नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। ग्राम पंचायत को वित्त आयोग से अनुदान मिलता है। वह कई विभागों की योजनाएं चलाती है और ग्राम सभा को जवाब देती है। 28 अक्टूबर को केंद्रीय कैबिनेट ने पंचायत की इसी ताकत को बढ़ाने वाली योजना मंजूर की। इसका नाम प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना है। यह 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी।
केंद्रीय कैबिनेट ने पंचायतों के लिए 7,395.55 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। मकसद है कि वे योजना बनाएं, हिसाब रखें और ऑडिट करें। रकम छोटी है, पर इसी से तय होगा कि गांवों तक पहुंचने वाला बड़ा पैसा कितने काम आएगा।
कैबिनेट की विज्ञप्ति के मुताबिक कुल खर्च 7,395.55 करोड़ रुपये होगा। इसमें केंद्र 4,869.48 करोड़ रुपये देगा और राज्य 2,526.07 करोड़ रुपये। यानी करीब 65.8 फीसदी हिस्सा केंद्र का है। यह हिसाब ब्लिट्ज का है।
हर साल के लक्ष्य
योजना के लक्ष्य हर साल की गिनती में लिखे गए हैं। हर साल 2.55 लाख से ज्यादा ग्राम पंचायत विकास योजनाएं ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर बनेंगी। इतनी ही ऑनलाइन ऑडिट योजनाएं भी पूरी होंगी। करीब 32 लाख चुने हुए प्रतिनिधियों और पंचायत कर्मचारियों को प्रशिक्षण मिलेगा। हर जागरूकता अभियान कम से कम एक करोड़ नागरिकों तक पहुंचेगा।
असली पैसा कहां है
योजना का अपना बजट असली पैसा नहीं है। सोलहवें वित्त आयोग ने इन्हीं पांच बरसों में ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए करीब 4.35 लाख करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है। विज्ञप्ति में यही आंकड़ा दिया गया है।
ब्लिट्ज ने इसे एक पंचायत के स्तर पर गिना। औसत ग्राम पंचायत को हर साल करीब 34 लाख रुपये वित्त आयोग से मिलेंगे। इस योजना से उसे हर साल करीब 58,000 रुपये की मदद मिलेगी। यानी हर 59 रुपये के अनुदान को संभालने की क्षमता पर करीब एक रुपया खर्च होगा।
एक गांव, एक योजना योजना की बुनियाद
हर गांव की एक डिजिटल योजना है। केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य विभागों की योजनाएं एक ही मंच पर आएंगी। हर ग्राम पंचायत विकास योजना में गांव की प्राथमिकताएं, चल रही योजनाएं, लाभार्थी और जमीन पर बनी संपत्तियां दिखेंगी। विभाग अपना काम अपने ढंग से करते रहेंगे। बदलेगा यह कि पंचायत पूरी तस्वीर देख सकेगी और कमी पहचान सकेगी।
ई-ग्रामस्वराज 2020 में शुरू हुआ था। यह भुगतान, सरकारी खरीद, भारतीय भाषाओं और मौसम की जानकारी के सरकारी मंचों से जुड़ा है। जनवरी 2026 में शुरू हुआ व्हाट्सएप चैटबॉट ‘पंचम’ 17 भारतीय भाषाओं में चुने हुए सदस्यों और नागरिकों तक योजना की जानकारी पहुंचाएगा।
प्रशिक्षण इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग मंच और राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण अकादमी के जरिए होगा। कोई स्थायी पद नहीं बनेगा।
राज्य, जिले और ब्लॉक अनुबंध पर तकनीकी कर्मचारी रख सकेंगे।
ऑडिट बीच में क्यों
योजना हर विकास योजना के साथ एक ऑनलाइन ऑडिट योजना जोड़ती है। दोनों को पंचायत की अपनी आमदनी, यानी उसके अपने टैक्स और शुल्क से जोड़ा गया है। इसकी वजह ऑडिट रिपोर्टों में दिखती है। मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट इसका उदाहरण है। इसके मुताबिक जांचे गए जिलों में गांव की जल और स्वच्छता समितियों को 241.74 करोड़ रुपये का सामुदायिक अंशदान मिलना था। जमा हुए सिर्फ 27 लाख रुपये। इसी अंक की निगरानी डेस्क रिपोर्ट में यह ऑडिट विस्तार से है।
प्रधानमंत्री ने उसी दिन 54वीं प्रगति बैठक में मुख्य सचिवों से कहा कि वे हर महीने जिलाधिकारियों के साथ योजनाओं की समीक्षा करें। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक उन्होंने कहा कि शासन का ध्यान खर्च पर नहीं, नतीजों पर होना चाहिए।
