ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली।अगर आप खेत, निर्माण, घरेलू काम, रेहड़ी या ऐप से मिलने वाले काम में हैं, तो यह रजिस्ट्रेशन मुफ़्त है और एक बार का है। पाँच साल में देश के 31.89 करोड़ लोग इसमें आ चुके हैं।
ई-श्रम पोर्टल 26 अगस्त 2021 को शुरू हुआ था और आज इसके पाँच साल पूरे हो गए। श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के मुताबिक अब तक 31.89 करोड़ रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं। हर रजिस्टर्ड मज़दूर को 12 अंकों का यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) मिलता है। सबसे ज़्यादा रजिस्ट्रेशन उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से हुए हैं।
एक बात जो अक्सर नहीं बताई जाती: इस सूची में महिलाएँ 54.28 प्रतिशत हैं और पुरुष 45.72 प्रतिशत। यानी करीब 17.31 करोड़ महिलाएँ। असंगठित क्षेत्र में घरेलू काम, खेती और कपड़ा उद्योग — तीनों में महिलाओं की संख्या बहुत बड़ी है, और यह डेटाबेस पहली बार उसे गिनकर दिखाता है।
ये चार क्षेत्र सबसे आगे। खेती, घरेलू काम, निर्माण और कपड़ा — ई-श्रम में सबसे ज़्यादा रजिस्ट्रेशन इन्हीं से हैं। तस्वीर में कपड़ा उद्योग के श्रमिक।
रजिस्ट्रेशन अपने आप पैसा नहीं देता। यह वह पता है जिस पर योजना पहुँच सकती है — और बिना पते के कोई योजना किसी तक नहीं पहुँचती।
एक नज़र में
• कौन कर सकता है: 16 साल या उससे ऊपर, असंगठित क्षेत्र का कोई भी कामगार
• कौन नहीं: आयकर देने वाले, और ईपीएफ़ओ या ईएसआईसी के सदस्य
• क्या चाहिए: आधार नंबर और मोबाइल नंबर (आधार से जुड़ा हो तो बेहतर)
• कहाँ: register.eshram.gov.in या नज़दीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC)
• फ़ीस: पूरी तरह मुफ़्त — किसी को पैसे न दें
• भाषाएँ: भाषिणी के ज़रिए 22 भाषाओं में
अब सबसे ज़रूरी हिस्सा — इससे मिलता क्या है। 21 अक्टूबर 2024 से पोर्टल पर वन-स्टॉप सॉल्यूशन चालू है, जिसमें 15 सामाजिक सुरक्षा और कल्याण योजनाएँ एक ही जगह जुड़ गई हैं। रजिस्टर्ड कामगार सीधे पोर्टल से प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में जुड़ सकता है — दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर ₹2 लाख और आंशिक विकलांगता पर ₹1 लाख। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना में किसी भी कारण से मृत्यु पर ₹2 लाख का जीवन बीमा है। और प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना में 60 साल की उम्र के बाद हर महीने कम से कम ₹3,000 की पेंशन तय है। इसके अलावा पोर्टल नेशनल करियर सर्विस से नौकरी और स्किल इंडिया डिजिटल हब से ट्रेनिंग तक ले जाता है।
एक कमी भी साफ़ दिखती है, और उसे बताना ज़रूरी है। ऐप से काम पाने वाले — डिलीवरी करने वाले, कैब चलाने वाले, यानी गिग और प्लेटफ़ॉर्म वर्कर — अब तक सिर्फ़ करीब 11.5 लाख ही रजिस्टर्ड हैं। 31.89 करोड़ के मुक़ाबले यह 0.36 प्रतिशत है, यानी हर 277 में से एक। शहरों में सबसे तेज़ी से बढ़ता काम यही है और सूची में सबसे पतला खाना भी यही है। अगर आप इस काम में हैं, तो रजिस्ट्रेशन में दस मिनट लगते हैं और आधार व मोबाइल के अलावा कुछ नहीं चाहिए। जिस दिन यह खाना भर जाएगा, उस दिन इस वर्ग के लिए बीमा और पेंशन की योजनाएँ बनाना आसान हो जाएगा — क्योंकि सरकार पहली बार जान पाएगी कि आप कितने हैं और कहाँ हैं।












