रांची। गरीबी को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ताकत बनाकर रांची के अंकित मिश्रा ने इतिहास रचा। एक रिश्तेदार की शादी में इसलिए नहीं बुलाया गया क्योंकि अंकित के माता-पिता चाय बेचते थे। इस अपमान ने उन्हें आगे बढ़ने का जज्बा दिया और 23 साल की उम्र में उन्होंने यूपीएससी सीएपीएफ परीक्षा क्रैक की। ऑल इंडिया रैंक 236 हासिल करके वह क्लास-1 अधिकारी बने। अंकित की सक्सेस स्टोरी हर उस युवा के लिए मिसाल बन गई है जो अपनी जीत तलाश रहा है।
पक्क ा घर नहीं था, पढ़ाई में हमेशा मेधावी रहे अंकित
अंकित मिश्रा का सफर कठिन परिस्थितियों के बीच शुरू हुआ था। वह जोशटाॅक के वीडियो में अपनी संघर्ष की जर्नी साझा करते हुए बताते हैं कि उनके पिता एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक थे। घर की आर्थिक तंगी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनके पास अपना पक्क ा घर तक नहीं था। 10वीं में जिला टाॅप करने के बाद भी इंग्लिश मीडियम स्कूल में ढलना उनके लिए बड़ी चुनौती थी।
11वीं में 94 प्रतिशत अंक आने पर उन्हें हौसला मिला और लगातार मेहनत करके उन्होंने बड़ी कक्षाओं में 83 प्रतिशत अंक हासिल करके खुद को हमेशा मेधावी की कैटेगरी में रखा।
अंकित का दृढ़ संकल्प
वह बताते हैं कि जिंदगी में गरीबी और आर्थिक स्थिति के आधार पर उनके परिवार का आकलन किया गया है। एक पारिवारिक शादी में उन्हें और उनके माता-पिता को केवल इसलिए नहीं बुलाया गया क्योंकि वे चाय बेचते थे। इस अपमान ने उन्हें झकझोर दिया और और उन्होंने ठान लिया कि वह अपनी मेहनत से ऐसी स्थिति तक पहुंचेंगे कि समाज का नजरिया बदल जाए। यह घटना उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट बनी।
नौकरी जाने के बाद पिता ने चाय का ठेला लगाया, अंकित ने की मदद
कोविड के दौरान अंकित के परिवार पर एक और संकट आ गया। पिता की प्राइवेट नौकरी छूट गई और इससे परेशानियां और बढ़ गईं। ऐसे समय में अंकित ने हार नहीं मानी और घर-घर जाकर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। उन्होंने छोटी सी बचत से पिता को चाय का ठेला लगाने में मदद की। अपनी पढ़ाई और ट्यूशन के बीच तालमेल बैठाते हुए उन्होंने जीवन की कठिन परिस्थितियों को समझा और जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़े।
अनुशासन के साथ तैयारी
घर के कठिन हालातों के बाद भी अंकित का सपना बड़ा था। काॅलेज के दौरान उन्होंने दोस्तों के साथ पिकनिक छोड़कर अपनी पूरी ताकत यूपीएससी की तैयारी में लगा दी। वे दिल्ली गए और संसाधनों की कमी को अपनी मेहनत से पूरा किया। पुराने नोट्स और किताबों से पढ़ाई की। उनका अनुशासन ही था कि वे अपनी काॅलेज की पढ़ाई और यूपीएससी की तैयारी को एक साथ मैनेज कर सके।
पहले असफलता मिली
अंकित का पहला प्रयास चुनौतीभरा रहा और वह सिर्फ 7 अंकों से फाइनल सिलेक्शन से चूक गए। शारीरिक चोट के बाद भी उन्होंने फिजिकल टेस्ट में अपनी पूरी जान लगा दी। उनके पिता का दर्द कि ‘कब तक संघर्ष चलेगा’ उन्हें और मजबूती देता रहा। 2025 की यूपीएससी सीएपीएफ परीक्षा में उन्होंने एआईआर 236 लाकर 23 साल की उम्र में क्लास-1 गैजेटेड ऑफिसर बनने का सपना पूरा किया। उनकी यह यात्रा बताती है कि दृढ़ संकल्प के सामने गरीबी और अपमान हमेशा छोटे पड़ जाते हैं।