अभी यह साफ नहीं है कि हर राज्य अपना हिस्सा कैसे देगा और ब्लॉकों में कर्मचारी कैसे रखेगा। भारत को इससे यह मिल सकता है कि 2.55 लाख स्थानीय सरकारें देश के पैसे को गांव के काम में बदल सकें।
ब्लिट्ज की सलाह
पंचायती राज मंत्रालय ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर हर साल राज्यवार सूची छाप सकता है। इसमें दिखे कि कितनी पंचायत विकास योजनाएं और ऑडिट समय पर पूरे हुए।
राज्य वित्त आयोग के खुले अनुदान को ऑनलाइन ऑडिट पूरा होने से जोड़ सकते हैं। तब समय पर हिसाब देने वाली पंचायतों को पैसा पहले मिलेगा।
महंगाई भत्ता बढ़कर 63 फीसदी
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। केंद्रीय कैबिनेट ने 28 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय कर्मचारियों का महंगाई भत्ता और पेंशनभोगियों की महंगाई राहत 3 फीसदी बढ़ाने को मंजूरी दी। अब यह मूल वेतन या पेंशन का 63 फीसदी होगा, जो पहले 60 फीसदी था। बढ़ोतरी 1 जुलाई 2026 से लागू होगी। इससे 48.54 लाख कर्मचारियों और 68.71 लाख पेंशनभोगियों को फायदा होगा। सरकार पर हर साल 10,016.10 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। ब्लिट्ज के हिसाब से यह हर लाभार्थी पर साल में औसतन करीब 8,543 रुपये है। भारत को इससे यह मिला कि बढ़ती कीमतों के बीच 1.17 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की आमदनी बची रहेगी।
कैंसर की 543 दवाएं सस्ती होंगी
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। कैंसर की 543 ब्रांड की दवाओं की नई अधिकतम खुदरा कीमतें 9 नवंबर 2026 से लागू होंगी। राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण ने 28 अक्टूबर को यह जानकारी दी। प्राधिकरण ने 17 अक्टूबर को कैंसर की 137 दवाओं पर व्यापार मुनाफे की सीमा तय की थी।
उसके उदाहरणों में एनास्ट्रोजोल का एक पैक 695.76 रुपये से घटकर 73 रुपये का होगा। बेवासिजुमैब की एक शीशी 21,767.70 रुपये से घटकर 5,930.13 रुपये की होगी। ब्लिट्ज के हिसाब से यह कमी 89.5 फीसदी और 72.8 फीसदी है। भारत को इससे यह मिला कि कैंसर का इलाज ज्यादा परिवारों की पहुंच में आएगा।
11,333 नए उद्यमों को 1,000 करोड़
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। एमएसएमई मंत्रालय ने 28 अक्टूबर को 1,000 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी जारी की। यह प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत है। यह 11,333 सूक्ष्म उद्यमों के लिए है। इन उद्यमों को बैंकों से करीब 3,260 करोड़ रुपये का कर्ज मिला है। इनसे करीब 1.02 लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। ब्लिट्ज के हिसाब से हर उद्यम को औसतन करीब 8.8 लाख रुपये की सब्सिडी मिली और हर उद्यम में करीब 9 लोगों को काम मिलेगा। मंत्रालय के मुताबिक 2014-15 से अब तक 8.38 लाख उद्यम इस कार्यक्रम से बने हैं। इनमें करीब 80 फीसदी गांवों में हैं। भारत को इससे यह मिला कि लोग नौकरी ढूंढ़ने के बजाय नौकरी देने वाले बन रहे हैं।

खेल सामान को 1,856.67 करोड़ रुपये
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। केंद्रीय कैबिनेट ने 28 अक्टूबर 2026 को ‘खेलो इंडिया’ खेल सामान विनिर्माण योजना मंजूर की। इस पर 2033-34 तक 1,856.67 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पीआईबी की पृष्ठभूमि टिप्पणी के मुताबिक देश में खेल सामान का करीब 90 फीसदी उत्पादन छोटे उद्यम करते हैं। जालंधर और मेरठ इसके बड़े केंद्र हैं। योजना में कम से कम 100 करोड़ रुपये लगाने वाले बड़े निवेशक को 20 फीसदी पूंजी सहायता मिलेगी। 300 एकड़ से बड़े चार तक खेल सामान क्षेत्र बनेंगे। खेल से जुड़े स्टार्टअप को 20 लाख रुपये तक का अनुदान मिलेगा। भारत को इससे यह मिला कि मेरठ और जालंधर के कारीगरों का सामान दुनिया के बड़े बाजार तक पहुंच सकेगा।
