दौसा। विगत दिवस जब जिले में उल्लास-नव भारत साक्षरता अभियान के तहत परीक्षा हुई तो परीक्षा केंद्रों पर नजारा अलग ही था। बेंचों पर स्कूल के बच्चे नहीं, बल्कि 60 से 70 साल की दादियां बैठी थीं। हाथ कांप रहे थे, लेकिन आंखों में अपना नाम लिखने का जज्बा था। कई बुजुर्ग महिलाओं ने पहली बार परीक्षा में बैठकर पढ़ने-लिखने की अपनी इच्छा को पूरा किया।
पांचोली परीक्षा केंद्र पर 70 साल की रामप्यारी देवी पहली बार परीक्षार्थी बनीं। पर्चा हाथ में लेते ही उन्होंने कहा कि आज तक अंगूठा लगाती थीं, लेकिन आज पहली बार कलम पकड़ी है। अब वह खुद अपना नाम और अपने पोते का नाम भी लिखेंगी। रामप्यारी जैसी कई महिलाओं के लिए यह परीक्षा सिर्फ पढ़ाई का हिस्सा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम रही।
लक्ष्य से आगे निकला दौसा
जिला साक्षरता विभाग को 35,000 नवसाक्षरों को परीक्षा में शामिल कराने का लक्ष्य दिया गया था। दौसा ने 35,118 नवसाक्षरों को परीक्षा दिलाकर लक्ष्य से 118 अधिक की भागीदारी दर्ज की।














