्लास्ट खालिस्तानियों ने किया

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत के एविएशन सेक्टर को बड़ी राहत देते हुए केंद्र सरकार ने एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के एटीएफ प्राइस स्टेबिलाइजेशन फंड को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल के इस फैसले का उद्देश्य एयरलाइंस और यात्रियों को ईंन्धन की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव से बचाना है। खासतौर पर पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर एविएशन फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला है, जिसका सीधा असर भारतीय एयरलाइंस की लागत और यात्रियों के किराये पर पड़ रहा था।

करीब ढाई गुना बढ़ी एटीएफ की कीमत

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि मार्च 2026 में एटीएफ की अंतरराष्ट्रीय कीमत लगभग 60.5 रुपये प्रति लीटर थी, जो मई 2026 तक बढ़कर 142 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई, यानी महज दो महीनों में इसकी कीमत करीब ढाई गुना बढ़ गई। विमानन उद्योग में एटीएफ कुल ऑपरेशन लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होता है, जबकि असामान्य परिस्थितियों में यह 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। ऐसे में ईंन्धन की बढ़ती कीमतों ने एयरलाइंस और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, दोनों पर भारी वित्तीय दबाव बना दिया था।

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किसे मिलेगा 10,000 करोड़ फंड का लाभ?

सरकार द्वारा स्वीकृत यह 10,000 करोड़ रुपये का फंड ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को ब्याज-मुक्त एडवांस राशि के रूप में दिया जाएगा। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के माध्यम से यह सहायता उपलब्ध कराई जाएगी और इसका लाभ घरेलू तथा अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित करने वाली सभी इच्छुक भारतीय एयरलाइंस को मिलेगा। इस व्यवस्था के तहत एयरलाइंस को निश्चित कीमत पर एटीएफ उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे उन्हें ईंन्धन लागत को लेकर बेहतर योजना बनाने और वित्तीय स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतें सामान्य स्तर पर लौट आएंगी, तब कीमतों के अंतर की राशि ऑयल कंपनियों से वसूलकर भारत सरकार के समेकित कोष में वापस जमा कर दी जाएगी। इस तरह यह योजना एक आत्मनिर्भर और दीर्घकालिक समाधान के रूप में काम करेगी।

यात्रियों को क्या फायदा?

इस योजना का एक और बड़ा फायदा यात्रियों को मिलेगा। अगर फ्यूल की कीमतों में लगातार वृद्धि होती रहती, तो एयरलाइंस टिकट किराए में भारी बढ़ोतरी कर सकती थीं लेकिन इस फंड की मदद से किराए में अचानक बढ़ोतरी को रोका जा सकेगा और यात्रियों को राहत मिलेगी। साथ ही यूरोप, उत्तरी अमेरिका और मध्य एशिया जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर भारतीय एयरलाइंस की सेवाएं भी सुचारू रूप से जारी रह सकेंगी।

विमानन उद्योग में एटीएफ कुल ऑपरेशन लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होता है, जबकि असामान्य परिस्थितियों में यह 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

36 महीनों तक लागू रहेगी योजना

सरकार के अनुसार यह कदम विमानन क्षेत्र से जुड़े लगभग 77 लाख रोजगारों की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके अलावा उड़ान योजना के तहत शुरू किए गए टियर-2 और टियर-3 शहरों के हवाई अड्डों की कनेक्टिविटी बनाए रखने में भी यह फंड अहम भूमिका निभाएगा। योजना 36 महीनों तक लागू रहेगी और इसकी हर साल समीक्षा की जाएगी।

इंडिगो के शेयरों में तेजी

इस फैसले का सकारात्मक असर शेयर बाजार में भी देखने को मिला। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो की मूल कंपनी इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में 1.62 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। हालांकि, 4 जून को इंडिगो का शेयर एनएसई पर 0.10% (या -4.60 अंक) गिरावट के साथ 4,507.50 पर कारोबार कर रहा था। एक्सपर्ट का मानना है कि सरकार का यह कदम विमानन उद्योग को स्थिरता देने के साथ-साथ यात्रियों को महंगे हवाई किराए से बचाने में भी मदद करेगा।

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