फैक्टरी उत्पादन 6.7 फीसदी बढ़ा
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। सितंबर 2026 में देश का औद्योगिक उत्पादन एक साल पहले के मुकाबले 6.7 फीसदी बढ़ा। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने 28 अक्टूबर को यह शुरुआती अनुमान जारी किया। अगस्त में यह बढ़त 8.0 फीसदी थी। विनिर्माण 7.6 फीसदी और बिजली उत्पादन 11.2 फीसदी बढ़ा, जबकि खनन 6.2 फीसदी घटा। मशीन और उपकरण जैसे पूंजीगत सामान का उत्पादन 10.4 फीसदी बढ़ा। रोजमर्रा के सामान का उत्पादन सिर्फ 1.4 फीसदी बढ़ा। अक्टूबर का आंकड़ा 30 नवंबर को आएगा। भारत को इससे यह मिला कि कारखाने नई मशीनें बना रहे हैं, जो आगे उत्पादन बढ़ाएंगी।
कंटेनर बनाने की क्षमता दस गुना
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। केंद्रीय कैबिनेट ने 28 अक्टूबर 2026 को कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना मंजूर की। इस पर 2039-40 तक 10,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के मुताबिक देश हर साल करीब 70,000 टीईयू कंटेनर बनाता है। टीईयू बीस फुट के कंटेनर की इकाई है। योजना का लक्ष्य यह क्षमता करीब 7.5 लाख टीईयू तक पहुंचाना है। हर बिके 20 फुट के कंटेनर पर 49,500 रुपये की मदद मिलेगी। इससे करीब 3,000 सीधी और 50,000 से ज्यादा अप्रत्यक्ष नौकरियां बनने का अनुमान है। भारत को इससे यह मिला कि निर्यात के लिए जरूरी डिब्बे देश में ही बनेंगे।
प्रधानमंत्री बोले, खर्च नहीं नतीजे गिनें
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अक्टूबर 2026 को 54वीं प्रगति बैठक में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की परियोजनाओं की समीक्षा की। प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक इनकी कुल लागत 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इनमें रेलवे, एकता मॉल और थोक दवा पार्क की परियोजनाएं शामिल थीं। उन्होंने मुख्य सचिवों से कहा कि वे हर महीने जिलाधिकारियों के साथ योजनाओं की समीक्षा करें। उन्होंने आंध्र प्रदेश, गुजरात और हिमाचल प्रदेश के दवा पार्कों में दवा का कच्चा माल देश में ही बनाने पर जोर दिया। भारत को इससे यह मिला कि परियोजना की गिनती उसके शुरू होने से होगी, घोषणा से नहीं।

मेक्सिको से व्यापार समझौते की बातचीत
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। भारत और मेक्सिको ने तरजीही व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने की शर्तों पर दस्तखत किए हैं। वाणिज्य मंत्रालय ने 28 अक्टूबर को यह जानकारी दी। बातचीत में सामान के लिए बाजार, उत्पत्ति के नियम, सीमा शुल्क और मानक शामिल होंगे। मंत्रालय ने वाहन, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवा, कृषि खाद्य, ऊर्जा, अहम खनिज और चिकित्सा उपकरण को संभावना वाले क्षेत्र बताया है। मेक्सिको के कारोबारियों का एक दल 2027 की पहली तिमाही में भारत आ सकता है। भारत को इससे यह मिला कि लैटिन अमेरिका के बड़े बाजार में भारतीय सामान पर शुल्क घटने का रास्ता खुला।

नाविक को मिलेगा चौथा उपग्रह
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर । नाविक अभी समय की जानकारी दे सकता है, पर अकेले जगह नहीं बता सकता। इसकी वजह यह है कि उसके सिर्फ तीन उपग्रह काम कर रहे हैं, जबकि चार चाहिए। ये तीन हैं आईआरएनएसएस-1बी, आईआरएनएसएस-1आई और एनवीएस-01। राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने 29 जुलाई 2026 को लोकसभा में लिखित जवाब में यह बताया था।
भारत की अपनी नेविगेशन प्रणाली नाविक को अकेले जगह बताने के लिए चार उपग्रह चाहिए। अभी तीन काम कर रहे हैं। एनवीएस-03 चौथा बनेगा, और उसमें देश में बनी परमाणु घड़ी है।
इसरो के 28 अक्टूबर के मिशन पेज के मुताबिक एनवीएस-03 श्रीहरिकोटा से जीएसएलवी-एफ18 पर छोड़े जाने के लिए तैयार है। यह जीएसएलवी की 20वीं उड़ान होगी।

घड़ी क्यों अहम है
उपग्रह से जगह का पता समय के हिसाब से लगता है। सिग्नल रोशनी की रफ्तार से चलता है। ब्लिट्ज के हिसाब से घड़ी में एक नैनोसेकंड की चूक से जगह में करीब 30 सेंटीमीटर की गलती हो जाती है। इसलिए हर नेविगेशन उपग्रह का दिल उसकी परमाणु घड़ी है।
इसरो के मुताबिक एनवीएस-03 में देश में बनी परमाणु घड़ी के साथ बाहर से खरीदी घड़ियां भी हैं। यानी समय बताने वाली कड़ी का एक अहम पुर्जा अब भारत में बन रहा है।
मोबाइल फोन के लिए क्या बदला
एनवीएस-03 एल5 और एस बैंड के साथ एल1 सिग्नल भी देगा। एल1 वही बैंड है जिसमें जीपीएस का आम लोगों वाला सिग्नल चलता है। इससे मोबाइल फोन जैसे उपकरणों में नाविक जोड़ना आसान होगा। सेवा भारत और उसकी सीमा से 1,500 किलोमीटर आगे तक मिलेगी।
अभी यह सार्वजनिक नहीं है कि देसी घड़ी जांच में कितनी सटीक निकली। यह भी साफ नहीं है कि नाविक दोबारा अकेले जगह कब बताने लगेगा। भारत को इससे यह मिला कि रास्ता, समय और बिजली ग्रिड जैसी जरूरतों के लिए उसे विदेशी प्रणालियों पर निर्भर नहीं रहना होगा।
ब्लिट्ज की सलाह
अंतरिक्ष विभाग नाविक की पूरी सेवा बहाल होने की लक्ष्य तारीख बता सकता है। एनवीएस-04 और एनवीएस-05 के प्रक्षेपण का अनुमानित समय भी बताया जा सकता है। इससे फोन और चिप बनाने वाली कंपनियां नाविक के लिए तैयारी कर सकेंगी।
निगरानी डेस्क — मध्य प्रदेश में नल से जल अधूरा
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर। मध्य प्रदेश में 98.28 लाख ग्रामीण घरों तक नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य था। 9 दिसंबर 2024 तक 60.90 लाख घरों में नल लगे, यानी करीब 62 फीसदी। यह जानकारी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की 2026 की रिपोर्ट संख्या 5 में है। यह रिपोर्ट 22 जुलाई 2026 को सदन में रखी गई। इसमें 2019-20 से 2023-24 तक के काम का ऑडिट है।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन का ऑडिट किया है। रिपोर्ट बताती है कि हर घर नल का काम कहां अटका और राज्य को केंद्र का कितना पैसा नहीं मिल सका।>
केंद्र का पैसा क्यों रुका
रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र ने 2019-24 के दौरान मध्य प्रदेश के हिस्से के 9,297.11 करोड़ रुपये जारी नहीं किए। वजह यह थी कि राज्य समय पर उपलब्ध पैसे का कम से कम 80 फीसदी खर्च नहीं कर सका। राज्य को केंद्र से 13,609.68 करोड़ रुपये मिले थे। ब्लिट्ज के हिसाब से रुकी रकम इसका करीब 68 फीसदी है।
गांव की समितियां
जांचे गए जिलों के 76.14 फीसदी गांवों में ही ग्राम जल और स्वच्छता समितियां बनी थीं। जांचे गए 32 में से 20 गांवों में समितियों की बैठकें नहीं हुईं। सामुदायिक अंशदान के तौर पर 241.74 करोड़ रुपये जमा होने थे, पर सिर्फ 27 लाख रुपये जमा हुए।
पानी और उसकी जांच
जांची गई 28 एकल-गांव योजनाओं में से 7 काम नहीं कर रही थीं। राज्य की प्रयोगशालाओं में तय जांचों में से सिर्फ 22 से 48 फीसदी ही हुईं। रिपोर्ट ने ग्वालियर और नर्मदापुरम में अच्छे काम का जिक्र भी किया है।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव ने 13 जून 2025 की बैठक में ऑडिट की सिफारिशें मान लीं। भारत को इस ऑडिट से हर राज्य के लिए साफ सबक मिला है। खर्च की रफ्तार तय करती है कि केंद्र का कितना पैसा आएगा, और गांव की समिति तय करती है कि नल चलता रहेगा या नहीं।
ब्लिट्ज की सलाह
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग मिशन के डैशबोर्ड पर हर गांव की समिति की बैठकों और अंशदान का ब्योरा डाल सकता है।
राज्य किसी योजना को तभी पूरा माने जब उसमें पानी की नियमित जांच हो रही हो और नल से पानी आ रहा हो।














